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WMO की रिपोर्ट में खुलासा: दुनिया की केवल एक तिहाई नदियों में ही सामान्य स्तर का पानी, कई जगह हालत गंभीर

साथ ही इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में दुनिया का अधिकांश भाग गर्म और सूखा रहा व यह रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्ष भी दर्ज किया गया

Last Updated- September 18, 2025 | 9:58 PM IST
rivers
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

नदियों में पानी पर रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है, जिसमें मौसमी बदलावों की ओर कई स्पष्ट संकेत किए गए हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की गुरुवार को जारी ‘द स्टेटस ऑफ ग्लोबल वाटर रिसोर्सेज इन 2024 रिपोर्ट’ में कहा गया है कि दुनिया भर की केवल एक तिहाई नदियों में 2024 में पानी सामान्य सीमा के भीतर था। यही नहीं, लगभग 60 प्रतिशत नदियों में लगातार छठे वर्ष या तो बहुत अधिक या बहुत कम पानी दिखा।

स्टेटस ऑफ ग्लोबल वाटर रिसोर्सेज रिपोर्ट में राष्ट्रीय मौसम विज्ञान और जल विज्ञान सेवाओं, वैश्विक डेटा केंद्रों, जल विज्ञान मॉडलिंग समुदाय के सदस्यों और नासा, ईएसए, जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस, वर्ल्ड ग्लेशियर मॉनिटरिंग सर्विस, ग्लोबल रनऑफ डेटा सेंटर तथा इंटरनैशनल ग्राउंड वाटर असेसमेंट सेंटर जैसे सहायक संगठनों सहित जल विज्ञान विशेषज्ञों के विस्तृत नेटवर्क की राय शामिल की गई है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में दुनिया का अधिकांश भाग गर्म और सूखा रहा। यह रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्ष भी दर्ज किया गया। इसमें कई क्षेत्रों में भीषण सूखा पड़ा तो कई अन्य क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ भी आई।

रिपोर्ट के अनुसार उसी साल झील की सतहों का तापमान असामान्य रूप से अधिक पाया गया। दुनिया भर की लगभग सभी 75 मुख्य झीलों में औसत से अधिक जल स्तर दर्ज किया गया। इसमें यह भी कहा गया है कि 2024 में लगातार तीसरे वर्ष सभी क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर ग्लेशियर पिघलने के मामले सामने आए। रिपोर्ट कहती है, ‘कई छोटे ग्लेशियर क्षेत्र पहले ही तथाकथित चरम जल बिंदु पर पहुंच चुके हैं या पहुंचने वाले हैं। जब एक ग्लेशियर का पिघलना अपने अधिकतम वार्षिक अपवाह तक पहुंच जाता है तो उसे चरम जल बिंदु कहते हैं। इसके बाद ग्लेशियर का आकार कम हो जाने के कारण पिघलने की दर भी घट जाती है।’

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार, अनुमानित 3.6 अरब लोगों को प्रति वर्ष कम से कम एक महीने तक पानी की कमी का सामना करना पड़ता है और 2050 तक प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर 5 अरब से अधिक हो सकती है।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव सेलेस्टे साउलो ने एक बयान में कहा, ‘पानी हमारे समाज के अस्तित्व को बचाए-बनाए रखता है। यह हमारी अर्थव्यवस्थाओं को ताकत प्रदान करता है और पारिस्थितिक तंत्र को भी मजबूत करता है। इस सब के बावजूद दुनिया के जल संसाधन भारी दबाव से जूझ रहे हैं। इसका सीधा असर चरम जल संबंधी खतरों और आजीविका पर बढ़ते प्रभाव के रूप में दिखा है।’

रिपोर्ट में क्षेत्रवार आंकड़ों के बारे में कहा गया है कि 2024 में कजाकिस्तान और दक्षिणी रूस, पाकिस्तान और उत्तरी भारत, दक्षिणी ईरान और उत्तर-पूर्वी चीन में सामान्य से अधिक नमी वाले क्षेत्र दर्ज किए गए।  उसी साल कजाकिस्तान और रूस सहित एशिया के कुछ हिस्सों में नदियों में सामान्य से अधिक पानी की स्थिति थी, जबकि गंगा, गोदावरी और सिंधु जैसी प्रमुख घाटियों में भी सामान्य से अधिक पानी देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम और मध्य एशिया में झीलों का स्तर सामान्य से बहुत कम था।

First Published - September 18, 2025 | 9:53 PM IST

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