इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी, सोने से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। सोने और चांदी की कीमतों का अनुपात, जिसे गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो कहा जाता है, 2013 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है। बुधवार को यह अनुपात करीब 57 दर्ज किया गया, जबकि अप्रैल 2025 के अंत में यह 100.8 के पांच साल के ऊंचे स्तर पर था। इसका मतलब है कि चांदी अब सोने के मुकाबले काफी महंगी हो चुकी है। मार्च 2013 में यह अनुपात 56.4 था, जबकि मार्च 2020 में सोना चांदी से 113 गुना महंगा था।
बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 78.6 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि सोना 4,463.6 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। फरवरी 2025 के अंत से अब तक चांदी की कीमतों में 152 फीसदी की उछाल आई है। वहीं, इसी अवधि में सोने की कीमतें 56.2 फीसदी बढ़ी हैं। पिछले 12 महीनों में चांदी का यह प्रदर्शन, सोने के मुकाबले अप्रैल 2011 के बाद सबसे मजबूत माना जा रहा है।
पिछले 50 सालों में सोने और चांदी का औसत अनुपात 63.4 रहा है, लेकिन यह अनुपात हमेशा एक जैसा नहीं रहा। दिसंबर 1979 में यह 15.9 के निचले स्तर पर था, जबकि अप्रैल 2020 में यह 112.7 के हाई तक पहुंच गया था। दिसंबर 1979 में चांदी की कीमत सोने की कीमत का सिर्फ एक-सोलहवां हिस्सा थी। उस समय चांदी 32.2 डॉलर और सोना 512 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। अप्रैल 2011 में भी चांदी ने जोरदार तेजी दिखाई थी, जब इसकी कीमत 47.91 डॉलर तक पहुंच गई थी।
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आने वाले समय में सोने के मुकाबले चांदी और महंगी हो सकती है। इसकी बड़ी वजह इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल जैसे उद्योगों में चांदी की तेजी से बढ़ती मांग है, जबकि इसकी सप्लाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पा रही। सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2020 के बाद से चांदी की औद्योगिक मांग हर साल औसतन 5.8 फीसदी की दर से बढ़ी है, जबकि कुल सप्लाई में सालाना बढ़ोतरी सिर्फ 1.1 फीसदी रही है।
2025 में चांदी का खनन उत्पादन 835 मिलियन औंस रहा, जो 2016 के मुकाबले 7.2 फीसदी कम है। इसी अवधि में औद्योगिक इस्तेमाल के लिए चांदी की मांग 38 फीसदी बढ़ी है, जबकि सोलर पैनलों में इस्तेमाल होने वाली चांदी की मांग में 140 फीसदी की भारी छलांग लगी है। अब दुनिया में चांदी की कुल मांग का करीब 59 फीसदी हिस्सा उद्योगों से आता है, जो 2016 में 49.4 फीसदी था।
इस बदलाव के चलते चांदी अब सिर्फ कीमती धातु नहीं रह गई है, बल्कि एक जरूरी या क्रिटिकल धातु बनती जा रही है। निवेशकों और इलेक्ट्रॉनिक्स व सोलर कंपनियों के बीच चांदी को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है, जिससे पिछले एक साल में कीमतों में तेज उछाल आया है। हाल ही में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चांदी उत्पादक देश चीन ने चांदी के निर्यात पर रोक लगाई है, ताकि उसके इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर उद्योग को पर्याप्त आपूर्ति मिल सके।
इसके उलट, सोने की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह निवेश मांग रही है। खासतौर पर गैर-पश्चिमी देशों के केंद्रीय बैंक डॉलर और यूरो जैसी मुद्राओं पर निर्भरता घटाने के लिए सोना खरीद रहे हैं। पिछले पांच सालों में केंद्रीय बैंकों ने कुल 4,515 टन सोना खरीदा, जो इस अवधि की कुल मांग का करीब 20 फीसदी है।
हालांकि 2025 में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध सोना खरीद सालाना आधार पर 22.5 फीसदी घट गई। इस दौरान सोने की मांग को सबसे ज्यादा सहारा गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) से मिला। 2025 में गोल्ड ईटीएफ ने सालाना आधार पर 825 टन सोना खरीदा, जबकि 2024 में ईटीएफ से 6.4 टन सोने की शुद्ध बिक्री हुई थी। ये आंकड़े वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हैं।