facebookmetapixel
Advertisement
Reliance पावर के ठिकानों पर ED की बड़ी कार्रवाई, 12 जगहों पर 15 टीमों की रेड; लेकिन शेयरों में तेजीट्रंप ने ईरानी की IRGC से कहा- ह​थियार डाल दें, मिलेगी ‘पूरी सुरक्षा और माफी’Gold Price Today: सोना-चांदी के वायदा भाव में तेज उछाल, MCX पर सोना ₹1.61 लाख और चांदी ₹2.67 लाख के करीबबंगाल चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दिया इस्तीफा, आरएन रवि को अतिरिक्त प्रभारभारत-फिनलैंड के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी की ओर, डिजिटल और स्थिरता पर जोरआरबीआई ने सीएमआई को बैंक वित्त के नियम कड़े किए, लिवरेज और शुल्क आय पर असर संभवईरान अमेरिका युद्ध का पड़ेगा फर्टिलाइजर, रिफाइनरी और केमिकल सेक्टर पर असरः क्रिसिलबीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई के बाद पहला सौदा, क्यूबीई खरीदेगा रहेजा क्यूबीई में 51% हिस्सेदारीबेहतर अवसरों के बावजूद भारत में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी कमवित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में गोल्ड लोन वितरण बढ़कर 8.16 लाख करोड़ रुपये हुआ

ईरान अमेरिका युद्ध का पड़ेगा फर्टिलाइजर, रिफाइनरी और केमिकल सेक्टर पर असरः क्रिसिल

Advertisement

ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही बढ़कर 82 से 84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जो जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान औसतन 66 से 67 डॉलर प्रति बैरल थी।

Last Updated- March 06, 2026 | 9:49 AM IST
India Russia fertiliser

पश्चिम एशिया में चल रही भू राजनीतिक अनिश्चितता अगर लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत के सेरामिक्स और उर्वरक जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, जो आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा कि निकट अवधि के हिसाब से इनका उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल से जुड़े क्षेत्रों जैसे तेल शोधन, टायर, पेंट, केमिकल्स, फ्लेक्सिबल पैकेजिंस और सिंथेटिक टेक्सटाइल पर भी असर पड़ सकता है।

भारत कच्चे तेल की अपनी कुल जरूरतों का 85 प्रतिशत और एनएनजी की जरूरतों का आधा आयात करता है। इसमें से 40 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 50 से 60 प्रतिशत एलएनजी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते आता ह। 1 मार्च 2026 से इस मार्ग से ज्यादातर जहाजों की आवाजाही बंद है और अगर कोई भी व्यवधान अगर लंबा खिंचता है तो इससे कच्चे तेल और एलएनजी की वैश्विक उपलब्धता और उनकी कीमतों पर असर पड़ेगा।

ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही बढ़कर 82 से 84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है, जो जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान औसतन 66 से 67 डॉलर प्रति बैरल थी। एशियन स्पॉट एलएनजी की कीमत 10 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़कर 24 से 25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो गई है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा है, ‘अगर कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो भारत के चालू खाते का घाटा और बढ़ेगा और साथ ही महंगाई में भी बढ़ोतरी होगी। इसका असर भारत की कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ेगा, क्योंकि हर क्षेत्र में ऊर्जा की प्रमुख भूमिका है।’

भारत अपनी कुल खपत का दो तिहाई तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात करता है, जिसमें से ज्यादातर पश्चिम एशिया से आता है। एलपीजी यानी रसोई गैस का इस्तेमाल घरों में खाना बनाने के लिए होता है और इसका 10 प्रतिशत ही औद्योगिक इस्तेमाल है। ऐसे में एलपीजी का उद्योग पर सीमित असर होगा।

Advertisement
First Published - March 6, 2026 | 9:49 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement