Farmers Protest
Farmers Protest 2.0: किसानों का ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन का आज यानी शनिवार को पांचवां दिन है। किसान पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसान आंदोलन को देखते हुए दिल्ली के कई बॉर्डर को सील कर दिया गया है। साथ ही किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड्स, कंक्रीट ब्लॉक, लोहे की कीलें और कंटेनरों की दीवार लग रखी हैं।
इस आंदोलन में किसानों ने सरकार के सामने न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price-MSP) की गारंटी के अलावा कई और मांगे भी रखी हैं, जिसमें ऋण माफी (Loan Waiver)भी शामिल है।
आसान भाषा में बताएं तो MSP का मतलब है न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), जो कि फसल की एक गारंटीड प्राइस होती है, जो किसान को मिलती है। इसमें फसल की बुआई के दौरान उसकी न्यूनतम कीमत फिक्स कर दी जाती है। वहीं, अगर फसल की कीमत बाजार के हिसाब से कम हो जाती है तो भी केंद्र सरकार एमएसपी पर ही किसानों से फसल खरीदती है जिससे कि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
बता दें कि केंद्र सरकार हर साल खरीफ और रबी सीजन (Kharif and Rabi season) से पहले ही 24 फसलों के लिए एमएसपी जारी करती है। यह सूची कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी CACP की सिफारिशों के आधार पर जारी की जाती है। बता दें कि पहली बार एमएसपी रेट 1966-67 में लागू की गई थी।
इन फसलों में अनाज, मोटे अनाज और दालें जैसे खाद्यान्न शामिल हैं। इसमें से 14 खरीफ फसलों जैसे बाजरा, रागी, मक्का, अरहर, धान, ज्वार, मूंग, उड़द, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन, तिल, नाइजरसीड (रामतिल) और कपास के लिए होती है। वहीं, 10 रबी फसलों के लिए एमएसपी दी जाती है, जिसमें गेहूं, जौ,कुसुम, टोरिया, चना, मसूर, सरसों, और अन्य फसलें, कोपरा, भूसी रहित नारियल और जूट शामिल हैं।
ऋण माफी (Loan Waiver)तब की जाती है, जब लोन लेने वाला शख्स किसी हालात में कर्जा चुकाने में असमर्थ हो। ऐसे में उसके द्वारा लिए गए लोन की पूरी राशि को पूरी तरह से माफ कर दिया जाता है।
कांग्रेस सरकार ने साल 2008 में देशभर के किसानों का 60 हजार करोड़ से ज्यादा का लोन माफ किया था। चुनाव प्रचार के दौरान कई राजनीतिक पार्टियां लोन माफ करने के वादे करती दिखती हैं।
किसान संगठनों की यह भी मांग है कि फसल को लागत से 50 फीसदी के हिसाब से खरीदा जाए। किसानों का ऐसा मानना है कि अगर फसल को लागत से 50 प्रतिशत ज्यादा पर खरीदा जाएगा तो उनकी स्थिती में सुधार आएगा। इसके अलावा, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग भी कर रहे हैं।
किसानों की मांग है कि भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर निकाला जाए। साथ ही कृषि वस्तुओं, दूध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाया जाए। इसके अलावा, 2021 में 3 कृषि कानूनों को लेकर किसानों ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान हजारों की संख्या में किसानों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। किसानों की मांग है कि इन सभी दायर मुकदमों को वापस लिया जाए।