facebookmetapixel
दिल्ली की हवा इतनी खराब कैसे हुई? स्टडी में दावा: राजधानी के 65% प्रदूषण के लिए NCR व दूसरे राज्य जिम्मेदारExplainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?Credit Card Tips: बिल टाइम पर चुकाया, फिर भी गिरा CIBIL? ये है चुपचाप स्कोर घटाने वाला नंबर!आस्था का महासैलाब: पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हुआ माघ मेला, 19 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी2026 में हिल सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, एक झटका बदल देगा सब कुछ…रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर चेतायाKotak Mahindra Bank का निवेशकों को जबरदस्त तोहफा: 1:5 में होगा स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट फिक्सकनाडा ने एयर इंडिया को दी कड़ी चेतावनी, नियम तोड़ने पर उड़ान दस्तावेज रद्द हो सकते हैंट्रंप का दावा: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी गिरफ्त में; हवाई हमलों की भी पुष्टि कीHome Loan: होम लोन लेने से पहले ये गलतियां न करें, वरना एप्लीकेशन हो सकती है रिजेक्टअमेरिका का वेनेजुएला पर बड़ा हमला: राजधानी काराकास हुए कई जोरदार धमाके, देश में इमरजेंसी लागू

भारत में बहुत कम हैं महिला सांसद

भारतीय संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण विधेयक पेश

Last Updated- September 19, 2023 | 11:30 PM IST
Some seen, some hidden: Landmark moments in old Parliament's history

भारतीय संसद में महिलाओं की भागीदारी कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कम है। मगर देश के स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी पर गौर किया जाए तो उनकी मौजूदगी खासी बेहतर दिखती है। भारत में महिला आरक्षण विधेयक का मसौदा तो बहुत पहले तैयार हो गया था मगर सरकार ने उसके तीन दशक बाद मंगलवार को यह विधेयक संसद में पेश किया।

साल 2029 में लागू होने वाले विधेयक में महिला उम्मीदवारों के लिए लोकसभा और राज्यों की विधान सभाओं में एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। आरक्षण की पैरोकारी करने वालों को उम्मीद है कि यह विधेयक भारतीय संसद में महिलाओं के सामने मौजूद राजनीतिक बाधाओं को ध्वस्त करने में मददगार साबित होगा।

कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं की संसदों पर गहराई से नजर डालें तो पता चलता है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत की संसद में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है।

हमारे यहां लोकसभा में सिर्फ 15 फीसदी और राज्यसभा में 14 फीसदी महिला सदस्य हैं। इसकी तुलना में दक्षिण अफ्रीका के निचले सदन में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी है, चीन के संसद में 27 फीसदी और ब्राजील में 18 फीसदी महिला सदस्य हैं। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों में तकरीबन एक तिहाई हिस्सेदारी महिलाओं की है।

हालांकि भारतीय संसद में महिला सदस्यों की संख्या 20 फीसदी से भी कम है मगर पिछले कुछ चुनावों में उनकी भागीदारी बढ़ गई है। साल 2004 के आम चुनावों में महिला उम्मीदवारों की तादाद 7 फीसदी से भी कम थी और चुने गए सांसदों के बीच उनका प्रतिनिधित्व 8 फीसदी ही था। मगर 2014 तक चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बीच महिलाओं की भागीदारी महज 8 फीसदी होने के बावजूद सदन में उनका प्रतिनिधित्व बढ़कर 11 फीसदी हो गया।

महिला राजनेताओं की संपत्ति में भी अच्छा खासा इजाफा हुआ है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति में महिला सांसदों की औसत संपत्ति में इजाफा हुआ है। महिला सांसदों की औसत संपत्ति साल 2004 में 79 लाख रुपये ही थी, जो 2019 में बढ़कर 4.3 करोड़ रुपये हो गई।

भारतीय राजनीति में महिलाओं को आरक्षण देना कोई नई बात नहीं है। आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तराखंड जैसे 20 राज्यों में पहले ही स्थानीय पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। स्थानीय पंचायतों में कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 46 फीसदी है।

उत्तराखंड की पंचायतों में लगभग 56 फीसदी निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। यह देश में सबसे अधिक अनुपात है। इसके बाद छत्तीसगढ़ और असम (लगभग 55 फीसदी), महाराष्ट्र (53.5 फीसदी) और तमिलनाडु (53 फीसदी) का स्थान है। किंतु लगभग 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय औसत से कम है।

First Published - September 19, 2023 | 11:30 PM IST

संबंधित पोस्ट