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केरल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने किया केंद्र, राज्यपाल कार्यालय से जवाब तलब

Supreme Court: केरल सरकार ने दावा किया कि राज्यपाल विधेयकों पर अपनी मंजूरी रोककर देरी कर रहे हैं और यह ‘लोगों के अधिकारों को निष्प्रभावी’ बनाना है।

Last Updated- November 20, 2023 | 10:51 PM IST
Supreme Court

उच्चतम न्यायालय ने केरल सरकार की याचिका पर सोमवार को केंद्र सरकार और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के कार्यालय से जवाब तलब किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित कई विधेयकों को मंजूरी नहीं दे रहे हैं।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा के पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता के के वेणुगोपाल की दलीलों पर गौर किया जिसमें आठ विधेयकों को मंजूरी देने में राज्यपाल की ओर से देरी किए जाने का आरोप लगाया गया।

शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को नोटिस जारी करके कहा कि वह या फिर सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुनवाई में उसकी सहायता करें। अदालत अब केरल सरकार की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी।

वेणुगोपाल ने कहा, ‘राज्यपालों को यह एहसास नहीं है कि वे संविधान के अनुच्छेद 168 के तहत विधायिका का हिस्सा हैं।’

केरल राज्य ने अपनी याचिका में दावा किया कि राज्यपाल खान राज्य विधानसभा द्वारा पारित आठ विधेयकों पर विचार करने में देरी कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि ये विधेयक सात से 21 महीनों से राज्यपाल की मंजूरी के इंतजार में लंबित हैं। केरल सरकार ने दावा किया कि राज्यपाल विधेयकों पर अपनी मंजूरी रोककर देरी कर रहे हैं और यह ‘लोगों के अधिकारों को निष्प्रभावी’ बनाना है।

तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई स्थगित

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई 1 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी जिसमें राज्य के राज्यपाल आर एन रवि पर विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में देरी करने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस तथ्य पर गौर किया कि तमिलनाडु विधानसभा ने राज्यपाल द्वारा लौटाए गए 10 विधेयकों को फिर से पारित किया है।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा के पीठ ने राज्यपाल कार्यालय की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल (एजी) आर वेंकटरमणी की ओर से सुनवाई टालने के आग्रह को मान लिया।

पीठ ने कहा, ‘पहले हम विधेयकों (पुन: पारित) पर राज्यपाल के निर्णय का इंतजार करते हैं।’ विधेयकों को मंजूरी देने में देरी पर गौर करते हुए पीठ ने कहा कि मुद्दा यह है कि क्या राज्यपाल के कार्यालय को सौंपे गए संवैधानिक कार्यों के निर्वहन में देरी हुई है। इस पर एजी ने अदालत के समक्ष कहा कि वर्तमान राज्यपाल ने 18 नवंबर, 2021 को कार्यभार संभाला था और देरी के लिए राज्यपाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि कई विधेयकों में कई ‘जटिल मुद्दे’ अंतर्निहित होते हैं।

पीठ ने कहा कि वर्तमान में केवल पांच विधेयक राज्यपाल के समक्ष सहमति के लिए लंबित हैं क्योंकि विधानसभा ने 10 अन्य विधेयकों को फिर से पारित किया है। पीठ ने कहा, ‘दोबारा पारित किए जाने के बाद किसी विधेयक की स्थिति एक अर्थ में धन विधेयक के समान हो जाती है। फिर से पारित विधेयकों पर राज्यपाल को नए सिरे से निर्णय लेने दीजिए।’

First Published - November 20, 2023 | 10:48 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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