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CMS में फर्जी ब्रेक दिखाकर रेलवे जोन लोको पायलटों से 16 घंटे तक करवा रहे काम, AILRSA ने लगाए गंभीर आरोप

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रेलवे जोन CMS में ब्रेक की फर्जी एंट्री कर लोको पायलटों से 14 घंटे तक काम करवा रहे हैं, जिससे थकान बढ़ रही है और सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।

Last Updated- August 02, 2025 | 4:30 PM IST
Indian railways
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रेलवे में लोको पायलटों के काम के घंटों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) ने आरोप लगाया है कि कई रेलवे जोन सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर लोको पायलटों से तय सीमा से ज्यादा काम करवा रहे हैं। इसके लिए क्रू मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) में फर्जी ब्रेक की एंट्री करके रिकॉर्ड को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। इससे न सिर्फ लोको पायलटों की थकान बढ़ रही है, बल्कि रेलवे की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लोको पायलटों का काम बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। हजारों टन वजनी ट्रेनों को चलाने के लिए उन्हें हर पल चौकन्ना रहना पड़ता है। सिग्नल देखने, ब्रेक लगाने और आपात स्थिति में तुरंत फैसला लेने जैसे कामों में जरा सी चूक भारी पड़ सकती है। लेकिन AILRSA का कहना है कि रेलवे के कुछ जोन पायलटों से 12 से 16 घंटे तक लगातार काम करवा रहे हैं, जबकि नियम के मुताबिक एक लोको पायलट को एक बार में 9 घंटे से ज्यादा और साइन-ऑन से साइन-ऑफ तक कुल 11 घंटे से ज्यादा काम नहीं करना चाहिए।

Also Read: क्या आप भी भारतीय रेल से यात्रा करने वाले हैं? आज से रेलवे ने बदल दिए ये 4 बड़े नियम; जान लें नहीं तो होगी परेशानी

फर्जी ब्रेक की एंट्री, आंकड़े बता रहे हकीकत

AILRSA के मुताबिक, कई रेलवे जोन CMS में गलत तरीके से ब्रेक की एंट्री कर रहे हैं, ताकि यह दिखाया जा सके कि नियमों का पालन हो रहा है। धनबाद डिवीजन में मई-जून 2025 में 2,719 बार गलत ब्रेक की एंट्री के मामले सामने आए। पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर में 1,883, दानापुर में 785, समस्तीपुर में 304 और सोनपुर में 83 ऐसे मामले दर्ज हुए। साउथ सेंट्रल रेलवे के सिकंदराबाद डिवीजन में अप्रैल 2025 में हुई जांच में 545 मामलों में मालगाड़ी के पायलटों से लगभग 14 घंटे तक लगातार काम करवाया गया और CMS में गलत एंट्री करके इसे छिपाया गया।

इन आंकड़ों ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। AILRSA का कहना है कि लोको पायलटों की थकान न सिर्फ उनकी सेहत के लिए खतरा है, बल्कि यह यात्रियों और रेलवे ढांचे की सुरक्षा को भी जोखिम में डाल रही है। एविएशन सेक्टर में पायलटों के लिए सख्त नियम हैं, जहां ड्यूटी और आराम के समय का कड़ाई से पालन होता है। लेकिन रेलवे में लोको पायलटों के साथ ऐसा नहीं है, जबकि उनका काम भी उतना ही जिम्मेदारी भरा है।

ईस्ट सेंट्रल रेलवे (ECR) के धनबाद डिवीजन ने AILRSA की शिकायतों के बाद 15 जुलाई, 2025 को एक सर्कुलर जारी किया। इसमें कहा गया कि CMS में साइन-ऑन और साइन-ऑफ के बीच फर्जी ब्रेक की एंट्री नहीं की जानी चाहिए और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि, रेलवे ने अभी तक यूनियन के बड़े आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।

रेल मंत्रालय का कहना है कि वह लोको पायलटों की स्थिति सुधारने के लिए कदम उठा रहा है। इसमें नए पायलटों की भर्ती, 900 से ज्यादा लोकोमोटिव में यूरिनल की सुविधा और 7,000 से ज्यादा में एयर-कंडीशनिंग शामिल है। साथ ही, देशभर के 558 रनिंग रूम को अपग्रेड किया गया है। लेकिन AILRSA के जनरल सेक्रेटरी अशोक कुमार राउत का कहना है कि ये कदम काफी नहीं हैं। उनके मुताबिक, 15-20 फीसदी स्टाफ की कमी है, जिसके चलते रेलवे प्रबंधन शेड्यूल बनाए रखने के लिए सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहा है। यह सिर्फ कर्मचारियों का मसला नहीं, बल्कि पूरे देश की रेल सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

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First Published - August 2, 2025 | 4:30 PM IST

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