facebookmetapixel
Advertisement
भारत-जापान का रक्षा सहयोग बढ़ेगा, समुद्री सुरक्षा से लेकर जहाजों के विकास तक साथमुफ्त कोचिंग से छोटे शहरों के छात्रों को फायदा, सरकारी नौकरियों में बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धाउदारीकरण के 35 साल: आईटी से लेकर खुदरा क्षेत्र में कोलकाता की बदली तस्वीर, मगर आ​र्थिक चुनौतियां बनी रहींAI ने छोटे कारोबारों के लिए विज्ञापन आसान बनाया, 75% ने ग्रोथ में मदद मानीब्रिक्स सम्मेलन से पहले भारत-बांग्लादेश संबंधों पर संशय, पीएम रहमान के दौरे की संभावना कमझारखंड में सरकारी नियुक्तियां रद्द करने पर रोक, 15 सितंबर तक सरकार से जवाबसेंसेक्स में हेरफेर का खेल: कॉपटॉल और मानसी ने कैसे रचा पूरा जाल?रुपये में निर्यात भुगतान पर अब मिलेंगे FTP के प्रोत्साहन, सरकार ने बदले नियमसुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नई औद्योगिक संबंध संहिता में ‘उद्योग’ की अलग व्याख्यामेटा के AI कंटेंट मॉडरेशन पर सरकार की चिंता, पोस्ट हटाने से पहले मानव समीक्षा पर जोर

जरूरतमंद देशों के लिए मिले खाद्यान्न निर्यात की अनुमति

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 5:32 PM IST

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि जरूरतमंद देशों के लिए भारत को अपने सार्वजनिक भंडार से खाद्यान्न निर्यात की अनुमति मिलनी चाहिए। हालांकि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के वर्तमान नियमों के अनुसार इसकी अनुमति नहीं दी गई है। सीतारमण ने इंडोने​​शिया के बाली में जी-20 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक से इतर ये बातें कहीं। सीतारमण ने कहा, ‘डब्ल्यूटीओ के नियम के अनुसार रियायती दर पर खरीदे गए अनाज को निर्यात नहीं किया जा सकता। हम लगातार कहते रहे हैं कि हमारे पास अतिरिक्त अनाज है और हम इसका व्यापार करना चाहते हैं।’ विश्व व्यापार संगठन के नियम के मुताबिक अभी किसी भी देश को अपने सार्वजनिक भंडार से खाद्यान्न निर्यात की अनुमति नहीं दी गई है क्योंकि यह रियायती कीमतों पर खरीदा जाता है। 
सीतारमण ने कहा, ‘भारत भुखमरी और खाद्य असुरक्षा खत्म करने में मदद करना चाहता है, लेकिन विश्व व्यापार संगठन के कारण दुविधा होती है।’ उन्होंने कहा कि युद्ध के समय में खाद्य की असुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होती है जिसका सामना कई देश करते हैं। अभी रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण विश्व के कई देशों में खाने की कमी देखने को मिल रही है।
सिंगापुर के नेतृत्व में लगभग 70-80 देशों के एक समूह विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों को संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत खरीदे गए खाद्यान्न पर निर्यात प्रतिबंध नहीं बढ़ाने की बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं को स्वीकार करने के लिए दबाव डाल रहा है। मगर कुछ सदस्यों ने घरेलू खाद्य सुरक्षा कारणों से विश्व खाद्य कार्यक्रम से खाद्य खरीद के लिए छूट के लिए आवाज उठाई है।
वित्त मंत्री ने खाना, ईंधन और उर्वरक को वैश्विकस्तर पर सार्वजनिक माल बताया और विकासशील देशों के लिए इन्हें सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब जल्दी से खाद्य उत्पादन और वैश्विक खाद्य प्रणाली को मजबूत करना होगा।
सीतारमण ने जी-20 के मुख्य कार्यक्रम में कहा कि भारत की दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाएं सार्वजनिक पूंजीगत व्यय कार्यक्रमों में अंतर्निहित हैं। उन्होंने कहा कि जुझारू आर्थिक प्रणालियों के लिए साक्ष्य पर आधारित नीतिगत निर्माण बेहद जरूरी है। भारत सरकार ने वैश्विक महामारी कोविड-19 से प्रभावित आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिए पूंजीगत व्यय पर जोर दिया है। अब अनुमान है कि सार्वजनिक खर्च में वृद्धि करने से निजी निवेश भी जोर पकड़ेगा। सीतारमण ने वित्त वर्ष 23 के बजट में पूंजीगत व्यय 35.4 फीसदी बढ़ाते हुए 7.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। पिछले वर्ष यह 5.5 लाख करोड़ रुपये था। बैठक के दूसरे सत्र में केंद्रीय वित्त मंत्री ने वैश्विक महामारी को लेकर तैयारी तथा प्रतिक्रिया प्रणाली समेत ‘जी20 स्वास्थ्य एजेंडा’ पर अपने विचार भी साझा किए। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र की आपात परिस्थितियों में संसाधनों को एक से दूसरे स्थान पर फौरन पहुंचाने और उन्हें तैनात करने की जरूरत पर भी जोर दिया। मंत्रालय के मुताबिक वित्त मंत्री ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को केंद्र में रखते हुए वैश्विक समन्वय प्रणाली का आह्वान किया।

Advertisement
First Published - July 15, 2022 | 11:49 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement