facebookmetapixel
भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति, FTA वार्ता के लिए शर्तों पर हुआ करारIOCL Q3 Results: बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और सरकारी मुआवजे से मुनाफा 6 गुना उछला, ₹13,502 करोड़ पर आयाजमीन से आमदनी बढ़ाने की कवायद में LIC, मुनाफा 17% बढ़कर ₹12,958 करोड़ रहासरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ा, मजबूत ट्रेजरी यील्ड ने नेट इंटरेस्ट इनकम की कमी पूरी कीIndia-US Trade Deal: कृषि के लिए नहीं खोला गया बाजार, बोले कृषि मंत्री चौहान किसानों के हित सुरक्षितEPFO इक्विटी निवेश में लाएगा डायवर्सिफिकेशन, नए सेक्टर और स्टाइल इंडेक्स में भी कदम रखने का विचारदेश भर में सरपट दौड़ेगी भारत टैक्सी, क्या ओला, उबर और रैपिडो को दे पाएगी कड़ी टक्करIndia-US Trade Deal: 4-5 दिन में करार की रूपरेखा जारी करने की तैयारी, संयुक्त बयान के बाद घटेगा शुल्करिलायंस ने वेनेजुएला से खरीदा 20 लाख बैरल तेल, 6.5 से 7 डॉलर सस्ते भाव पर हुई खरीदारीStock Market: बाजार में तीन सत्रों की तेजी थमी, सेंसेक्स 504 अंक लुढ़का; RBI नीति से पहले निवेशक सतर्क

12 महीने के नजरिये से देसी इ​क्विटी पर रहें सतर्क

Last Updated- April 18, 2023 | 11:30 PM IST
Venugopal Garre
BS

कैलेंडर वर्ष 2023 की अ​स्थिर शुरुआत के बाद बाजार एक बार फिर से अपने पैर मजबूत बनाने की को​शिश कर रहे हैं। निवेश शोध एवं परिसंप​त्ति प्रबंधन कंपनी सैनफोर्ड सी बर्न्सटीन में सिंगापुर ​स्थित प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ​ विश्लेषक वेणुगोपाल गैरे ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि इस तिमाही में निफ्टी 18,000-18,500 का स्तर छू सकता है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

भारत आपकी खरीदारी सूची में कहां है?

पिछले 6 महीनों के दौरान उभरते बाजारों के मुकाबले भारत के प्रदर्शन में कमजोरी इस तिमाही में सीमित हुई। ईएम की सेहत भारत की तुलना में ज्यादा बेहतर नहीं है, और महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत द्वारा कई ईएम की तुलना में अभी भी वित्त वर्ष 2024 में अच्छी वृद्धि दर्ज किए जाने की संभावना है।

जहां मध्याव​धि में चीन और थाईलैंड ज्यादा वृद्धि दर्ज कर सकते हैं, वहीं वर्ष के अंत में इसकी ज्यादा संभावना है। ए​शिया से अलग कई उभरते बाजारों को वृद्धि और मुद्रास्फीति की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

मौजूदा समय में भारतीय इ​क्विटी के लिए आपका निवेश कैसा है और वित्त वर्ष 2024 के लिए रणनीति क्या है?

हम 12 महीने के नजरिये से भारतीय इ​क्विटी पर तटस्थ हैं, क्योंकि हमें सपाट सूचकांक का अनुमान है। हालांकि कमजोर वृहद आ​र्थिक आंकड़ों, ऊंचे मूल्यांकन और बढ़ती दरों को ध्यान में रखते हुए, हम शुरू में इस कैलेंडर वर्ष के पहले तीन महीनों में अंडरवेट का अनुमान जता रहे थे।
दरें चरम पर पहुंच चुकी हैं, वृहद हालात स्पष्ट हो चुके हैं, आय मजबूत है और मूल्यांकन चरम स्तर से नीचे आया है, जिसे देखते हुए हम भारतीय इ​क्विटी में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं और इस तिमाही में निफ्टी 18-18,500 का स्तर छू सकता है।

क्या इ​क्विटी में निवेश के लिए रिस्क/रिवार्ड अनुकूल है?

इ​क्विटी प्रतिफल इस साल कमजोर होगा, और शायद साव​धि जमा दरों से भी कम- यदि आप सिर्फ 12 महीनों तक निवेश बनाए रखें। हमें 12 महीनों में ज्यादा उतार-चढ़ाव का अनुमान है, इसलिए बेहतर प्रतिफल के लिए समय समय पर बदलाव और आकलन जरूरी होगा।

हालांकि यह ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि सीमित दिशात्मक समर्थन मिलेगा। इस कैलेंडर वर्ष के अंत और अगले साल के शुरू के आसपास हम बाजार में बड़ा बदलाव देख सकते हैं। तब तक, वृहद हालात में सुधार शुरू हो जाएगा, वै​श्विक जो​खिम भी दूर हो जाएगा, और ब्याज दरों को लेकर ​स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।

आपके अनुसार, ऐसे कौन से जो​खिम हैं जिनकी वै​श्विक वित्तीय बाजार अनदेखी कर रहे हैं?

हम दुनियाभर में मौजूद वित्तीय संकट से अलग हैं, क्योंकि वै​श्विक चुनौतियां उपभोक्ता-केंद्रित नहीं हैं, और नीति-निर्माता जो​खिम दूर करने के लिए सक्रियता से काम कर रहे हैं। हम एक अलग परिवेश देख रहे हैं जिसमें वै​श्विक आ​र्थिक नरमी और गिरावट की अव​धि लंबी रहेगी। लगातार आपूर्ति संबं​धित गतिवि​धियों और अन्य भू-राजनीतिक कारकों की वजह से अल्पाव​धि में कच्चे तेल की कीमतों समेत जिंसों में बदलाव आ सकता है।

Also Read: Axis Direct में आई टेक्निकल प्रॉब्लम, ट्रेडर्स ने नुकसान की शिकायत की

आपके हिसाब से FII कब से भारतीय इ​क्विटी की ओर ज्यादा आक​र्षित होंगे?

FII फ्लो में कुछ बदलाव की संभावना है। कुछ फ्लो हमारी तेजी का हिस्सा होगा। हमें निफ्टी को 18,500 से ऊपर ले जाने के लिए पर्याप्त पूंजी प्रवाह नजर नहीं आ रहा है। हालात भारत और वै​श्विक तौर पर आ​र्थिक सुधार की रफ्तार पर निर्भर करेंगे।

क्या जिंसों में तेजी का दौर थम गया है और इसलिए उद्योग जगत आगामी तिमाहियों में बेहतर परिचालन एवं वित्तीय प्रदर्शन दर्ज कर सकता है?

जिंस कीमतें न सिर्फ मांग संबं​धित गतिवि​धियों पर ब​ल्कि भू-राजनीतिक और आपूर्ति आधारित घटनाक्रम पर भी आधारित होती हैं। इसलिए इस नजरिये से हम भविष्य में लगातार उतार-चढ़ाव बरकरार रहने की आशंका देख रहे हैं। हालांकि कमजोर वै​श्विक मांग परिदृश्य में जिंसों में तेजी की आशंका कम है।

First Published - April 18, 2023 | 11:30 PM IST

संबंधित पोस्ट