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SCO Summit: दुनियाभर में हो रही किरकिरी, मगर एससीओ सम्मेलन में सिर्फ भारत ने किया चीन की ‘Belt and Road’ पहल का विरोध

भारत OBOR की कड़ी आलोचना करता रहा है, क्योंकि इस परियोजना में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा शामिल है जो कश्मीर के पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से से होकर गुजरता है।

Last Updated- October 16, 2024 | 11:44 PM IST
SCO Summit: There is controversy all over the world, but in the SCO conference only India opposed China's 'Belt and Road' SCO Summit: दुनियाभर में हो रही किरकिरी, मगर एससीओ सम्मेलन में सिर्फ भारत ने किया चीन की ‘Belt and Road’ का विरोध

भारत ने बुधवार को एक बार फिर चीन की महत्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) पहल का समर्थन करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का एकमात्र देश बन गया है, जिसने इस विवादास्पद संपर्क परियोजना का समर्थन नहीं किया है।

ओबीओआर परियोजना में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) शामिल है जो कश्मीर के, पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से से होकर गुजरता है।

इस्लामाबाद द्वारा आयोजित एससीओ के शासनाध्यक्ष परिषद के सम्मेलन के अंत में जारी एक संयुक्त विज्ञप्ति में कहा गया कि रूस, बेलारूस, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान ने चीनी संपर्क पहल के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।

इसमें कहा गया कि देशों ने परियोजना के कार्यान्वयन पर चल रहे कार्य पर ध्यान दिया, जिसमें यूरेशियाई आर्थिक संघ को ओबीओआर से जोड़ने के प्रयास भी शामिल हैं। भारत पिछले एससीओ सम्मेलनों में भी ओबीओआर का समर्थन करने से इनकार करता रहा है।

भारत ओबीओआर, जिसे पहले बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के नाम से जाना जाता था, की कड़ी आलोचना करता रहा है, क्योंकि इस परियोजना में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) शामिल है जो कश्मीर के, पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से से होकर गुजरता है।

ओबीओआर के विरुद्ध वैश्विक आलोचना बढ़ रही है, क्योंकि इस पहल से संबंधित परियोजनाओं को क्रियान्वित करते हुए अनेक देश ऋण के बोझ तले दबे हुए हैं।

एससीओ सम्मेलन में अपने संबोधन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “ऋण एक गंभीर चिंता का विषय है” लेकिन उन्होंने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी।

उन्होंने कहा, “सहयोगात्मक संपर्क से नयी क्षमताएं पैदा हो सकती हैं।” संयुक्त विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने एससीओ, यूरेशियाई आर्थिक संघ, दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ के साथ-साथ अन्य इच्छुक राष्ट्रों और बहुपक्षीय संघों की भागीदारी के साथ ‘बृहत यूरेशियाई साझेदारी’ बनाने के प्रस्ताव पर ध्यान दिया।

इसमें कहा गया है, “प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने एससीओ क्षेत्र में स्थिर आर्थिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करने की अपनी इच्छा की पुष्टि करते हुए 2030 तक की अवधि के लिए एससीओ आर्थिक विकास रणनीति और एससीओ सदस्य देशों के बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग के कार्यक्रम को लागू करने के महत्व पर ध्यान दिया।”

इसमें कहा गया, “उन्होंने संबंधित कार्य योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए प्रासंगिक सहयोग के तंत्र के माध्यम से समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।”

एससीओ सम्मेलन की अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अलावा बेलारूस के प्रधानमंत्री रोमन गोलोवचेंको, चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग, रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन, ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ, कजाखस्तान के प्रधानमंत्री ओल्जास बेक्तेनोव, किर्गिज मंत्रिमंडल के प्रमुख अकिलबेक जापारोव, मंगोलिया के प्रधानमंत्री ओयुन-एर्डीन लवसन्नामसराय, ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजोदा, तुर्कमेनिस्तान के उप सभापति राशिद मेरेडोव और उज्बेकिस्तान के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अरिपोव इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

First Published - October 16, 2024 | 7:13 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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