मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़

MP Economic Survey: मध्य प्रदेश की आर्थिक समीक्षा पेश, 16.69 लाख करोड़ रुपये पहुंचा जीएसडीपी

राजकोषीय स्थिति के लिहाज से भी राज्य संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। 2025–26 के बजट अनुमान के अनुसार राजकोषीय घाटा 4.6 प्रतिशत रहने की संभावना है

Published by
संदीप कुमार   
Last Updated- February 17, 2026 | 7:21 PM IST

MP Economic Survey: मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार को पेश होने जा रहे बजट से एक दिन पहले मंगलवार को प्रदेश विधानसभा में वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा पेश की। सरकार ने इसके माध्यम से प्रमुख आर्थिक संकेतक सामने रखे। इसके मुताबिक 2025-26 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 11.14 फीसदी की दर से बढ़ने और प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय के बढ़कर 1,69,050 रुपये होने का अनुमान है। 2011-12 में यह केवल 38,497 रुपये थी।

खेती और पशुपालन में सुधार

खेती और पशुपालन के क्षेत्र में भी राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार होता दिख रहा है। सकल राज्य मूल्य वर्धन में 2025-26 में फसलों का योगदान करीब 6.38 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि पशु धन की हिस्सेदारी 7.08 फीसदी से बढ़कर 7.22 फीसदी हो गई है। राजकोषीय स्थिति के लिहाज से भी राज्य संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। 2025–26 के बजट अनुमान के अनुसार राजकोषीय घाटा 4.6 प्रतिशत रहने की संभावना है। साथ ही केंद्र से मिलने वाले करों में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद जताई गई है, जिससे विकास योजनाओं को गति मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व संग्रह और केंद्र से मिलने वाले हिस्से में वृद्धि होती है तो राज्य की विकास परियोजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलेगी।

Also Read: Explainer: AI से खेती का समाधान! किसानों के लिए वरदान कहा जा रहा Bharat-VISTAAR क्या है?

16.69 लाख करोड़ रुपये पहुंचा जीएसडीपी

आर्थिक समीक्षा पेश करते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि प्रदेश ने दूरदर्शी आर्थिक नीतियों के साथ संतुलित और समावेशी विकास का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 अग्रिम अनुमान में राज्य का जीएसडीपी प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रुपये आंका गया है, जो वर्ष 2024-25 के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार स्थिर (2011-12) भाव पर जीएसडीपी 7,81,911 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। उन्होने कहा कि आर्थिक विस्तार केवल मूल्य वृद्धि का परिणाम नहीं, बल्कि वास्तविक उत्पादन और गतिविधियों में वृद्धि का परिणाम है।

प्राथमिक क्षेत्र में वर्ष 2025-26 में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 6,33,532 करोड़ रुपये की तुलना में 7.31 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। द्वितीयक क्षेत्र का कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन वर्ष 2025-26 में 3,12,350 करोड़ रुपये रहा, जो 9.93 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इसी प्रकार तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज गति से वृद्धि की है। वर्ष 2025-26 में इसका कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 5,85,588 करोड़ रुपये रहा, जो 15.80 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

First Published : February 17, 2026 | 7:21 PM IST