नई दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच शिखर वार्ता के बाद भारत सरकार द्वारा जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य में सैन्य और सैन्य तकनीकी सहयोग का उल्लेख चार पैराग्राफ में है। दस्तावेज में इसे भारत-रूस रणनीतिक संबंधों का स्तंभ बताया गया है।
सैन्य तकनीकी सहयोग, सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष को शामिल करने वाले द्विपक्षीय रिश्तों को वर्ष 2000 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान ‘रणनीतिक’ का औपचारिक स्वरूप दिया गया था और 2021 में इन्हें ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त’ के स्तर पर उन्नत किया गया था। शुक्रवार को दोनों देशों के मीडिया की मौजूदगी में मोदी ने कहा कि पुतिन ने 25 वर्ष पहले रणनीतिक साझेदारी की बुनियाद रखी थी।
शुक्रवार के दस्तावेज में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुई रक्षा संबंधी बातचीत को लेकर कोई विशिष्ट जानकारी नहीं दी गई। पिछले दिनों दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद जारी बयान में भी ऐसा कुछ नहीं कहा गया था। परंतु भाषा में एक बदलाव नजर आया और ‘सह उत्पादन’ को कम से कम भारत के लिए एक लक्ष्य के रूप में सामने रखा गया।
शुक्रवार के संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, ‘भारत के आत्मनिर्भरता के प्रयास की आकांक्षा के प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप, साझेदारी वर्तमान में संयुक्त अनुसंधान और विकास, सह-विकास तथा उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी और प्रणालियों के सह-उत्पादन की ओर दोबारा रुख कर रही है।’
दोनों पक्षों ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में रूसी हथियारों और रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए कलपुर्जे, घटक, एग्रीगेट्स और अन्य उत्पादों के संयुक्त निर्माण को प्रोत्साहित करने पर सहमति प्रकट की। इसके लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उपक्रमों की स्थापना की जाएगी ताकि भारतीय सैन्य बलों की जरूरतों को पूरा किया जा सके और बाद में इन्हें मित्र देशों को निर्यात भी किया जा सके।
पुतिन ने नई दिल्ली में मीडिया से (रूसी दूतावास द्वारा प्रस्तुत अनुवाद में) कहा, ‘रूस और भारत ने परंपरागत रूप से सैन्य तकनीक में घनिष्ठ सहयोग बनाए रखा है। आधी सदी से भी अधिक समय से हमारा देश भारतीय सशस्त्र बलों को सुसज्जित करने और उनका आधुनिकीकरण करने में सहायता करता रहा है। इसमें हवाई रक्षा, विमानन और नौसेना शामिल हैं।’
दोनों नेताओं ने गुरुवार को आयोजित भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग संबंधी बैठक के परिणामों का स्वागत किया। इसकी सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोउसॉव ने की। हालांकि, किसी विशिष्ट परिणाम का उल्लेख नहीं किया गया। सिंह ने कहा था कि भारत स्थानीय रक्षा उत्पादन और निर्यात के लिए घरेलू स्तर पर निर्माण करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने कहा कि पुतिन की यात्रा से पहले कोई बड़ा रक्षा समझौता घोषित नहीं किया गया था, लेकिन भारतीय सैन्य सूत्रों ने कहा था कि भारत रूस से अतिरिक्त एस-400 मिसाइल सिस्टम हासिल करने पर चर्चा कर सकता है। इसके अलावा, 2018 में भारत द्वारा रूस से 5.43 अरब डॉलर में अनुबंधित पांच बैटरियों में से दो बैटरियों में यूक्रेन युद्ध के कारण देरी हो रही है और इनके 2026-27 तक मिलने की उम्मीद है।
शुक्ला ने कहा कि अगर भविष्य में यदि भारत रूसी निर्मित एस-500 मिसाइल सिस्टम लेने पर सहमत होता है, जो मौजूदा एस-400 सिस्टम की तुलना में अधिक कवरेज प्रदान करेगी और जिसे भारत ने मई में पाकिस्तान के साथ चार दिवसीय संघर्ष में प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया था, तो एस-500 का सह-उत्पादन भारत में होना चाहिए।
स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के अनुसार, भारत का रूस से रक्षा आयात 2009-2013 के दौरान 76 प्रतिशत से घटकर 2019-23 के दौरान 36 प्रतिशत रह गया है।