बाबा रामदेव | फाइल फोटो
योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर व्यक्तित्व अधिकार मामले के कई बिंदुओं का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने विरोध किया है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो व्यंग्य, पैरोडी, राजनीतिक टिप्पणी, समाचार रिपोर्टिंग और फैक्ट-चेक जैसी टिप्पणियों को प्लेटफॉर्म से हटाना पड़ेगा, जो संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि इस तरह के निर्देश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करेंगे। उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए चिह्नित की गई कुछ सामग्री में रामदेव का हाथी पर सवार वीडियो, उनके द्वारा एलोपैथिक डॉक्टर से इलाज कराने वाले चित्र और उन्हें पेट्रोल की कीमतों से जोड़ने वाली टिप्पणी शामिल हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं। एक्स की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका में चिन्हित 16 यूआरएल में से 14 पहले ही हटाए जा चुके हैं। वहीं मेटा की ओर से कहा गया कि स्पष्ट रूप से गैरकानूनी या आपत्तिजनक सामग्री हटाने में कोई गुरेज नहीं है, लेकिन समाचार रिपोर्टिंग को व्यक्तित्व अधिकार के नाम पर प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।
रामदेव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कई पोस्ट उनके नाम, छवि, आवाज और विशिष्ट शैली का दुरुपयोग करते हुए उन्हें बदनाम करने वाली हैं। उन्होंने डीपफेक, फर्जी विज्ञापन और अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने रामदेव को हटाने योग्य सामग्री की समेकित सूची दाखिल करने और सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी आपत्तियां रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।