मॉनजारो बनाने वाली कंपनी एलाई लिली भारत को अपनी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनाना चाहती है। अमेरिकी दवा निर्माता कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह भारत में अनुबंध विनिर्माण के लिए पहले से किए गए 1 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
भारत में बाजार में आने के कुछ ही महीनों के भीतर वजन घटाने वाली इस ब्लॉकबस्टर दवा की बिक्री दोगुनी हो गई और मूल्य के हिसाब से यह सबसे अधिक बिकने वाली दवा बन गई। इससे भारत में मोटापे के इलाज में उसकी बढ़ती लोकप्रियता का पता चलता है। अनुमान है कि 2050 तक भारत में मोटापे से ग्रस्त दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी होगी।
कंपनी का वर्तमान में भारत में कोई विनिर्माण संयंत्र नहीं है। उसकी योजना भारत के मजबूत अनुबंध विनिर्माण तंत्र का लाभ उठाते हुए, अपने व्यापक आपूर्ति नेटवर्क के हिस्से के रूप में यहां बनी दवाओं को दुनिया भर के बाजारों में निर्यात करने की है।
एलाई लिली ऐंड कंपनी (भारत) के अध्यक्ष और महाप्रबंधक विंसलो टकर ने हैदराबाद में बायोएशिया सम्मेलन के दौरान रॉयटर्स को बताया, हम वास्तव में भारत को एक ऐसे केंद्र के रूप में देख रहे हैं, जो हमारी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा होगा और दुनिया को आपूर्ति करेगा।
टकर ने अनुबंध निर्माताओं के नाम बताने या इससे जुड़े संयंत्र की योजनाओं पर चर्चा से इनकार करते हुए कहा, हम उस (निवेश) पर विचार करना जारी रखेंगे और समय के साथ इसे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि कंपनी नियामकीय मंजूरी मिलने पर भारत में अतिरिक्त उत्पाद लाने की भी योजना बना रही है। इनमें अल्जाइमर की दवा डोनानेमैब और भविष्य में मोटापे के संभावित उपचार की दवा शामिल है। जैसे वजन घटाने वाली खाने की दवा ऑर्फोर्ग्लिप्रोन का एक्सपेरिमेंट।
भारत में, लिली का मुकाबला डेनिश की दवा निर्माता नोवो नॉर्डिस्क से है, जो वेगोवी बनाती है। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में इस साल वजन घटाने वाली दवाओं की मांग में भारी उछाल की संभावना है क्योंकि नोवो का सेमाग्लूटाइड पर पेटेंट अगले महीने भारत में समाप्त होने के बाद स्थानीय कंपनियां वेगोवी के सस्ते, जेनेरिक संस्करण बाजार में उतारने की होड़ में लगी हैं।
नोवो ने पिछले साल बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए वेगोवी की कीमत में 37 फीसदी तक की कटौती की थी। टकर ने मौनजारो पर इसी तरह के दबाव की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि दवा की संरचना बेहतर प्रभाव डालती है और वह इसे प्रतिस्पर्धी बनाए रखेगी। टकर ने कहा, हमने (मौनजारो) की कीमत उसकी गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए तय की है और हमारा मानना है कि यह उचित है।
लिली का ध्यान मोटापे के प्रति जागरूकता बढ़ाने और छोटे भारतीय शहरों में मौनजारो की पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल और सोशल मीडिया अभियानों पर केंद्रित है। उसने भारतीय दवा निर्माता कंपनी सिप्ला और टाटा 1 एमजी, प्रैक्टो और अपोलो जैसे डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्मों के साथ साझेदारी करके प्रमुख महानगरों से परे भी अपना वितरण बढ़ाया है।