facebookmetapixel
Advertisement
लाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौती

NRI का भारत पर भरोसा बढ़ा, हेल्थ इंश्योरेंस खरीद में 126% की रिकॉर्ड छलांग

Advertisement

विदेशों में महंगे इलाज के बीच एनआरआई तेजी से भारत की किफायती और व्यापक हेल्थ इंश्योरेंस योजनाओं को अपना रहे हैं, जिससे पॉलिसी खरीद में 126 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

Last Updated- February 17, 2026 | 9:31 AM IST
health insurance
Representative Image

विदेशों में बसे भारतीय अब इलाज और स्वास्थ्य बीमा के लिए तेजी से भारत की ओर रुख कर रहे हैं। डिजिटल बीमा प्लेटफॉर्म पॉलिसीबाजार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अनिवासी भारतीयों द्वारा खरीदी जा रही स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में सालाना आधार पर 126 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कम प्रीमियम, आसान डिजिटल प्रक्रिया और एआई आधारित टेलीमेडिकल जांच जैसी सुविधाएं इस रुझान को बढ़ावा दे रही हैं।

रिपोर्ट बताती है कि अब एनआरआई केवल आपात स्थिति के लिए बीमा नहीं ले रहे, बल्कि इसे संपूर्ण स्वास्थ्य समाधान के रूप में अपना रहे हैं। खासकर वे अपने भारत में रह रहे माता पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए व्यापक कवरेज चुन रहे हैं।

तकनीक ने बदली सोच

पॉलिसीबाजार के हेल्थ इंश्योरेंस प्रमुख सिद्धार्थ सिंघल के मुताबिक, एआई आधारित मेडिकल जांच और पूरी तरह डिजिटल ऑनबोर्डिंग ने भौगोलिक सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया है। परिवार फ्लोटर पॉलिसियों और माता पिता के लिए अलग कवरेज लेने वालों की संख्या में क्रमशः 70 प्रतिशत और 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि एनआरआई अब भारतीय स्वास्थ्य बीमा को दीर्घकालिक सुरक्षा के रूप में देख रहे हैं।

किन देशों से आ रही सबसे ज्यादा मांग

रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों का हिस्सा कुल एनआरआई ग्राहकों में लगभग 50 प्रतिशत है। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कुवैत प्रमुख हैं। कम यात्रा समय और भारत में कम इलाज खर्च इस मांग के मुख्य कारण हैं। जहां खाड़ी देशों में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम 2000 से 3000 डॉलर तक पहुंच सकता है, वहीं भारत में समान कवरेज 120 से 300 डॉलर में उपलब्ध है।

यूरोप से करीब 25 प्रतिशत मांग आ रही है। वहां गैर आपात सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में कई एनआरआई भारत आकर निजी अस्पतालों में जल्दी इलाज करवाना पसंद करते हैं। हिप रिप्लेसमेंट या मोतियाबिंद जैसी सर्जरी के लिए महीनों प्रतीक्षा करने की बजाय वे भारत में अपनी पॉलिसी का उपयोग करते हैं।

अमेरिका और कनाडा का संयुक्त योगदान 17 प्रतिशत है। इन देशों में इलाज का खर्च बहुत अधिक है। कई मामलों में हवाई यात्रा का खर्च जोड़ने के बाद भी भारत में सर्जरी कराना सस्ता पड़ता है।

एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अफ्रीका से 8 प्रतिशत मांग आती है। इन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय घुटना प्रत्यारोपण और हृदय संबंधी प्रक्रियाओं जैसे बड़े ऑपरेशन के लिए भारतीय बीमा योजनाओं को चुन रहे हैं। भारत में ऐसे उपचार 70 से 80 प्रतिशत तक सस्ते पड़ते हैं। एक करोड़ रुपये तक का कवर देने वाली पॉलिसी का सालाना प्रीमियम कई देशों में एक महीने के प्रीमियम से भी कम होता है।

परिवार फ्लोटर और माता पिता के लिए कवरेज में उछाल

परिवार फ्लोटर पॉलिसियों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई है। औसत बीमा राशि 25 लाख रुपये से अधिक देखी जा रही है। जीएसटी में मिली छूट के बाद एनआरआई एक ही योजना के तहत पूरे परिवार को उच्च कवरेज दे रहे हैं।

माता पिता के लिए खरीदी जाने वाली पॉलिसियों की हिस्सेदारी भी 32 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है। कई योजनाओं में कंसीयर्ज सेवा शामिल है, जिससे विदेश में रहकर भी इलाज की प्रक्रिया को आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।

महंगाई और बढ़ती चिकित्सा लागत की चिंता

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उच्च बीमा राशि चुनने वालों की संख्या में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत में मेडिकल महंगाई दर लगभग 14 प्रतिशत सालाना आंकी जा रही है। इसी कारण एनआरआई ऐसी पॉलिसियां ले रहे हैं जो रोबोटिक सर्जरी और विशेष उपचार जैसे महंगे विकल्पों को भी कवर कर सकें।

दो से तीन वर्ष की मल्टी ईयर पॉलिसियों की मांग में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे प्रीमियम लॉक हो जाता है और हर साल नवीनीकरण की झंझट से राहत मिलती है। साथ ही परिवार के लिए निरंतर कवरेज सुनिश्चित होता है।

ओपीडी कवर की बढ़ती लोकप्रियता

ओपीडी कवर लेने वालों का प्रतिशत 7 से बढ़कर 20 हो गया है। इस सुविधा के तहत डॉक्टर परामर्श, एमआरआई और ब्लड टेस्ट जैसी जांच तथा बिना भर्ती इलाज की दवाइयों का खर्च शामिल होता है। कई एनआरआई भारत यात्रा के दौरान पूर्ण स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ सलाह का लाभ उठाते हैं। मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे माता पिता के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी है।

दावों में क्या दिखा रुझान

बीमा दावों के आंकड़ों से पता चलता है कि एनआरआई श्वसन संबंधी बीमारियों, मातृत्व सेवाओं, कैंसर उपचार और अन्य गंभीर रोगों के लिए भारतीय अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं। बढ़ती उम्र के कारण मोतियाबिंद सर्जरी के दावे भी अधिक देखे गए हैं। दंत चिकित्सा भी एक अहम कारण बनकर उभरी है, क्योंकि विदेशों में डेंटल उपचार का खर्च काफी अधिक होता है।

भारत क्यों बन रहा स्वास्थ्य हब

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, कनाडा, यूरोप और खाड़ी देशों की तुलना में भारत में बीमा प्रीमियम 40 प्रतिशत तक कम है। सर्जरी, परामर्श और दवाइयों का खर्च 70 से 90 प्रतिशत तक सस्ता पड़ सकता है। निजी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों तक तेज पहुंच भी एनआरआई के लिए बड़ा आकर्षण है।

तेजी से बढ़ती यह प्रवृत्ति दिखाती है कि भारत न केवल अपने नागरिकों बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए भी किफायती और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनता जा रहा है।

Advertisement
First Published - February 17, 2026 | 9:31 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement