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 मोदी-ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत को झटका! 2.1 करोड़ डॉलर की अमेरिकी सहायता पर रोक

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अमेरिका ने भारत में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए दी जाने वाली 2.1 करोड़ डॉलर की अमेरिकी सहायता को रविवार को खत्म करने का ऐलान किया। 

Last Updated- February 17, 2025 | 12:17 AM IST
India US Trade Deal
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ प्रधानमंत्री मोदी

यूएसएड (यूएस एजेंसी फॉर इंटरनैशनल डेवलपमेंट) से वित्तीय मदद हासिल करने वाली परियोजनाओं पर लगातार कार्रवाई करते हुए अरबपति कारोबारी ईलॉन मस्क के नेतृत्व वाले अमेरिका के सरकारी दक्षता विभाग (डोज) ने भारत में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए दी जाने वाली 2.1 करोड़ डॉलर की अमेरिकी सहायता को रविवार को खत्म करने का ऐलान किया। 

भारत में यह परियोजना पड़ोसी देश नेपाल और बांग्लादेश के साथ-साथ दुनिया के कई देशों की परियोजनाओं में से एक थी, जिसके लिए कंसोर्टियम फॉर इलेक्शंस ऐंड पॉलिटिकल प्रोसेस स्ट्रेंथनिंग (सीईपीपीएस) रकम देती थी। साल 1995 में बना यह संगठन यूएसएड की वित्तीय मदद से चलता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डोज ने पोस्ट लिख कर कहा कि दुनिया भर में परियोजनाओं के लिए सीईपीपीएस की 48.6 करोड़ डॉलर की फंडिंग खत्म कर दी गई है।

वेबसाइट के मुताबिक, सीईपीपीएस एक गैर लाभकारी संगठन है, जो दुनिया भर में चुनावों और राजनीतिक बदलावों में मदद करने के लिए नैशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट, इंटरनैशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट और इंटरनैशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम जैसे तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों की विशेषज्ञता को इकट्ठा करता है। इसने कहा है कि सीईपीपीएस की स्थापना साल 1995 में की गई थी और इसे यूएसएड के ग्लोबल इलेक्शंस ऐंड पॉलिटिकल ट्रांजिशन (जीईपीटी) द्वारा वित्तपोषित किया जाता है। भारत में इसने किन-किन परियोजनाओं को रकम दिया है इसकी जानकारी नहीं है क्योंकि सीईपीपीएस की वेबसाइट अभी अपडेट की जा रही है।

एक्स पर पोस्ट कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता अमित मालवीय ने कहा कि भारत में मतदान बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर देना निश्चित रूप से भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप है।  उन्होंने कहा, ‘इससे किसको फायदा होता है? सत्तारूढ़ दल को निश्चित तौर पर फायदा नहीं मिलता है।’

भाजपा के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख मालवीय ने कहा कि एसवाई कुरैशी के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग ने जॉर्ज सोरोस के ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशन’ से जुड़े संगठन ‘इंटरनैशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स’ के साथ 2012 में एक समझौता किया था जो मुख्य रूप से यूएसएड द्वारा वित्त पोषित है। एक बार फिर से यह कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के ‘ज्ञात सहयोगी’ अरबपति अमेरिकी निवेशक जॉर्ज सोरोस ही हैं, जिनकी छाया हमारी चुनावी प्रक्रिया पर मंडराती रही है।

अगले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पर अंगुली उठाने वाले लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणियों पर मालवीय ने कहा कि विडंबना है कि जो लोग भारत के चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे है उन्हें भारत के पूरे निर्वाचन आयोग को विदेशी संचालक को सौंपने में कोई गुरेज नहीं था। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष (अभी राहुल गांधी हैं) वाली चयन समिति की सोमवार बैठक होने वाली है। मालवीय ने कहा, ‘धीरे-धीरे अब यह पूरी तरह स्पष्ट होता जा रहा है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने व्यवस्थित तरीके से देश विरोधी ताकतों को भारत के संस्थानों में घुसपैठ करने में सक्षम बनाया, जो हर वक्त भारत को कमजोर करना चाहते हैं।’

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने एक्स पर पोस्ट किया है कि वह यह जानना चाहेंगे कि भारत, नेपाल और बांग्लादेश में किसे पैसे मिले। उन्होंने कहा कि यूएसएड अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है।

शुक्रवार को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के साथ प्रधानमंत्री मोदी के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जब पूछा गया था कि क्या यूएसएड ने साल 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों और साल 2024 के भारतीय लोक सभा चुनावों को प्रभावित किया है तो ट्रम्प ने कहा, इसकी (यूएसएड) भारतीय चुनावों में भूमिका हो सकती थी और 2020 और 2024 में बुरी चीजें हुईं, लेकिन 2024 के अमेरिकी चुनावों में धांधली करना बहुत बड़ा था। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक दिन में मतदान, मतदाता पहचान पत्र और कागजी मतपत्र की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। अपनी हालिया अमेरिकी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मस्क से मुलाकात की थी।

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First Published - February 17, 2025 | 12:17 AM IST

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