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लार्जकैप फंडों के मुकाबले स्मॉलकैप से दोगुना पैसा कमा रहे निवेशक

Last Updated- April 20, 2023 | 10:01 PM IST
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मार्च में काफी उतारचढ़ाव के बावजूद म्युचुअल फंड निवेशकों ने जोखिम भरी स्मॉलकैप योजनाओं में निवेश से परहेज नहीं किया। स्मॉलकैप फंडों में निवेश कुल मिलाकर न सिर्फ सबसे ज्यादा रहा बल्कि सभी एमकैप श्रेणियों में प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों के अनुपात में भी सबसे ज्यादा रहा।

निवेशकों ने स्मॉलकैप फंडों में 2,430 करोड़ रुपये निवेश किए, जो उनके एयूएम 1.33 लाख करोड़ रुपये का 1.8 फीसदी है। इस बीच, मिडकैप योजनाओं में निवेश उनके एयूएम का 1.2 फीसदी रहा जबकि एयूएम में लार्जकैप योजनाओं की हिस्सेदारी महज 0.4 फीसदी रही।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के इक्विटी रणनीतिकारों विनोद कार्की और नीरज करमानी ने एक नोट में कहा है, ऐक्टिव मार्केट कैप आधारित एमएफ पोर्टफोलियो ने लार्जकैप फंडों के मुकाबले मिड व स्मॉलकैप फंडों की तरफ से ज्यादा खरीदारी देखी, जो बताता है कि देसी निवेशकों ने जोखिम उठाया।

वित्त वर्ष 22-23 में स्मॉलकैप योजनाओं में शुद्ध‍ निवेश लार्जकैप फंडों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा रहा। उद्योग निकाय एम्फी के आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों ने वित्त वर्ष 23 में स्मॉलकैप योजनाओं में 22,100 करोड़ रुपये का शुद्ध‍ निवेश किया जबकि लार्जकैप योजनाओं में महज 8,370 करोड़ रुपये का निवेश आया।

मिडकैप योजनाओं को 20,200 करोड़ रुपये का निवेश हासिल हुआ। पूरे साल निवेश लगातार आता रहा और निवेशकों ने पिछले 12 में से 10 महीने में स्मॉलकैप व मिडकैप योजनाओं में 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया। पूरा बाजार हालांकि अपने-अपने उच्चस्तर से नीचे आया पर स्मॉलकैप ने सबसे ज्यादा गिरावट देखी।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स अभी अब तक के सर्वोच्च स्तर 12,047 से 22 फीसदी नीचे है, जो उसने पिछले साल जनवरी में दर्ज किया था। इसकी तुलना में निफ्टी-50 इंडेक्स अपने उच्चस्तर 18,888 से करीब 7 फीसदी दूर है, जो उसने 1 दिसंबर 2022 को दर्ज किया था। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 5 फीसदी से कम नीचे है।

स्मॉलकैप व मिडकैप में निवेश को लार्जकैप के मुकाबले जोखिम भरा माना जाता है क्योंकि स्मॉल व मिडकैप में ज्यादा उतारचढ़ाव होता है। हालांकि मिड व स्मॉलकैप फंडों में निवेश कम जोखिम भरा हो सकता है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के नोट में कहा गया है, मिड व स्मॉलकैप एमएफ पोर्टफोलियो अपेक्षाकृत महंगे होते हैं और बेंचमार्क सूचकांकों (निफ्टी मिडकैप 100 व निफ्टी स्मॉलकैप) के मुकाबले उनका इक्विटी पर रिटर्न ज्यादा होता है। कुल मिलाकर मिडकैप व स्मॉलकैप फंडों पर बेंचमार्क सूचकांकों के मुकाबले असर डालने वाला कारक बताता है कि यह कम जोखिम वाला पोर्टफोलियो होता है।

विश्लेषकों का मानना है कि जोखिम वाली योजनाओं में मजबूत निवेश बताता है कि निवेशक लंबी अवधि के लिहाज से दांव लगा रहे हैं।

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एमएफ वितरक प्लेटफॉर्म फिस्डम के सह-संस्थापक आनंद डालमिया ने कहा, मार्च में पूरे समय इक्विटी में व्यापक उतारचढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने सेक्टोरल व थीमेटिक फंडों का फायदा उठाया। ये निवेशक लंबी अवधि में बढ़त की संभावना पहचानते हैं और बाजार में गिरावट के दौरान खरीदारी कर फायदा उठाने को इच्छुक होते हैं। यह प्रवृत्ति मिडकैप व स्मॉलकैप श्रेणियों में हुए शुद्ध‍ निवेश में प्रतिबिंबित भी हुआ है।

स्मॉलकैप व मिडकैप योजनाओं में निवेश आने की एक अन्य वजह यह भरोसा है कि फंड मैनेजरों के पास इन क्षेत्रों में बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए काफी गुंजाइश होती है। रिपोर्ट से पता चलता है कि सक्रियता से प्रबंधित लार्जकैप योजनाएं हर अवधि में अपने-अपने बेंचमार्क को मात देने में नाकाम रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप निवेशकों ने अपने लार्जकैप आवंटन के लिए पैसिव योजनाओं को प्राथमिकता देना शुरू किया है।

First Published - April 20, 2023 | 10:01 PM IST

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