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‘बुरे पड़ोसियों से रक्षा करने का पूरा अधिकार’, बोले जयशंकर: आतंक फैलाने वाले को पानी मांगने का कोई हक नहीं

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि बात जब ‘बुरे पड़ोसियों’ की आती है, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है

Last Updated- January 02, 2026 | 9:58 PM IST
S. Jaishankar
विदेश मंत्री एस. जयशंकर | फाइल फोटो

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि बात जब ‘बुरे पड़ोसियों’ की आती है, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर कोई पड़ोसी देश भारत में आतंकवाद फैलाना जारी रखता है, तो वह भारत से पानी साझा करने की मांग नहीं कर सकता।

साथ ही जयशंकर ने कहा कि ‘अच्छे पड़ोसियों’ के मामले में भारत निवेश करने, मदद देने और साझा करने में कभी पीछे नहीं हटता, फिर चाहे वह कोविड-19 महामारी के दौरान टीके हों, यूक्रेन संघर्ष के दौरान ईंधन एवं खाद्य सहायता हो या श्रीलंका को उसके वित्तीय संकट के दौरान दी गई चार अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय मदद हो।

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि बात जब ‘बुरे पड़ोसियों’ की आती है, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।

चेन्नई में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईआईटी) मद्रास के छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए जयशंकर ने कहा, ‘भारत की प्रगति इस क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक लहर है और हमारे अधिकांश पड़ोसी मानते हैं कि भारत की प्रगति से उनका भी विकास होता है। लेकिन जब आतंकवाद फैलाने वाले बुरे पड़ोसियों की बात आती है, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वह हर संभव कदम उठाएगा। आप हमारे देश में आतंकवाद फैलाना जारी रखते हुए हमसे पानी साझा करने का अनुरोध नहीं कर सकते।’

विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए अन्य देशों के साथ संवाद करना जरूरी है, जिसमें भारत के इरादों को गलत तरीके से समझा जाए। उन्होंने कहा, ‘लोगों को आपको गलत समझने से रोकने का तरीका है संवाद करना। अगर आप अच्छी तरह, स्पष्ट रूप से और ईमानदारी से संवाद करते हैं, तो अन्य देश और अन्य लोग इसका सम्मान करते हैं और इसे स्वीकार करते हैं।’

जयशंकर ने कहा, ‘दुनिया भर में बहुत से लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत पर गर्व करते हैं। मुझे कोई कारण नजर नहीं आता कि हमें ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए।’ उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि प्राचीन सभ्यताओं में से ‘वास्तव में बहुत कम’ ऐसी हैं, जो प्रमुख आधुनिक राष्ट्र के रूप में उभर पाईं और भारत उनमें से एक है।

पड़ोसी देशों की मदद में भारत हमेशा आगे

जयशंकर ने कहा, ‘हमें अपने अतीत की ऐसी समझ है, जो बहुत कम देशों के पास है, लोकतांत्रिक राजनीतिक मॉडल अपनाने के हमारे फैसले ने ही लोकतंत्र के विचार को एक सार्वभौमिक राजनीतिक अवधारणा बना दिया।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हमने वह रास्ता नहीं अपनाया होता, तो लोकतांत्रिक मॉडल, जैसा कि हम जानते हैं, क्षेत्रीय और संकीर्ण होता, पश्चिम के साथ साझेदारी भी अहम है और इसी तरह हम दुनिया को आकार देते हैं।’

जयशंकर ने कहा कि वह भारत की ओर से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दो दिन पहले ही ढाका गए थे।

उन्होंने कहा, ‘लेकिन व्यापक रूप से, पड़ोसियों के प्रति हमारा रुख व्यावहारिक ज्ञान पर आधारित है। अच्छे पड़ोसियों के मामले में भारत निवेश करने, मदद देने और साझा करने में कभी पीछे नहीं हटता, फिर चाहे वह कोविड-19 के दौरान टीके हों, यूक्रेन संघर्ष के दौरान ईंधन एवं खाद्य सहायता हो या श्रीलंका को उसके वित्तीय संकट के दौरान दी गई चार अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय मदद हो।’

आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन की शुरुआत

जयशंकर ने ‘आईआईटीएम ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन’ की भी शुरुआत की, जो आईआईटी मद्रास की एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय पहल है, जिसका मकसद संस्थान को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के लिए एक वैश्विक नेटवर्क वाले केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि देशों ने घरेलू स्तर पर विकास करके और फिर विदेश में संबंध स्थापित करके प्रगति की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से लाभ हासिल किया जा सके।

जयशंकर ने कहा, ‘जब हम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की बात करते हैं, तो इसका मतलब यह है कि हमने दुनिया को कभी भी शत्रुतापूर्ण या प्रतिकूल स्थान नहीं माना, जिससे हमें खुद को बचाना पड़े। हमारे संसाधन सीमित हैं। सीमित संसाधनों के साथ आप अधिकतम प्रभाव कैसे डाल सकते हैं? वास्तव में यही वह समस्या है, जिसका समाधान तलाशना है।’

First Published - January 2, 2026 | 9:58 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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