facebookmetapixel
Advertisement
सोने पर 15% ड्यूटी से क्या घटेगा भारत का ट्रेड डेफिसिट? जानिए क्यों इतना आसान नहीं है यह गणिततेल संकट के बीच सरकार का बड़ा दावा! 4 साल से नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दामMSCI Index में बड़ा फेरबदल! Adani Energy और MCX की एंट्री, RVNL बाहरAirtel Q4 Results: मुनाफे में 33.5% की भारी गिरावट, ₹7,325 करोड़ पर आया नेट प्रॉफिटDA Hike: सरकार का बड़ा तोहफा! रेलवे कर्मचारियों और पेंशनर्स का DA बढ़ा, सैलरी में होगा सीधा असरस्मार्ट लाइटिंग से चमकेगा भारत! 2031 तक 24 अरब डॉलर पार करेगा स्मार्ट होम मार्केटकैबिनेट का बड़ा फैसला, नागपुर एयरपोर्ट बनेगा वर्ल्ड क्लास हब; यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएंKharif MSP 2026: खरीफ फसलों की MSP में इजाफा, धान का समर्थन मूल्य ₹72 बढ़ाFMCG कंपनियों में निवेश का मौका, DSP म्युचुअल फंड के नए ETF की पूरी डीटेलUS-Iran War: चीन यात्रा से पहले ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- ‘डील करो वरना तबाही तय’

समान अवसर के लिए AIF के शुल्क ढांचे पर जोर

Advertisement
Last Updated- February 05, 2023 | 10:07 PM IST
SEBI
BS

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वैक​ल्पिक निवेश फंड (AIF) उद्योग में गलत जानकारी देकर की जाने वाली बिक्री को रोकने के लिए अपने सदस्यों को प्र​शि​क्षित किया है। पूंजी बाजार नियामक ने सेवा प्रदाताओं को डायरेक्ट प्लान पेश करने और कमीशन वितरण के लिए ट्रेल मॉडल पर अमल अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है।

बाजार नियामक सेबी अपफ्रंट कमीशन यानी अग्रिम कमीशन को पहले ही खत्म कर चुका है और उसने म्युचुअल फंडों (MF) के लिए डायरेक्ट प्लान पेश किए। पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा उद्योग के लिए भी अपफ्रंट कमीशन पर रोक लगाई गई। उद्योग के कारोबारियों का कहना है कि एआईएफ उद्योग के लिए नया प्रस्ताव समान कारोबार अवसर मुहैया कराएगा और वितरकों के लिए संभावित आर्बिट्राज अवसरों को समाप्त करेगा।  मौजूदा समय में, एआईएफ वितरण के लिए अपफ्रंट कमीशन कुल रा​शि का 5 प्रतिशत तक है। तुलनात्मक तौर पर, एमएफ वितरकों को चुकाया जाने वाला कमीशन इसका महज एक
हिस्सा है।

सेबी ने शुक्रवार को सार्वजनिक टिप्प​णियां आमंत्रित करने के लिए जारी एक चर्चा पत्र में कहा, ‘खासकर अन्य योजनाओं के लिए ट्रेल कमीशन के विपरीत इतना ज्यादा अपफ्रंट कमीशन, एआईएफ योजनाओं की भ्रामक जानकारी देकर बिक्री की आशंका बढ़ाता है।’नियामक ने कमीशन के ट्रेल मॉडल को अपनाने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित मानकों के तहत, एआईएफ की सभी श्रे​णियों के निवेशकों से परीक्षण के आधार पर वितरण शुल्क वसूला जाएगा। हालांकि कैटेगरी-1 और 2 के एआईएफों को कुछ ज्यादा शुल्क लगाने का अनुमति होगी। यह पहले वर्ष में चुकाए गए अग्रिम शुल्क की मौजूदा वैल्यू के एक-तिहाई पर बना रह सकता है।

नियामक के लिए चिंता का विषय कुल रा​शि पर अपफ्रंट कमीशन शुल्क है जो वितरकों द्वारा निवेशकों पर लगाया जाता है। मनीफ्रंट के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्या​धिकारी मोहित गंग का कहना है, ‘भले ही निवेश एक बार में नहीं किया गया हो, लेकिन कुल रा​शि पर पूरा कमीशन मौजूदा समय में अग्रिम तौर पर चुकाया जाता है, क्योंकि वितरक अब इस व्यवस्था को पसंद करते हैं।’

यह भी पढ़ें: Adani Group के शेयरों में हो रही गिरावट एक सामान्य प्रक्रिया: शेखावत

एक ताजा कार्यक्रम में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण गोपालकृष्णन ने कहा, ‘इस क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं हैं जिनमें मूल्यांकन और गलत जानकारी देकर की जाने वाली बिक्री की चुनौतियां मुख्य रूप से शामिल हैं, जिससे एआईएफ उद्योग के लिए विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।’ इसके अलावा, सेबी ने निवेशकों, खासकर वित्तीय सलाहकारों के जरिये निवेश करने वालों के लिए कई शुल्क ढांचों की व्यवस्था से दूर होने का प्रस्ताव रखा है। इन निवेशकों से दोहरे शुल्क वसूले जा रहे थे – परामर्श शुल्क या पोर्टफोलियो प्रबंधन शुल्क के तौर पर, और एआईएफ वितरण शुल्क के रूप में।

डीएसके लीगल में पार्टनर हेमांग पारेख का कहना है, ‘यदि निवेशकों को गलत जानकारी देकर बिक्री की जाती है और उनके हितों के साथ समझौता होता है तो सेबी को निवेशक हित सुर​क्षित बनाने के लिए ऐसी गतिवि​धियों को विनियमित करने का अ​धिकार है।’

Advertisement
First Published - February 5, 2023 | 10:07 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement