शेयर बाजार

सोने से लेकर तेल तक जिंसों में तेजी थमी, मेटल और एनर्जी कीमतों पर दबाव बढ़ा

तांबा, जस्ता और सीसा जैसी धातुओं से लेकर लौह अयस्क, सोना, चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में जनवरी के अंत में अपने 52-सप्ताह के ऊंचे स्तर से 21% तक की गिरावट आई है

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- February 17, 2026 | 10:21 PM IST

विश्लेषकों का कहना है कि अधिकांश कमोडिटी की कीमतों पर कुछ महीनों तक दबाव रहेगा और इस क्षेत्र में तेजी का दौर फिलहाल खत्म हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार तांबा, जस्ता और सीसा जैसी धातुओं से लेकर लौह अयस्क, सोना, चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में जनवरी के अंत में अपने 52-सप्ताह के ऊंचे स्तर से 21 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और शोध प्रमुख जी चोकालिंगम के अनुसार सोना पारंपरिक रूप से लगभग 6 प्रतिशत का दीर्घाव​धि वार्षिक औसत रिटर्न देता था। लेकिन एक साल में 100 प्रतिशत तक बढ़ गया है। निवेशक अब इस पीली धातु से बाहर निकल रहे हैं।

चोकालिंगम ने कहा, ‘मौजूदा चक्र की कमोडिटी तेजी काफी हद तक खत्म हो चुकी है। धातुओं में हालिया गिरावट क्रिप्टोकरेंसी और टेक्नॉलजी से संबंधित शेयरों में बड़ी गिरावट के साथ हुई। अभी भी अधिकांश कमोडिटी में मुनाफा बुक करना एक अच्छी रणनीति होगी।’

विश्लेषकों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में तेल और गैस अन्य कमोडिटी की तेजी में शामिल नहीं हुए और इनकी कीमतें तब तक स्थिर रहने की संभावना है, जब तक कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम अल्पकालिक तेजी को बढ़ावा न दें।

चोकालिंगम ने कहा, ‘धातुओं (कीमती और औद्योगिक) में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है और अगले छह महीनों में इनमें कम से कम 10 प्रतिशत की गिरावट आएगी। वैश्विक आ​र्थिक वृद्धि में संभावित नरमी और क्रिप्टो तथा टेक्नॉलजी शेयर जैसे प्रमुख परिसंप​त्ति वर्ग में गिरावट आगे कमोडिटी कीमतों के लिए कुछ जोखिम पैदा कर सकती हैं।

तेल एवं गैस

आंकड़ों से पता चलता है कि प्राकृतिक गैस कमोडिटी में सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी कीमतें 28 जनवरी को 7.83 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट के 52-सप्ताह के ऊंचे स्तर से लगभग 62 प्रतिशत गिरकर 16 फरवरी को 2.99 डॉलर पर आ गई हैं। आंकड़े बताते हैं कि कच्चा तेल 18 जून, 2025 के अपने 52-सप्ताह के ऊंचे स्तर 78.31 डॉलर प्रति बैरल से लगभग 13.3 प्रतिशत गिरकर अब 67.9 डॉलर पर आ गया है।

स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा कि तेल की कीमतें और गिर सकती हैं क्योंकि 2026 में मांग की तुलना में आपूर्ति अधिक रहने की उम्मीद है। जिंस कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी निवेशकों को बाहर निकलने के लिए प्रेरित करेगी।

बालिगा ने कहा, ‘तेल और गैस के लिए, एकमात्र जोखिम भू-राजनीतिक मुद्दों का बढ़ना है, खासकर अल्पाव​धि में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव। प्राकृतिक गैस की कीमतें पहले ही गिर चुकी हैं। इसलिए अब इसके स्थिर होने की उम्मीद है। कीमती धातुएं गिरावट के पूर्वग्रह के साथ अस्थिर रह सकती हैं, जब तक कि भू-राजनीतिक परिदृश्य में कोई बड़ी अनहोनी घटना न हो जाए।’

राबोबैंक इंटरनैशनल के विश्लेषकों का अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड 2026 की पहली तिमाही में लगभग 60 डॉलर पर कारोबार करेगा और फिर कैलेंडर वर्ष के बाकी समय में औसतन 58 से 60 डॉलर के बीच रहेगा। राबोबैंक इंटरनैशनल के जो डेलाउरा और फ्लोरेंस श्मिट ने कच्चे तेल पर अपनी 2026 आउटलुक रिपोर्ट में कहा, ‘हमें उम्मीद है कि पूरे वर्ष में कुछ तीव्र और शार्ट की बिकवाली 55 डॉलर से नीचे होगी, क्योंकि ज्यादा आपूर्ति के शोर से घबराहट हो सकती है।’

कृषि कमोडिटी

कृषि कमोडिटी में मक्का, कपास (नंबर 2), सोयाबीन वायदा, चीनी और गेहूं 2025 में अपने 52-सप्ताह के ऊंचे स्तर से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में 29 प्रतिशत तक गिर गए हैं।

कॉमट्रेड्ज के निदेशक टी ज्ञानशेखर ने कहा कि खाद्य तेलों, दालों और कॉफी में गिरावट का मुख्य कारण व्यापार संबंधी मुद्दों के बजाय चीन की खरीदारी में कमी है। मांग और आपूर्ति से कृषि कमोडिटी बास्केट चलती है।

First Published : February 17, 2026 | 10:19 PM IST