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मॉनसून से ट्रैवल प्लेटफॉर्म- टूर ऑपरेटर की मुश्किल

इस मौसम में उनके सामने उड़ानों में देर से लेकर यात्रा कार्यक्रम में बदलाव और टिकट रद्द कराने पर एक पाई भी नहीं काटने के ग्राहकों के अनुरोध समेत कई चुनौतियां आती हैं।

Last Updated- July 02, 2025 | 11:30 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर

मॉनसून पूरे देश में छा चुका है और यात्रा कराने वाले ट्रैवल प्लेटफॉर्म तथा टूर ऑपरेटर मौसमी चुनौतियों से निपटने के लिए कमर कस रहे हैं। इस मौसम में उनके सामने उड़ानों में देर से लेकर यात्रा कार्यक्रम में बदलाव और टिकट रद्द कराने पर एक पाई भी नहीं काटने के ग्राहकों के अनुरोध समेत कई चुनौतियां आती हैं। मॉनसून में यूं भी लोगों के सैर-सपाटे और सफर में अच्छा खासा खलल पड़ जाता है, जिससे निपटने और सैलानियों का भरपूर सत्कार करने के लिए ट्रैवल एजेंसियां खास व्यवस्था कर रही हैं तथा योजनाएं भी ला रही हैं।

बादल फटने के कारण हिमाचल प्रदेश में अचानक आई बाढ़, उत्तराखंड और ओडिशा में मूसलाधार बारिश तथा मुंबई, चेन्नई और बेंगलूरु जैसे शहरों में मॉनसून के दौरान जल जमाव के कारण पर्यटक स्थलों पर सैलानियों की आमद भी कम हो रही है। इसलिए यात्री मौसमी व्यवधान से बचाने वाली बीमा पॉलिसी भी ले रहे हैं।

ईजमायट्रिप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और सह-संस्थापक रिकांत पिट्टी ने कहा, ‘हम मौसम के पूर्वानुमानों पर नजर रख रहे हैं, विमानन कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और यात्रा पैकेजों में बदलाव की गुंजाइश रख रहे हैं क्योंकि इस समय उन यात्रा पैकेजों की मांग ज्यादा है, जिनमें आसानी से बदलाव हो सकता है और रद्द कराने पर कोई पैसा नहीं काटा जाता। कई होटल भी सैलानियों के आनंद में मौसम का खलल नहीं पड़ने और चेक-इन आसानी से कराने का इंतजाम कर रहे हैं।’उड़ानों में देर और मौसमी खलल से कोई बच नहीं सकता, इसलिए उद्योग ज्यादा लचीला रुख अपना रहा है क्योंकि पर्यटक ऊहापोह नहीं ठोस विकल्प चाहते हैं। पिट्टी ने कहा, ‘मामला ग्राहकों को इस भरोसे के साथ बुकिंग करने देने का है कि कुछ बदलाव होने पर उन्हें उनके हाल पर नहीं छोड़ दिया जाएगा।’ ईजमायट्रिप के ग्राहकों में मौसमी खलल पड़ने पर बीमा लेने वाले बढ़ते जा रहे हैं।

थॉमस कुक इंडिया और एसओटीसी ट्रैवल के यात्रा कार्यक्रम में ग्राहक को एक प्रतिनिधि मिलता है, जो चौबीसों घंटे उनकी मदद के लिए तैयार रहता है। साथ ही वे अप्रत्याशित परिस्थितियों में पूरा खर्च झेलने को तैयार रहती हैं। कंपनी में प्रेसिडेंट और कंट्री हेड (हॉलिडेज, माइस, टूर कस्टमर्स) राजीव काले ने बताया, ‘इसका मकसद हमारे यात्रियों को सफर के हर पड़ाव पर यह महसूस कराना है कि वे सुरक्षित हैं और कोई हमेशा उनके साथ है। आज अनिश्चितता भरे यात्रा माहौल में यह दिलासा जरूरी है।’

कंपनियां भी अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के अध्यक्ष रवि गोसाईं ने कहा, ‘ जिन इलाकों में मौसम बहुत बिगड़ता है, वहां के टिकटों की तारीख बदलने या किराया वापस करने जैसे कदम ट्रैवल एजेंसियां उठा रही हैं। एजेंसियां होटलों के साथ हाथ मिला रही हैं ताकि ग्राहकों को बुकिंग रद्द कराने और दोबारा बुक कराने में सहूलियत रहे। कुछ ऑपरेटर अपने सैलानियों को मौसमी खलल वाला यात्रा बीमा कराने की सलाह भी दे रहे हैं।’

ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी यात्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (उड़ान, होटल व्यवसाय) भरत मलिक ने कहा, ‘मॉनसून करीब आता है तो ज्यादा से ज्यादा मुसाफिर सुविधा, तत्काल जानकारी और बेहतरीन तजुर्बा देने वाली जगहें चाहते हैं। बुकिंग में जरूरत के हिसाब से बदलाव और रद्द कराने जैसे विकल्पों तथा ठहरने के लिए दूसरे विकल्पों के साथ हम ग्राहकों को भरोसे के साथ सफर की योजना बनाने का मौका दे रहे हैं।’

कॉक्स ऐंड किंग्स के निदेशक करण अग्रवाल ने कहा कि अब भारत के लोग साल भर घूमते हैं। पहले बारिश को ऑफ सीजन माना जाता था मगर अब लोग इसमें भी खूब सैर-सपाटा करते हैं। उन्होंने कहा, ‘हम देख रहे हैं कि लोगों में मॉनसून के दौरान घूमने का शौक बढ़ रहा है। हमें भी पता है कि इस दौरान उड़ानों में देर या मौसमी खलल जैसी कौन सी दिक्कतें आ सकती हैं।’ कंपनी ग्राहकों को उड़ान में देर होने या उसका समय बदलने की सूचना भी तत्काल देती है क्योंकि यह कुर्ग, मुन्नार, पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर जैसी उन जगहों पर पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, जो सबसे सुंदर बारिश में ही लगते हैं।

यात्रा प्लेटफॉर्मों को बारिश में सुरक्षित विकल्पों की तलाश भी बढ़ती दिख रही है क्योंकि लोग टिकट और बुकिंग रद्द कराने या पहले अथवा बाद में यात्रा करने जैसा झंझट नहीं चाहते। इक्सिगो का कहना है कि जो लोग किसी कारण से गर्मी में सैर-सपाटे पर नहीं निकल पाए वे भी इसी समय जा रहे हैं क्योंकि पोर्ट ब्लेयर, तिरुपति, उदयपुर, कोयम्बत्तूर और पुणे जैसे शहरों के लिए हवाई टिकट की बुकिंग पिछले साल के मुकाबले 25-30 प्रतिशत बढ़ गई है।

इक्सिगो के ग्रुप को-सीईओ रजनीश कुमार ने कहा, ‘गर्मियों में लोग पहाड़ों पर जाना ज्यादा पसंद करते हैं मगर बारिश के मौसम में अचानक बाढ़ और भारी बारिश के डर से वहां नहीं जाते क्योंकि भूस्खलन का डर रहता है। विदेश की बात करें तो इस सीजन में भारत के लोग वियतनाम और थाईलैंड भी खूब जा रहे हैं।’

First Published - July 2, 2025 | 11:15 PM IST

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