आपका पैसा

दिल्ली में अब जमीन का भी ‘आधार’: 14 अंकों के इस डिजिटल नंबर से कैसे बदल जाएगी प्रॉपर्टी की दुनिया?

दिल्ली में अब जमीन के झगड़ों पर लगाम लगाने की तैयारी है। हर प्लॉट को 14 अंकों का ‘भू-आधार’ नंबर मिलेगा, जिससे मालिकाना हक और सीमाएं साफ-साफ पता चल सकेंगी

Published by
ऋषभ राज   
Last Updated- February 17, 2026 | 4:12 PM IST

दिल्ली सरकार ने जमीन विवाद को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब राजधानी की हर जमीन को एक खास 14 अंकों का यूनिक नंबर मिलेगा, जिसे ‘भू-आधार’ नाम दिया गया है। हालांकि, इसका असली नाम है यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर या ‘ULPIN’। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने वाला क्रांतिकारी कदम बताया है।

दिल्ली सरकार का कहना है कि इससे जमीन की सीमाओं को लेकर होने वाले झगड़ों में काफी कमी आएगी। लोग अब कई कागजों के चक्कर में नहीं पड़ेंगे। एक ही नंबर से पूरी जानकारी मिल जाएगी कि मालिक कौन है, जमीन कितनी है, उसका साइज क्या है। इसके साथ ही इसमें जमीन का GPS लोकेशन भी मिलेगा।

क्यों लाया गया ये सिस्टम?

दरअसल, दिल्ली में जमीन के बाउंड्री डिस्प्यूट बहुत आम हैं। लोग कोर्ट-कचहरी में सालों फंस जाते हैं। कई बार एक ही जमीन पर दो-तीन रजिस्ट्रेशन हो जाते हैं या फर्जी तरीके से बिक्री हो जाती है। सरकार इसी सब को भू-आधार के जरिए रोकने की कोशिश करेगी। यह केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) का हिस्सा है, जो 2016 में शुरू हुआ था। दिल्ली में पहले ये लागू नहीं हो पाया था, लेकिन अब इसे पूरी ताकत से लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ये ‘जमीन का आधार’ है। ये भ्रष्टाचार और जमीन माफिया के खिलाफ एक मजबूत हथियार बनेगा। हर इंच जमीन का पूरा डिजिटल हिसाब रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

Also Read: जमीन सौदों में MMR की बादशाहत, 2025 में 500 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदी

कैसे बनेगा ये नंबर और मैप?

सरकार ड्रोन और हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों की मदद से दिल्ली का पूरा डिजिटल नक्शा बना रही है। सर्वे ऑफ इंडिया से करीब 2 टेराबाइट जियोस्पेशियल डाटा लिया जा रहा है, जिसमें ऑर्थो रेक्टिफाइड इमेज भी शामिल हैं। हर प्लॉट को 14 अंकों का जियो-रेफरेंस्ड यूनिक कोड मिलेगा, जो बिल्कुल सटीक होगा।

इससे अलग-अलग सरकारी विभाग आसानी से डाटा शेयर कर सकेंगे और फर्जी सौदों व दोहरी रजिस्ट्रेशन पर रोक लगेगी।

पायलट प्रोजेक्ट में मिली सफलता

पहले ही वेस्ट दिल्ली के तिलंगपुर कोटला गांव में इसका पायलट चलाया गया। वहां 274 ULPIN रिकॉर्ड सफलतापूर्वक बनाए गए। ये दिखाता है कि सिस्टम काम कर रहा है। दिल्ली के 48 गांव पहले से ही केंद्र की SVAMITVA स्कीम के तहत कवर हैं, जहां ड्रोन से प्रॉपर्टी कार्ड दिए गए थे। अब पूरे शहर में इसे फैलाया जाएगा।

राजस्व विभाग की IT ब्रांच इस काम को संभाल रही है। उन्हें सर्वे ऑफ इंडिया का टेक्निकल सपोर्ट मिला है। पहले फेज में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1.32 करोड़ रुपये दिए गए थे। अब फेजबाय-फेज पूरे दिल्ली में लागू होगा। SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाया गया है, लेकिन टाइमलाइन अभी फाइनल नहीं हुई है।

एक्सपर्ट के मुताबिक, मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए ये बहुत राहत की बात है। उनकी जमा-पूंजी जमीन माफिया या झगड़ों से सुरक्षित रहेगी। एक नंबर से सब कुछ चेक हो जाएगा, कागजों का ढेर नहीं लगेगा।

First Published : February 17, 2026 | 4:12 PM IST