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Explainer: AI से खेती का समाधान! किसानों के लिए वरदान कहा जा रहा Bharat-VISTAAR क्या है?

भारत-विस्तार एक मल्टीलिंगुअल AI प्लेटफॉर्म है, जो किसानों को योजना, मौसम, मंडी भाव और फसल से जुड़ी जानकारी उनकी अपनी भाषा में देगा, ताकि किसानों का पैदावार बढ़े और नुकसान घटे

Published by
ऋषभ राज   
Last Updated- February 17, 2026 | 5:28 PM IST

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज 17 फरवरी को भारत-विस्तार नाम का एक नया AI वाला टूल लॉन्च करने जा रहे हैं। यह टूल किसानों के लिए बहुत काम का साबित होने वाला है, क्योंकि यह उन्हें उनकी अपनी भाषा में सारी जरूरी जानकारी एक जगह देगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को यूनियन बजट 2026-27 पेश करते हुए इसकी घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि यह ऐसा AI टूल होगा जो कई भाषाओं में काम करेगा और एग्रीस्टैक पोर्टल्स व ICAR की खेती से जुड़ी जानकारियों को AI से जोड़ देगा। इसके लिए अगले वित्त वर्ष में 150 करोड़ रुपये भी तय किए गए हैं।

सरकार के मुताबिक, यह टूल किसानों को फसल की योजना बनाने, कीटों से बचाव, मौसम की जानकारी, मंडी के भाव, सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी, पात्रता (एलिजिबिलिटी), आवेदन और शिकायत दर्ज कराने जैसी कई सुविधाओं में मदद करने वाला है। अधिकारी कह रहे हैं कि यह किसानों के लिए एक ही डिजिटल जगह होगी, जहां उन्हें सारी जरूरी जानकारी एक साथ मिल जाएगी।

भारत-विस्तार क्यों लाया जा रहा है?

भारत-विस्तार (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources) एक ऐसा AI टूल है जो कई भाषाओं में काम करता है। यानी किसान मोबाइल से या साधारण फोन कॉल करके अपनी भाषा में बात कर सकते हैं और सलाह पा सकते हैं। यह डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा है, जो केंद्र, राज्य सरकार और सहकारी संस्थाओं की भरोसेमंद जानकारी को एक साथ जोड़कर AI की मदद से हर किसान को उसकी जरूरत के मुताबिक सलाह देगा।

अब तक किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी अलग-अलग जगहों पर मिलती थी। एलिजिबिलिटी जानने, आवेदन करने, स्टेटस देखने या शिकायत दर्ज करने के लिए उन्हें कई दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे या अलग-अलग वेबसाइट देखनी पड़ती थी। मौसम, मंडी का भाव, इंश्योरेंस और मिट्टी की सेहत से जुड़ी जानकारी भी एक जगह नहीं मिलती थी। कई बार उन्हें इसके बिचौलियों पर भी निर्भर रहना पड़ता था।

अब भारत-विस्तार आने के बाद किसानों को अलग-अलग ऐप, वेबसाइट या दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। न्यूज वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह ऐसा प्लेटफॉर्म होगा जहां किसानों को सारी जानकारी एक ही जगह मिलेगी, जो उनकी अपनी भाषा में होगी। साथ ही इसमें लिखकर या बोलकर पूछने की सुविधा मिलेगी। इससे किसानों का पैदावार बढ़ाने, सही फैसले लेने और खेती में नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।

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कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं किसान?

किसान इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके लिए वे किसी भी फोन या मोबाइल से 155261 नंबर पर कॉल कर सकते हैं और AI असिस्टेंट ‘भारती’ से सीधे बात कर सकते हैं। साधारण फोन इस्तेमाल करने वाले किसान भी इसका फायदा उठा सकेंगे।

इसके अलावा किसान गूगल प्ले स्टोर से इसका मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं या वेबसाइट के जरिए भी इसे चला सकते हैं। इसका लिंक कृषि मंत्रालय की वेबसाइट और PM KISAN व PMFBY जैसे ऐप्स पर भी मिलेगा। चाहें तो चैट के जरिए भी सवाल पूछ सकते हैं। यह प्लेटफॉर्म 24 घंटे काम करेगा, यानी एक डिजिटल फार्मिंग एक्सपर्ट की तरह हर समय मदद के लिए उपलब्ध रहेगा।

कौन-कौन सी जानकारी और योजनाएं मिलेंगी?

लॉन्च के समय किसानों को 10 बड़ी केंद्रीय योजनाओं की जानकारी मिलेगी। इनमें PM-KISAN, PM फसल बीमा योजना, मिट्टी का हेल्थ कार्ड, मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम, सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन, पर ड्रॉप मोर क्रॉप, PM कृषि सिंचाई योजना, PM अन्नदाता आय संरक्षण अभियान, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और किसान क्रेडिट कार्ड शामिल हैं।

इसके जरिए किसान इन योजनाओं का स्टेटस आसानी से देख सकेंगे और PM-KISAN से जुड़ी शिकायतें दर्ज करके उसकी स्थिति भी ट्रैक कर पाएंगे। ICAR की वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर उन्हें फसल और पशुओं की देखभाल की सलाह, कीट-बीमारी के अलर्ट, तुरंत मौसम अपडेट, मंडी भाव और मौसम के हिसाब से खेती की आसान सलाह भी मिलेगी।

सरकार का कहना है कि मई 2026 तक सभी केंद्रीय योजनाएं इस प्लेटफॉर्म से जुड़ जाएंगी, ताकि एलिजिबिलिटी जांचने, आवेदन करने, लाभ की स्थिति देखने और शिकायत दर्ज करने जैसी सारी सुविधाएं एक ही जगह मिल सकें।

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सरकार का आगे का क्या है प्लान

शुरुआत में चैटबॉट हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होगा। वॉइस असिस्टेंट ‘भारती’ भी पहले इन्हीं दो भाषाओं में बात करेगी। महाराष्ट्र के किसान ‘वसुधा’ (मराठी) के जरिए, गुजरात के किसान अमुलAI की ‘सरलाबेन’ (गुजराती) से और बिहार के किसान बिहार कृषि ऐप के माध्यम से हिंदी में इस सेवा का इस्तेमाल कर सकेंगे।

अगले तीन महीनों में तमिल, बंगाली, असमिया और कन्नड़ भाषाएं भी जोड़ी जाएंगी, साथ ही राज्यों की योजनाएं भी शामिल होंगी। छह महीनों में यह कुल 11 भाषाओं (हिंदी, अंग्रेज़ी और 9 क्षेत्रीय भाषाएं) में उपलब्ध होगा। आगे चलकर 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में इसका इंटरफेस और ऑडियो कंटेंट मिलेगा।

यह प्लेटफॉर्म मशीन लर्निंग की मदद से फसल की सेहत और मौसम से जुड़े निजी अलर्ट भेजेगा। इसे राज्यों के जमीन रिकॉर्ड और स्थानीय कृषि सेवाओं से भी जोड़ा जाएगा। साथ ही, एग्रीटेक स्टार्टअप्स को इससे जुड़े नए समाधान बनाने का मौका मिलेगा।

इससे जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट https://vistaar.da.gov.in देखा जा सकता है, जहां बताया गया है कि इसके माध्यम से 14 करोड़ से अधिक किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है।

First Published : February 17, 2026 | 5:28 PM IST