facebookmetapixel
Advertisement
चुनावी वादे पूरे करना नवनिर्वाचित सरकारों के लिए साबित होगा भारी-भरकम सिरदर्दEditorial: देश के प्रमुख जलाशयों में तेजी से घट रहा पानी, अधिकतर नदी बेसिन गंभीर जल संकट के कगार परRBI Annual Report: RBI के विदेशी मुद्रा लेन-देन का मुनाफा 52% बढ़ा, कमाया ₹1.69 लाख करोड़ का लाभपश्चिम एशिया युद्ध के कारण बढ़ी घबराहट, देश में यूरिया 10% और DAP की बिक्री में 39% तक की बढ़ोतरीAsian Paints Q4 Results: कंपनी का मुनाफा 69.3% उछला, चौथी तिमाही में कमाए ₹1,172 करोड़IndiGo Q4 Results: कंपनी को Q4 में ₹2,537 करोड़ का भारी घाटा, खर्च में भी 30% की बढ़ोतरीविदेश में भी चलेगा डिजिटल रुपया, सीमा-पार भुगतान के लिए पायलट प्रोजेक्ट लाएगा RBIकुछ ही हफ्तों में होगा भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, अंतिम चर्चा के लिए दिल्ली आ रहा अमेरिकी दल: गोरस्टेडियम शोज और शाही शादियों से चमकी लाइव इवेंट्स इंडस्ट्री, ₹15,000 करोड़ का होगा बाजारShare Market Crash: सेंसेक्स 1092 अंक टूटा, निफ्टी में भारी गिरावट; निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ डूबे

Mutual Fund निवेशकों के लिए निवेश करना होगा और सस्ता

Advertisement

सेबी MF योजनाओं पर खर्च कम करने पर कर रहा विचार, MF कंपनियों को सभी शुल्कों को TER में रखने का दे सकता है निर्देश

Last Updated- February 17, 2023 | 10:02 PM IST
March 31 deadline: Relief for mutual fund investors on re-KYC directive March 31 deadline: Mutual Fund निवेशकों के लिए राहत की बड़ी खबर, मगर ये काम नहीं किया तो 1 अप्रैल से रोक दी जाएगी KYC

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) म्युचुअल फंड (MF) योजनओं में निवेश पर आने वाला खर्च और कम करना चाहता है। सूत्रों ने कहा कि बाजार नियामक MF योजनाओं में आने वाले खर्च एवं शुल्कों की समीक्षा कर रहा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि SEBI एमएफ कंपनियों को निवेशकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले सभी शुल्कों को टोटल एक्सपेंस रेश्यो (TER) के तहत रखने का निर्देश दे सकता है।

इस समय फंड प्रबंधन पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगता है जो TER के दायरे में नहीं आता है। इसके अलावा प्रतिभूति या शेयर खरीदने या बेचने पर आने वाला खर्च भी TER में शामिल नहीं है। निवेशकों को जितनी रकम खर्च करनी पड़ती है वे सभी निवेश पर आए खर्च में शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी MF योजना के तहत 100 रुपये के शेयर खरीदते जाते हैं और ब्रोकरेज को 2 रुपये दिए जाते हैं तो निवेश पर आया खर्च 102 रुपये माना जाता है।

सूत्रों के अनुसार SEBI इन खर्चों को TER के दायरे में लाना चाहता है। इस संबंध में सेबी को भेजे गए सवाल का कोई जवाब नहीं आया। MF कंपनियों को एक योजना का प्रबंधन करने पर जितना खर्च आता है उसे TER कहा जाता है। TER में बिक्री एवं मार्केटिंग खर्च, विज्ञापन खर्च, प्रशासनिक खर्च, निवेश प्रबंधन शुल्क सहित अन्य खर्च आते हैं।

सेबी ने तय कर रखा है कि कोई MF योजना कितना TER ले सकती है। कोई इक्विटी योजना प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (assets under management) का अधिकतम 2.25 प्रतिशत रकम TER के रूप में ले सकती है। डेट योजनाओं के मामले में यह शुल्क 2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

GST और लेनदेन शुल्क को TER में शामिल करने से निवेश पर आने वाला खर्च कम हो जाएगा मगर इससे MF इंडस्ट्री का मुनाफा अर्जित करने की क्षमता कमजोर हो जाएगी क्योंकि बाजार नियामक कुल सीमा में बदलाव करने से इनकार कर सकता है।

सूत्रों ने कहा कि सेबी अतिरिक्त TER समाप्त करने से संबंधित एक प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है। सेबी MF कंपनियों को तथाकथित 30 बड़े शहरों से बाहर छोटी जगहों से निवेश लाने के बदले अतिरिक्त TER लेने की इजाजत देता है। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि कई योजनाएं इस समय सेबी द्वारा स्वीकृत अधिकतम सीमा से कम ही टीईआर लेती है।

MF इंडस्ट्री के एक प्रतिनिधि ने कहा कि TER के तहत GST जैसे खर्च लाने से फंड कंपनियां जहां भी संभव दिखेगा वहां TER बढ़ाने पर विवश हो सकती हैं। पिछले कई वर्षों से सेबी निवेशकों के लिए एमएफ योजनाओं में निवेश पर खर्च कम करने के लिए कदम उठाता रहा है।

पिछली बार जब सेबी ने TER में कटौती की घोषणा की थी तो ज्यादातर फंड कंपनियों ने इसकी भरपाई के लिए कटौती का बोझ वितरकों पर डाल दिया था। अक्टूबर 2018 में सेबी ने दो बदलाव किए थे। पहले बदलाव के तहत नियामक ने टीईआर कम कर दिया था और दूसरे बदलाव के तहत वितरकों के अग्रिम कमीशन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

Advertisement
First Published - February 17, 2023 | 10:02 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement