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100% electrification: FY25 तक भारतीय रेलवे की नजर पूर्ण विद्युतीकरण पर, 95 फीसदी काम हो चुका है पूरा

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विशेषज्ञों का मानना है कि 100 प्रतिशत विद्युतीकरण लागत और रणनीतिक दोनों हिसाब से महत्त्वपूर्ण पहल है, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि रेल नेटवर्क को हरित बनाया जा रहा है।

Last Updated- April 07, 2024 | 9:59 PM IST
railway

100% electrification of Railway: भारतीय रेल वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक अपने व्यापक रेलवे नेटवर्क के विद्युतीकरण करने पर काम कर रही है। इस काम से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रेलवे ने 2023-24 में अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 95 प्रतिशत विद्युतीकरण कर लिया है।

राज्य सभा में दिए गए एक जवाब में केंद्रीय रेल मंत्रालय ने 2021 में कहा था कि संभवतः 2023-24 तक भारतीय रेल की ब्रॉड गेज रेल लाइनों का विद्युतीकरण पूरा हो जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि यह अब नजर आ रहा है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘भारतीय रेलवे, मिशन 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा करने की दिशा में तेजी से प्रगति कर रहा है। अब यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रीन रेलवे नेटवर्क बन गया है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 7,188 रूट किलोमीटर विद्युतीकरण किया गया है। रेलवे के इतिहास में यह अब तक का सर्वाधिक विद्युतीकरण है।’

उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 24 में फरवरी तक रेलवे के 3,306 किलोमीटर लाइन का विद्युतीकरण हुआ था। इसका मतलब यह है कि मार्च में हुआ विद्युतीकरण इसके पहले के 11 महीनों में हुए कुल विद्युतीकरण से अधिक रहा है। इस मामले के जानकार अधिकारियों का कहना है कि मार्च की शुरुआत में करीब 3,700 किलोमीटर के कई विद्युतीकरण का काम प्रगति पर था और आमतौर पर कई कार्य वित्त वर्ष के अंत तक पूरे किए जाते हैं।

इस सिलसिले में जानकारी मांगे जाने पर एक और वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘ब्रॉड गेज नेटवर्क का करीब 95 प्रतिशत विद्युतीकरण किया जा चुका है। विद्युतीकरण के आंकड़ों में नई लाइनों, दोहरीकरण, तिहरीकरण और इससे अधिक लाइनें बिछाने का काम भी शामिल है, जो अभी प्रगति पर है।’

मार्च 2024 के आखिर तक हुए विद्युतीकरण का राज्यवार आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है। 29 फरवरी तक 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, ओडिशा, पुदुच्चेरी, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया गया है। इन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कुल नेटवर्क 24,383 रूट किलोमीटर है।

पर्यावरण और रणनीतिक वजहों से रेल का विद्युतीकरण सरकार के एजेंडे में प्रमुख है। बिजली की तुलना में डीजल से रेल की आवाजाही महंगी है। यात्री ट्रेन की परिचालन लागत बिजली की तुलना में 2.25 गुना और माल ढुलाई 3.05 गुना महंगी है।

इसके अलावा बिजली से चलने वाली लाइन पर ज्यादा वजनी माल की ढुलाई की जा सकती है व ज्यादा यात्री ट्रेनें चलाई जा सकती हैं और इससे ट्रैक्शन में बदलाव से होने वाली देरी से बचा जा सकता है।

पहले अधिकारी ने कहा, ‘2014-15 से भारतीय रेलवे ने ब्रॉड गेज नेटवर्क में करीब 40,000 वर्ग किलोमीटर नेटवर्क का विद्युतीकरण कर लिया है। विद्युतीकरण के काम में उल्लेखनीय तेजी आई है और 2004 से 2014 के बीच जहां प्रतिदिन 1.42 किलोमीटर प्रति दिन विद्युतीकरण हुआ, वहीं 2023-24 में करीब 19.6 किलोमीटर प्रति दिन विद्युतीकरण हुआ।’

रेलवे के विद्युतीकरण को एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे रेलवे परिचालन के लिए डीजल के आयात की जरूरत कम होगी। भारत में डीजल की जरूरत आयात से पूरी की जाती है, लेकिन बिजली की जरूरत सामान्यतया घरेलू उत्पादन से पूरी होती है, जिसमें अक्षय ऊर्जा और जीवाश्म ईंधन दोनों स्रोतों से होने वाले बिजली का उत्पादन शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 100 प्रतिशत विद्युतीकरण लागत और रणनीतिक दोनों हिसाब से महत्त्वपूर्ण पहल है, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि रेल नेटवर्क को हरित बनाया जा रहा है।

भारतीय रेलवे के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘रेलवे अपने लिए ग्रिड से बिजली लेता है। इसमें कोयले से उत्पादित बिजली की हिस्सेदारी 70 से 80 प्रतिशत है। जब तक बिजली का उत्पादन अक्षय ऊर्जा स्रोतों से नहीं होता है, इसका मतलब यह होगा कि कार्बन उत्सर्जन का स्रोत बदल रहा है, इसके असर या मात्रा में बदलाव नहीं हो रहा है।’

रेलवे ने कहा है कि वह भारत की जलवायु कार्रवाई योजना के तहत 2030 तक नेट कार्बन जीरो का लक्ष्य पूरा करेगा। इसके लिए उसे आगामी 6 साल में अपने पटरियों के नेटवर्क पर कामकाज का परिचालन अक्षय ऊर्जा स्रोत से करना होगा।

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First Published - April 7, 2024 | 9:59 PM IST

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