भारत के बाजार नियामक सेबी ने बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की एक इकाई पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन करने और इंटरनल “चाइनीज वॉल” तोड़ने का आरोप लगाया है। यह आरोप 2024 में हुए एक शेयर सौदे से जुड़े हैं। यह जानकारी एक नोटिस में दी गई है।
यह नोटिस भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की उस जांच के बाद जारी किया गया, जिसमें मार्च 2024 में आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट (ABSL AMC) के शेयरों की बिक्री को संभालने में बैंक की घरेलू सिक्योरिटीज इकाई की भूमिका की जांच की गई थी। जांच में पाया गया कि बैंक की डील टीम, जिसके पास शेयर बिक्री से जुड़ी अप्रकाशित प्राइस सेंसेटिव जानकारी मौजूद थी, उसने संभावित निवेशकों से डायरेक्ट और इन डायरेक्ट रूप से संपर्क किया।
नोटिस के मुताबिक, डील टीम के अनुरोध पर बैंक की ब्रोकिंग इकाई, रिसर्च टीम और एशिया-पैसिफिक सिंडिकेट टीम ने निवेशकों से संपर्क किया और उन्हें वैल्यूएशन रिपोर्ट्स और अन्य गोपनीय जानकारी साझा की। 30 अक्टूबर को जारी इस नोटिस में सेबी ने कहा कि यह व्यवहार बैंक की डील टीम की ओर से ब्रोकिंग और रिसर्च इकाइयों के साथ चाइनीज वॉल बनाए रखने में विफलता को दिखाता है। इससे गोपनीय जानकारी की सुरक्षा और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर असर पड़ा है। रॉयटर्स ने यह नोटिस देखा है।
सेबी ने यह भी कहा कि जांच के दौरान बैंक ने महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाया और गलत बयान दिए। बैंक ऑफ अमेरिका और सेबी, दोनों ने ही रॉयटर्स की ओर से भेजे गए ईमेल सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सबसे पहले सेबी द्वारा बैंक को भेजे गए इस नोटिस की खबर दी थी।
मामले से सीधे जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, बैंक ने बिना दोष स्वीकार किए आरोपों के निपटारे के लिए सेबी के पास आवेदन किया है। सूत्र ने बताया कि यह आवेदन फिलहाल समीक्षा के अधीन है। मामले की संवेदनशीलता के चलते सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। यह मामला पहली बार 2024 में एक व्हिसलब्लोअर की शिकायत के जरिए सामने आया था। इसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच की, जिसके चलते कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा।
सेबी के नोटिस में बैंक के तीन निवेशकों से हुए संपर्क का जिक्र किया गया है। इनमें एचडीएफसी लाइफ (भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी बीमा कंपनी), नॉर्गेस बैंक (नॉर्वे का केंद्रीय बैंक) और एनाम होल्डिंग्स (एक भारतीय निवेश कंपनी) शामिल हैं।
भारत के इनसाइडर ट्रेडिंग नियम, जैसे कई अन्य देशों में भी हैं, यह अनुमति नहीं देते कि कोई निवेश बैंक कीमत को प्रभावित करने वाली जानकारी (प्राइस-सेंसिटिव जानकारी) को, किसी वैलिड मकसद के बिना, डील टीम के बाहर के कर्मचारियों के साथ साझा करे। खासकर तब जब बैंक को किसी सौदे को संभालने की जिम्मेदारी मिल चुकी हो।
सेबी ने कहा कि इस मामले में बैंक की रिसर्च, ब्रोकिंग और एशिया-पैसिफिक टीमों ने निवेशकों से फीडबैक मांगा। यह सब उस समय हुआ जब बैंक को 28 फरवरी 2024 को यह सौदा संभालने के लिए नियुक्त किया गया था और इससे पहले कि 18 मार्च 2024 को शेयर बिक्री की औपचारिक घोषणा की जाए। सेबी ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया है।
नोटिस में एक उदाहरण दिया गया है, जिसमें डील टीम ने बैंक की ब्रोकिंग इकाई से कहा कि वह ABSL AMC और उसकी प्रमोटर कंपनी आदित्य बिड़ला समूह की वैल्यूएशन रिपोर्ट एनाम होल्डिंग्स को दे, जो इस शेयर बिक्री में संभावित निवेशक थी। एक अन्य मामले में, डील टीम ने हांगकांग स्थित एशिया-पैसिफिक सिंडिकेट टीम से नॉर्गेस बैंक से इस ऑफर में उसकी रुचि को लेकर फीडबैक लेने को कहा। सिंडिकेट टीम डील टीम का हिस्सा नहीं थी।
सेबी ने कहा, “इस तरह ABSL AMC से जुड़े सौदों की जानकारी को बैंक ने ‘जरूरत के आधार पर’ (need-to-know) तरीके से नहीं संभाला।” सेबी के मुताबिक, ब्रोकिंग, रिसर्च और सिंडिकेट टीमों ने डील टीम की ओर से काम किया। हालांकि, नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन संपर्कों के दौरान किसी खास कीमत-संवेदनशील जानकारी का आदान-प्रदान हुआ हो। एचडीएफसी लाइफ, नॉर्गेस बैंक और एनाम होल्डिंग्स ने रॉयटर्स के ईमेल सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।