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सीबीईसी का सर्कुलर बढ़ा सकता है निर्यातकों की परेशानी

Last Updated- December 10, 2022 | 8:13 PM IST

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने डयूटी फ्री इम्पोर्ट अथॉराइजेशन (डीएफआईए) योजना के बारे में एक विवादास्पद सर्कुलर (नंबर 112009-कस्टम दिनांक 25.2.2009) जारी किया है  जो निर्यातकों को अनावश्यक मुकदमेबाजी में डाल सकता है और उन पर वित्तीय बोझ भी बढ़ा सकता है।
इस सर्कुलर या परिपत्र में अधिसूचना नंबर ‘402006-कस्टम दिनांक 1 मई, 2006’ के संशोधन के कारणों को  स्पष्ट किया गया है। इसमें निर्यातकों के लिए उपलब्ध विभिन्न विकल्प भी बताए गए हैं। निर्यातकों के लिए संशोधन या उनके परिणामों या फिर परिवर्तनों को स्पष्ट करने के लिए सर्कुलर में सुझाए गए तौर-तरीके को लेकर किसी तरह की समस्या नहीं होगी।
यह सर्कुलर  इस मायने में ठीक नहीं है, क्योंकि यह  चाहता है कि संशोधन पूर्व प्रभाव से लागू हों। सीबीईसी का कहना है कि उन मामलों में डीएफआईए स्कीम के तहत अनपेक्षित लाभ हो सकता है जिनमें शुल्क-मुक्त निविष्टयां स्थानांतरित की गई हैं या गैर उत्पाद शुल्क योग्यबिना शुल्क वाले सामानों के निर्माण में इस्तेमाल किया गया है।
ऐसे मामलों में स्थानांतरित करने वाला शुल्क-मुक्त कच्चा माल प्राप्त करता है और घरेलू बाजार बिक्री में तैयार उत्पादों पर उत्पाद शुल्क की उगाही से बचता है। सीबीईसी ने कहा है कि अगर पुन: पूर्ति वाले सामानों का गैर-उत्पाद शुल्क योग्यछूट प्राप्तशून्य शुल्क वाले उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है तो वर्तमान उपयोगकर्ता आयात के तहत स्थिति अच्छी बनी हुई है।
वास्तव में जैसा कि सीबीईसी में कहा गया है, दोहरा लाभ प्राप्त हुआ है, लेकिन क्या वह अनपेक्षित है। डीएफआईए स्कीम से जुड़े कई नीरस या कम महत्व वाले पहलुओं को समाचार पत्र के कई स्तंभों में पहले ही दोहराया जा चुका है, लेकिन सीबीईसी अभी भी इस बारे में कुछ करने को तैयार नहीं हो रहा है। दोहरे लाभ से जुड़ी अधिसूचनाओं में भी कई साल से किसी तरह का संशोधन नहीं किया गया है जिससे अनिश्चितत बरकरार है।
सीबीईसी का दावा है कि वह हमेशा से इस नजरिये पर कायम रहा है कि अधिसूचना 4006-कस्टम की शर्त (5) के संदर्भ में डीएफआईए स्कीम के तहत निर्यात किए जाने वाले सामानों के निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले निवेश के संदर्भ में सेनवैट क्रेडिट हासिल नहीं किया जा सकेगा।
सीबीईसी अब उन सभी निर्यातकों का पीछा करना चाहता है जिन्होंने डीएफआईए लिया है। बोर्ड यह पता लगाना चाहता है कि क्या निर्यातकों को दोहरा लाभ मिला है। एक भी ऐसा मामला नहीं है जिसमें दोहरा लाभ दिया जाना चाहिए।
लेकिन किसी भी मामले में सर्कुलर अधिसूचना में संशोधन के लिए पूर्व प्रभाव नहीं दे सकता। सीबीईसी को अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उन निर्यातकों को परेशान नहीं करना चाहिए जिन्होंने कानून का उल्लंघन नहीं किया है।
अगर सीबीईसी निर्यातकों के प्रति अपना कठोर रवैया अख्तियार करना बंद कर दे तो इससे निर्यातकों की परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं और उन्हें निर्यात के दौरान आसानी हो सकती है।

First Published - March 15, 2009 | 10:07 PM IST

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