India US Trade Deal
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका ने आपसी और संतुलित व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। इसे भविष्य में होने वाले भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। इस पहल की नींव फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुरू हुई व्यापार वार्ताओं से पड़ी थी।
यह अंतरिम समझौता एक ब्रिज डील की तरह काम करेगा, जिससे दोनों देशों को तुरंत कुछ व्यापारिक लाभ मिल सकें, जबकि व्यापक और कानूनी रूप से बाध्यकारी पूर्ण व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रहेगी। प्रस्तावित बीटीए में वस्तुओं के व्यापार के साथ-साथ सेवाएं, सप्लाई चेन और डिजिटल ट्रेड जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा।
इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक उत्पादों और कई खाद्य व कृषि उत्पादों पर शुल्क खत्म या कम करेगा। इनमें पशु आहार में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद, ड्राय फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे कई सामान शामिल होंगे।
इसके अलावा, भारत अमेरिकी मेडिकल डिवाइस, आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) उत्पादों और कृषि वस्तुओं के लिए लंबे समय से चली आ रही गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर भी सहमत हुआ है।
अमेरिका फिलहाल भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लागू रखेगा, लेकिन अंतरिम समझौते के सफलतापूर्वक लागू होने के बाद कई प्रमुख भारतीय उत्पादों पर यह शुल्क हटाने का रास्ता खुलेगा।
इसमें जेनरिक दवाएं, हीरे-जवाहरात, विमान और विमान के पुर्जे जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कुछ पुराने शुल्क भी हटाए जाएंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।
समझौते के तहत भारत को ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए विशेष टैरिफ कोटा मिलेगा। वहीं, फार्मा सेक्टर में अमेरिकी जांच के नतीजों के आधार पर जेनरिक दवाओं को लेकर अलग से सहमति बनाई जाएगी।
दोनों देश तकनीकी उत्पादों, खासकर डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले जीपीयू और उन्नत तकनीक के व्यापार और सहयोग को भी बढ़ाएंगे।
भारत और अमेरिका एक-दूसरे को प्राथमिकता के आधार पर बाजार पहुंच देने पर सहमत हुए हैं। इसके लिए ऐसे रूल्स ऑफ ओरिजिन तय किए जाएंगे, जिससे समझौते का लाभ मुख्य रूप से दोनों देशों को ही मिले।
इसके साथ ही, तकनीकी मानकों और टेस्टिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी चर्चा होगी, ताकि व्यापार में आसानी हो सके।
भारत अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान, कीमती धातु, तकनीक और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा रखता है।
डिजिटल व्यापार को लेकर भी दोनों देश भेदभावपूर्ण नीतियों को खत्म करने और मजबूत नियम बनाने पर सहमत हुए हैं।
दोनों देश इस अंतरिम ढांचे को जल्द लागू करने और इसके आधार पर पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे। माना जा रहा है कि यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा और वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों की भूमिका को और मजबूत करेगा।