भारतीय विमानन कंपनियां किराये के लिए एक नए ढांचे को तैयार कर रही हैं जिसके तहत बिना चेक-इन बैगेज की यात्रा 10 से 15 फीसदी तक सस्ती हो सकती है। पिछले सप्ताह विमानन नियामक डीजीसीए ने विमानन कंपनियों को चेक-इन बैगेज सहित सेवाओं को हटाने की अनुमति दी थी। इसका मतलब साफ है कि विमानन कंपनियां चेक-इन बैगेज के लिए अतिरिक्त शुल्क ले सकती हैं। फिलहाल विमानन कंपनियों को कम से कम 15 किलोग्राम तक के सामान के लिए यात्रियों को मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
अनबंडलिंग यानी उत्पाद अथवा सेवा को विभिन्न घटकों में अलग करना और प्रत्येक के लिए अलग से मूल्य निर्धारित करने का उद्देश्य लाभप्रदता को बेहतर करना और मूल्य के प्रति अधिक संवेदनशील यात्रियों को आकर्षित करना है। ऐसा नहीं है कि डीजीसीए ने पहली बार हैंड लगेज के लिए किराया वसूलने की अनुमति दी है। पिछली बार 2016 में डीजीसीए ने इसकी अनुमति दी थी और अनिवार्य किया था कि यदि यात्री हैंड लगेज किराये की बुकिंग करता है लेकिन अपने सामान के साथ हवाई अड्डे तक पहुंचता है तो विमानन कंपनी केवल 200 रुपये अतिरिक्त वसूली कर सकती है।
एक विमानन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इससे विमानन कंपनियों के हाथ बंध गए थे और इसलिए पहल खत्म हो गई। लोगों के एक बड़े तबके ने हैंड लगेज ओनली फेयर की बुकिंग करना शुरू कर दिया था क्योंकि 200 ररुपये कोई बड़ी बात नहीं थी। विमानन कंपनियों ने कुछ समय तक इसे बरकरार रखा लेकिन इसे वाणिज्यिक तौर पर सफल नहीं बनाया सका।’ इस बार डीजीसीए ने एक महत्त्वपूर्ण बदलाव किया है और विमानन कंपनियों को इस मामले में शुल्क वसूलने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। विमानन कंपनियों को प्रदान की जाने वाली नई वाणिज्यिक स्वतंत्रता उन्हें अपने ग्राहकों को कम किराये के साथ हवाई यात्रा के लिए आकर्षित करने में मदद करेगी। इससे इंडिगो, स्पाइसजेट, गो एयर और एयरएशिया जैसी सस्ती विमानन सेवा को अपने किराये ढांचे में बदलाव करने में मदद मिलेगी। एक सस्ती विमानन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘महानगरों के बीच अधिकतर टियर-1 मार्ग पर कॉरपोरेट यात्रियों की आवाजाही होती है जो आमतौर पर एक लैपटॉप बैग के साथ यात्रा करते हैं और उसी दिन वापस आ जाते हैं। उन्हें 15 किलोग्राम सामान के लिए भत्ते की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे में डीजीसीए के नए नियमों के तहत हम उन्हें कम किराया ढांचा उपलब्ध करा सकते हैं।’
दिल्ली-मुंबई जैसे व्यस्त मार्ग पर बिना सामान यात्रा करने वाले यात्रियों को करीब 500 से 800 रुपये की बचत होगी। इससे भारतीय यात्रियों की आदत भी बदलेगी जो आमतौर पर अधिक सामान के साथ यात्रा करते हैं। अधिकारी ने कहा, ‘जरा उन दिनों को याद करें जब हवाई अड्डों पर टिकटों की मुफ्त प्रिंटिंग की सुविधा दी गई थी तो लोगों की बड़ी-बड़ी कतारें लग जाती थीं। विमानन कंपनियों को उसमें कम से कम तीन कर्मचारियों को तैनात करना पड़ता था। बाद में हमने प्रिंटिंग के लिए शुल्क लेना शुरू कर दिया। क्या अब आपको हवाई अड्डे पर टिकट प्रिंट कराने के लिए कतार में कोई खड़ा दिखता है?’
अधिक सामान के साथ यात्रा में विमानन कंपनियों को काफी काम मैनुअल तरीके से निपटाना पड़ता है जिसकी लागत अधिक होती है। सामान पर टैग लगते ही उसे ट्रकों पर लादना और विमान तक पहुंचाना आदि सब काम मैनुअल तरीके से किया जाता है।