आपका पैसा

मास्टरकार्ड और वीजा कार्डधारकों को ओटीपी की जगह बायोमेट्रिक पेमेंट की सुविधा मिलेगी, जल्द लागू होगा पासकी सिस्टम

इससे भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर बिना ओटीपी सत्यापन के उपयोगकर्ताओं को क्रेडिट और डेबिट कार्ड के लेनदेन को पूरा करने की सुविधा मिलेगी

Published by
अजिंक्या कवाले   
Last Updated- February 16, 2026 | 11:27 PM IST

अब मास्टरकार्ड और वीजा कार्डधारकों को भुगतान के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) की जरूरत नहीं होगी और वे बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिये लेनदेन पूरा कर सकेंगे।

वै​​​​​श्विक कार्ड नेटवर्क मास्टरकार्ड और वीजा कार्ड लेनदेन के लिए ‘पासकी’ व्यवस्था लाने जा रहे हैं जिससे उपयोगकर्ता अपने चेहरे के स्कैन या फिंगरप्रिंट जैसे बायोमेट्रिक से भुगतान को प्रमाणित कर सकेंगे। मामले से अवगत लोगों ने इसकी जानकारी दी। इससे भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर बिना ओटीपी सत्यापन के उपयोगकर्ताओं को क्रेडिट और डेबिट कार्ड के लेनदेन को पूरा करने की सुविधा मिलेगी।

मास्टरकार्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कस्टमर सॉल्यूशंस) रवि दातला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमने अपने जिन ग्राहकों को पासकी चुनने का विकल्प दिया है उनमें से 30 फीसदी इसे अपना रहे हैं। ये ऐसे लोग हैं जो अक्सर कार्ड के जरिये लेनदेन करते हैं।’ उन्होंने कहा कि ग्राहकों के पास पासकी को चुनने या थोड़े समय के लिए ओटीपी के साथ जारी रखने का विकल्प होगा।

पासकी आधारित भुगतान में उपयोगकर्ता का बायोमेट्रिक डिवाइस पर सुरक्षित रूप से संग्रहीत प्राइवेट की को अनलॉक किया जाता है। इसके बदले में, जारी करने वाले की तरफ से एक बार का चैलेंज साइन होता है, जिसमें बैंक कार्ड पेमेंट को मंजूरी देने से पहले पब्लिक की का इस्तेमाल करके जवाब को वेरिफाई करता है।

वीजा के उपाध्यक्ष, प्रोडक्ट्स ऐंड सॉल्यूशंस प्रमुख (भारत एवं द​क्षिण ए​शिया) रामाकृष्णन गोपालन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम ओटीपी से आगे बढ़ने के भारतीय रिजर्व बैंक के प्रगतिशील कदम का स्वागत करते हैं। अपने सहयोगियों के साथ, हम वीजा से भुगतान के लिए पासकी शुरू कर रहे हैं ताकि सभी भारतीयों को डिवाइस आधारित बायोमेट्रिक, पिन और पैटर्न का उपयोग करके तेज, सुरक्षित और अधिक समावेशी सत्यापन की सुविधा मिल सके।’

पासकी से धोखाधड़ी पर अंकुश लगने की उम्मीद है क्योंकि डिजिटल धोखाधड़ी करने वाले ओटीपी या पिन का पता कर खाते में सेंध लगा लेते हैं। लेनदेन की सफलता दर में भी सुधार होगा और एसएमएस आधारित प्रमाणीकरण में होने वाली परेशानी भी खत्म होगी। पासकी की सुविधा ऐस समय में शुरू की जा रही है जब भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल दिशानिर्देश जारी कर कहा था कि प्रमाणीकरण के दो कारकों में से कम से कम एक डायनमिक कोड तरीके से सृजित या साबित हो। इससे ही बायोमेट्रिक सत्यापन का रास्ता खुला है।

वित्त वर्ष 2021-22 से सितंबर 2025 के बीच क्रेडिट कार्ड से संबंधित धोखाधड़ी के कुल 2.44 लाख मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें कुल 1,447.27 करोड़ रुपये की धनरा​शि शामिल थी। डेबिट और एटीएम कार्ड से धोखाधड़ी के कुल 94,991 मामले सामने आए जिनका मूल्य 401.17 करोड़ रुपये था।

उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि सोशल इंजीनियरिंग धोखाधड़ी पारि​स्थितिकी तंत्र के भीतर धोखाधड़ी का एक प्रमुख कारण है।

मास्टरकार्ड के दातला ने कहा, ‘ओटीपी ने फिशिंग हमलों और सोशल इंजीनियरिंग के जो​खिम भी उजागर किए हैं, जहां लोगों को अपना ओटीपी देने के लिए बरगलाया जाता है।’

धोखाधड़ी के अलावा एसएमएस के कारण होने वाली परेशानी से लेनदेन संसा​धित होने में भी देरी होती है। पासकी से लेनदेन की मंजूरी दर 2 से 3 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है।

First Published : February 16, 2026 | 10:59 PM IST