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नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 का आज दूसरा दिन है। मंगलवार को होने वाली बैठकों और सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि एआई तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा प्रणाली, सुशासन और आर्थिक विकास को किस तरह मजबूती दे सकती है।
कार्यक्रम का आयोजन Bharat Mandapam में किया जा रहा है, जहां देश और दुनिया के नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शोधकर्ता और स्टार्टअप संस्थापक एक साथ जुटे हैं।
आज के सत्रों में कई बड़े नाम शामिल होंगे। पूर्व जी20 शेरपा Amitabh Kant, केंद्रीय आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw और HCLTech की चेयरपर्सन Roshni Nadar आज विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda भी दो महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत करेंगे। इनमें ‘Artificial Intelligence in Healthcare for India’ और ‘Benchmarking Open Data Platform for Health AI’ शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य देश में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित समाधान को बढ़ावा देना और डेटा आधारित नीतिगत निर्णयों को सशक्त बनाना है।
समिट का दूसरा दिन पूरी तरह इस बात पर केंद्रित है कि एआई को जमीन पर कैसे लागू किया जाए। चर्चाओं में यह समझने की कोशिश होगी कि तकनीक के जरिए ग्रामीण महिलाओं को कैसे सशक्त किया जा सकता है, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच कैसे बेहतर की जा सकती है और शिक्षा व्यवस्था को किस तरह आधुनिक बनाया जा सकता है।
रक्षा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल और अनुसंधान को व्यावहारिक स्तर तक ले जाने पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। एप्लाइड एआई से जुड़ा एक सेमिनार इस बात पर प्रकाश डालेगा कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को आम लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए।
‘AI for Impact Global South Forum’ में यह चर्चा होगी कि विकासशील देश एआई का उपयोग जनकल्याण के लिए किस तरह कर रहे हैं। इस मंच पर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और नीति विशेषज्ञों के विचार सामने आएंगे। लक्ष्य यह है कि वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग बढ़े और साझा अनुभवों से बेहतर मॉडल विकसित किए जा सकें।
एक अन्य अहम सत्र ‘Building a Trusted and Resilient AI Infrastructure Ecosystem’ सुरक्षित एआई सिस्टम और मजबूत नीतिगत ढांचे पर केंद्रित रहेगा। इसके अलावा भारत के लिए राष्ट्रीय स्तर की एआई गवर्नेंस संरचना कैसे तैयार की जाए, इस विषय पर भी विस्तार से मंथन होगा।
इन चर्चाओं में उद्योग संगठनों और डिजिटल कंपनियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे, जो नीति और तकनीक के बीच संतुलन पर अपने विचार रखेंगे।
रोबोटिक्स पर आधारित एआई मास्टरक्लास में औद्योगिक निरीक्षण और ऑटोमेशन में एआई के उपयोग का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े केसबुक जारी किए जाएंगे, जिनमें वास्तविक उदाहरणों के जरिए बताया जाएगा कि एआई कैसे बदलाव ला सकता है।
महिला और युवा नेतृत्व पर केंद्रित सत्रों में नवाचार और समावेशन पर चर्चा होगी। यहां यह रेखांकित किया जाएगा कि तकनीकी विकास में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी क्यों जरूरी है।
‘Putting AI to Work’ सत्र में राष्ट्रीय एआई रणनीतियों और अपनाने की चुनौतियों पर विचार होगा। विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा करेंगे कि उत्पादकता बढ़ाने और नई नौकरियों के सृजन में एआई किस तरह योगदान दे सकता है।
शिक्षा से जुड़े सत्रों में पाठ्यक्रम में बदलाव, संस्थागत सुधार और भविष्य के कौशल विकास पर मंथन किया जाएगा। लक्ष्य यह है कि आने वाली पीढ़ी को एआई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जा सके।
समिट के दौरान दक्षिण प्लाजा में संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत Sangeet Natak Akademi द्वारा ‘India’s Journey from Tradition to Technology’ शीर्षक से विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। इसमें शास्त्रीय और लोक कलाओं का संगम देखने को मिलेगा। यह कार्यक्रम वैश्विक इम्पैक्ट चैलेंज के विजेताओं के सम्मान समारोह के बाद आयोजित होगा।
समिट की शुरुआत सोमवार 16 फरवरी को हुई। पांच दिवसीय यह आयोजन 20 फरवरी तक चलेगा और इसे वैश्विक दक्षिण में आयोजित अपनी तरह का सबसे बड़ा एआई सम्मेलन माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उद्घाटन के दौरान एआई इम्पैक्ट एक्सपो का शुभारंभ किया और विभिन्न स्टार्टअप के नवाचारों को देखा। एक्सपो में 300 से अधिक प्रदर्शनी मंडप लगाए गए हैं, जिन्हें ‘People, Planet and Progress’ थीम के आधार पर तैयार किया गया है।
समिट के दूसरे दिन की चर्चाओं से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भारत एआई को केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के एक प्रभावी उपकरण के रूप में स्थापित करना चाहता है।