facebookmetapixel
Advertisement
दोपहिया वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी, ओवर-स्पीडिंग अलर्ट से रिफ्लेक्टिव टायर तक नए नियमRBI की अगली दर चाल पर सस्पेंस, MPC सदस्य बोले- महंगाई बढ़ी तो रीपो रेट पर फिर विचारबंगाल की खाड़ी में जहाज हादसा, 22 नाविकों की तलाश में जुटी नौसेना-तटरक्षक बलफ्रंट-रनिंग मामले में केतन पारिख को झटका, सैट ने अपील खारिज कीआर्थिक उदारीकरण के 35 साल: जिस विदेशी प्रतिस्पर्धा से डरा बॉम्बे क्लब, उसी देसी समूहों ने कैसे बनाया दबदबाभारत को उर्वरक निर्यात बढ़ाने को तैयार रूस, 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्यपैसिव फंड्स में बढ़ा इंडेक्स फंड का दबदबा, 5 साल में AUM 74% CAGR से बढ़ाEditorial: मोबाइल टैरिफ बढ़ने के संकेत, 5G निवेश और बेहतर सेवाओं के लिए ARPU बढ़ाना जरूरीREC जारी करेगा भारत का पहला टोकनयुक्त कॉरपोरेट बॉन्ड, खरीद में इस्तेमाल होगी डिजिटल करेंसीहाई यील्ड की मांग का असर: PFC ने वापस लिया 3 साल का बॉन्ड इश्यू, 15 साल के बॉन्ड से जुटाए ₹2500 करोड़

IPO से 3 फीसदी बढ़ा भारत का MCap, जुटाए गए 1.8 लाख करोड़ रुपये

Advertisement

इसके मुकाबले पिछले साल आईपीओ के जरिये देश के बाजार मूल्यांकन में 1.4 फीसदी यानी 5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ था।

Last Updated- December 25, 2024 | 10:10 PM IST
India's MCap increased by 3 percent from IPO, Rs 1.8 lakh crore raised IPO से 3 फीसदी बढ़ा भारत का MCap, जुटाए गए 1.8 लाख करोड़ रुपये

इस साल आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये भारत का बाजार मूल्यांकन तीन फीसदी (14 लाख करोड़ रुपये) बढ़ गया है। इसके मुकाबले पिछले साल आईपीओ के जरिये देश के बाजार मूल्यांकन में 1.4 फीसदी यानी 5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ था।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक बाजार मूल्यांकन में आईपीओ का इस साल का कुल योगदान अब तक का सबसे अधिक है। हालांकि इससे पहले आईपीओ ने बाजार मूल्यांकन में साल 2017 में 3.7 फीसदी और साल 2019 में 3.4 फीसदी योगदान दिया था, जो सबसे अधिक था।

इस साल आईपीओ के जरिये 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। यह साल 2023 के मुकाबले 2.6 गुना अधिक है जब 57,600 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इस साल आए बड़े निर्गमों में ह्युंडै मोटर इंडिया (27,860 करोड़ रुपये), स्विगी (11,330 करोड़ रुपये), एनटीपीसी ग्रीन (10,000 करोड़ रुपये) और विशाल मेगा मार्ट (8,000 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

मोतीलाल ओसवाल ने पाया है, ‘बीते साल विभिन्न क्षेत्रों के आईपीओ आए थे जिसने निवेशकों को भारत की विकास गाथा से जुड़ने का विविध मौका दिया था जो भारतीय पूंजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत था।’

इस साल लार्जकैप कंपनियों ने कुल मिलाकर 60,100 करोड़ रुपये जुटाए। इनमें से सिर्फ पांच बड़ी कंपनियों की इसमें 34 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बीच, मिडकैप कंपनियों ने 49,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं (नौ कंपनियों की 28 फीसदी हिस्सेदारी रही) और स्मॉल कैप कंपनियों ने 66,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें 303 कंपनियों की 38 फीसदी हिस्सेदारी रही, जिसमें एसएमई आईपीओ भी शामिल हैं।

Advertisement
First Published - December 25, 2024 | 10:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement