प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 10 माह के उच्च स्तर 1.81 प्रतिशत पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं में तेजी और मुख्य महंगाई दर अधिक होने से इसे बल मिला है।
दिसंबर में सालाना आधार पर स्थिर रहने के बाद जनवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई 8 महीने के उच्च स्तर 1.4 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस तेजी को मुख्य महंगाई (खाद्य और ईंधन छोड़कर) दर में तेज वृद्धि से बल मिला है, जो जनवरी में बढ़कर 38 महीने के उच्च स्तर 3.2 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इसके पहले महीने में 2 प्रतिशत थी।
इक्रा में वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा, ‘जिंसों की वैश्विक कीमतों में तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से मुख्य सूचकांक पर दबाव बढ़ा है, जो जनवरी 2026 में क्रमिक आधार पर 1.4 प्रतिशत बढ़ा है। यह 45 महीने की सबसे तेज बढ़ोतरी है।’
ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं, जब 2024 के नए आधार वर्ष श्रृंखला के मुताबिक जनवरी में खुदरा महंगाई दर 2.75 प्रतिशत थी, जबकि उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक दौरान बढ़कर 2.13 प्रतिशत पर पहुंच गया था। डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों के मुताबिक प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर दिसंबर के अंतर में 1.55 प्रतिशत थी। सब्जियों (6.78 प्रतिशत) की कीमत में वृद्धि का इस पर असर पड़ा। साथ ही इसके पहले महीने की तुलना में धान (0.89 प्रतिशत) और अंडे, मांस और मछली की कीमत 3.66 प्रतिशत बढ़ी है।
गौरतलब है कि लगभग एक साल तक डिफ्लेशन में रहने के बाद जनवरी में सब्जियों की महंगाई दर धनात्मक क्षेत्र में पहुंची। जनवरी 2025 में 8.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि महीने में सब्जियों की कीमतों में वृद्धि का कारण आपूर्ति की कमी और आधार का असर थे। इसके अलावा दालों (-11.05 प्रतिशत) और प्याज (-33.42 प्रतिशत) की वजह से भी पिछले महीने की तुलना में जनवरी में डिफ्लेशन कम हुआ।
इक्रा को उम्मीद है कि खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर और बढेगी, क्योंकि प्रतिकूल आधार का असर पड़ेगा। इसके अलावा जिंसों की वैश्विक कीमतों में तेजी और पिछले कुछ महीने से डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही तेजी की वजह से आयात लागत भी अधिक रहने की संभावना है।