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कार्बन क्रेडिट में कारोबार पर एक्सचेंज कर रहे विचार

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कृषि जिंसों के सबसे अग्रणी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स ने कार्बन क्रेडिट के वायदा कारोबार के लिए बातचीत शुरू की है

Last Updated- July 03, 2023 | 11:03 AM IST
Comexes looking at launching carbon credit futures
Business Standard

कुछ बड़े एक्सचेंज कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) में कारोबार की संभावनाएं तलाश रहे हैं। जब से सरकार ने देश में कार्बन क्रेडिट के विनियमित बाजार की शुरुआती व्यवस्था तय की है तभी से ये एक्सचेंज हरकत में आ गए हैं।

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि कृषि जिंसों के सबसे अग्रणी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स ने कार्बन क्रेडिट के वायदा कारोबार के लिए बातचीत शुरू की है। एक्सचेंज इसके वायदा कारोबार के विभिन्न पहलू समझने के लिए अध्ययन भी शुरू कराना चाहता है।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) भी स्वैच्छिक कार्बन क्रेडिट (Carbon Credit) बाजार में संभावनाएं ढूंढ रहा है। एनएसई के मुख्य कारोबार विकास अधिकारी श्रीराम कृष्णन ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उत्पादों की संख्या बढ़ाने के लिए एक्सचेंज बिजली के डेरिवेटिव्स भी देख रहा है। पीटीआई ने कहा कि इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स) ने भी स्वैच्छिक कार्बन बाजार में कारोबार की संभावनाएं तलाशने की घोषणा की है।एक्सचेंज ने इसके लिए पूर्ण स्वामित्व वाली खास सहायक कंपनी भी बनाई है।

कृष्णन ने कहा, ‘पहले हमें देखना होगा कि सत्यापित कार्बन क्रेडिट के लिए ऐसा बाजार किस तरह बनाया जाए, जिसमें इनकी वाजिब कीमत मिले। आपको उनसे कमाई करनी होगी और आगे चलकर स्वस्थ बाजार भी तैयार करना होगा क्योंकि भारत हर साल कार्बन क्रेडिट तैयार कर रहा है। इनकी मात्रा का पता लगाना मुश्किल है मगर इनकी कीमत करीब 15 करोड़ डॉलर है।’

इस बीच सूत्रों ने बताया कि एनसीडीईएक्स पर Carbon Credit के वायदा कारोबार का मोटा ढांचा तैयार होते ही एक्सचेंज मंजूरी के लिए बाजार नियामक सेबी के पास जा सकता है। फिलहाल यही नियम है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘बातचीत अभी बेहद शुरुआती चरण में है क्योंकि सबसे पहले पहले देश में कार्बन क्रेडिट का बाजार तैयार करना होगा। उसे तैयार करने के बाद इतना मजबूत करना होगा कि उसका विस्तार किया जा सके।’

यदि कोई इकाई या परियोजना कार्बन उत्सर्जन की मात्रा घटा लेती है तो उत्सर्जन में आई कमी के बराबर कार्बन क्रेडिट जारी किए जा सकते हैं। आम तौर पर ये इकाइयां ऊर्जा दक्षता, अक्षय ऊर्जा और पर्यावरण के अनुकूल कृषि परियोजनाओं से जुड़ी होती हैं। उनसे ये क्रेडिट ऐसी कोई भी इकाई खरीद सकती है, जो कार्बन उत्सर्जन करती है। इकाई उतनी ही मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड या अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कर सकती है, जितनी मात्रा के बराबर कार्बन क्रेडिट उसने खरीदा होगा। 1 कार्बन क्रेडिट 1 टन कार्बन डाईऑक्साइड या अन्य हानिकारक गैसों के बराबर होता है।

वायदा अनुबंध एक तरह का डेरिवेटिव है, जिसमें दो पक्ष एक तय तारीख पर किसी भी संपत्ति का कारोबार पहले से तय कीमत पर करने के लिए राजी होते हैं। कार्बन क्रेडिट कारोबार भी इसी तर्ज पर होगा। कार्बन की कीमत घटती-बढ़ती रहती है, इसलिए कार्बन क्रेडिट खरीदकर कंपनियां इस उठापटक से बच सकती हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि जोखिम कम करने के लिए दुनिया भर में कारोबारी कार्बन क्रेडिट वायदा का इस्तेमाल करते हैं। (साथ में श्रेया जय)

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First Published - July 3, 2023 | 10:56 AM IST

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