facebookmetapixel
दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?Credit Card Tips: बिल टाइम पर चुकाया, फिर भी गिरा CIBIL? ये है चुपचाप स्कोर घटाने वाला नंबर!आस्था का महासैलाब: पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हुआ माघ मेला, 19 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी2026 में हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, एक झटका बदल देगा सब कुछ…रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर चेतायाKotak Mahindra Bank का निवेशकों को जबरदस्त तोहफा: 1:5 में होगा स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट फिक्सकनाडा ने एयर इंडिया को दी कड़ी चेतावनी, नियम तोड़ने पर उड़ान दस्तावेज रद्द हो सकते हैंट्रंप का दावा: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी गिरफ्त में; हवाई हमलों की भी पुष्टि कीHome Loan: होम लोन लेने से पहले ये गलतियां न करें, वरना एप्लीकेशन हो सकती है रिजेक्टअमेरिका का वेनेजुएला पर बड़ा हमला: राजधानी काराकास हुए कई जोरदार धमाके, देश में इमरजेंसी लागू

चेक बाउंस, तो शीर्ष अधिकारी पर गाज

Last Updated- December 07, 2022 | 12:44 AM IST

अपर्याप्त कोष के चलते किसी कंपनी के प्रभारी, प्रबंध निदेशक या निदेशक समेत शीर्ष अधिकारियों के हस्ताक्षर वाला कोई चेक बाउंस हो जाता है तो इसके लिए उनके खिलाफ अभियोजन चलाया जा सकता है।


चेक बाउंस के एक मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है। कोर्ट ने कहा कि चेक पर अगर इन अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं और वह बाउंस हो जाता है तो इस अपराध के लिए मुकदमा उनके खिलाफ चलेगा।

न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी व न्यायमूर्ति एचएस बेदी की खंडपीठ ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता अपनी शिकायत में किसी अधिकारी विशेष के खिलाफ चेक बाउंस का आरोप लगाता है तो कंपनी के शीर्ष कार्यकारी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था एक कंपनी के प्रबंध निदेशक की अपील को खारिज करते हुए दी।

चेक बाउंस के मामले में उस प्रबंध निदेशक के खिलाफ महाराष्ट्र की निचली अदालत ने समन जारी किया था। बंबई हाईकोर्ट ने इस समन को खारिज करने से इनकार कर दिया था। फिर  इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गयी थी। इस मामले में टाटा फाइनेंस लिमिटेड ने एक लाख रुपये का चेक बाउंस होने पर कंपनी के प्रबंध निदेशक परेश राजदा व निदेशक विजय श्राफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

सुप्रीम कोर्ट ने निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स ऐक्ट की धारा 141 की व्याख्या करते हुए कहा कि किसी शिकायत में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अपराध होने के समय आरोपित व्यक्ति संगठन का प्रभारी था और उसपर कारोबार के संचालन का दायित्व था।

First Published - May 21, 2008 | 12:01 AM IST

संबंधित पोस्ट