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UPI पेमेंट होगा और भी सुरक्षित: धोखाधड़ी रोकने के लिए RBI ला रहा है कड़े सुरक्षा नियम

यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और रियल-टाइम भुगतान के जरिये भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लिए यह मुफ्त है

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अजिंक्या कवाले   
Last Updated- February 07, 2026 | 1:11 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डिजिटल भुगतान में सुविचारित सुरक्षा उपाय लागू करने के लिए विमर्श पत्र जारी करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें वरिष्ठ नागरिकों जैसे लोगों को धीरे-धीरे राशि जारी करने और अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन जैसे उपाय शामिल होंगे। इस कदम का मकसद धोखाधड़ी कम करना और ग्राहक सुरक्षा मजबूत करना है।

आरबीआई ने विकास और नियामकीय नीतियों पर एक बयान में कहा, ‘डिजिटल भुगतान को सुरक्षित तरीके से बढ़ावा देने के उद्देश्य के अनुरूप एक चर्चा पत्र जारी करने का प्रस्ताव है जिसमें डिजिटल भुगतान में सुविचारित सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकते हैं, जैसे किस्तों में धन जारी करना, वरिष्ठ नागरिकों जैसे कुछ खास लोगों के अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन आदि।’

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) संवाददाता सम्मेलन के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत के रियल-टाइम डिजिटल भुगतान तंत्र- यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को बनाए रखने और बेहतर बनाने का एक स्थायी तरीका तलाशा जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी छूट दर (एमडीआर) पर कोई भी फैसला सरकार के अधिकार क्षेत्र में है।

उन्होंने कहा, ‘किसी को तो यूपीआई चलाने के खर्च का भुगतान करना होगा। फिर भी यह मामला सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम न केवल इसे बनाए रखने, बल्कि इस बेहद महत्त्वपूर्ण भुगतान बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का तरीका ढूंढ लेंगे जो आने वाले वर्षों में बहुत खास होगा, और हम इसे और बेहतर बनाएंगे।’ 

मल्होत्रा ने आगे कहा कि ग्राहकों और संबंधित हितधारकों को मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए। फिलहाल यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर एमडीआर शून्य है। इसका मतलब है कि इन डिजिटल भुगतानों को प्रसंस्कृत करने का खर्च बैंकों और वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को उठाना पड़ता है। 

यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और रियल-टाइम भुगतान के जरिये भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लिए यह मुफ्त है। वित्त वर्ष 2027 में केंद्रीय बजट के तहत 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें अगर बदलाव नहीं होता है तो यह वित्त वर्ष 2026 से 9 प्रतिशत की गिरावट होगी।

केंद्र सरकार के कम वैल्यू वाले भीम-यूपीआई पीयर-टू-मर्चेंट (पी2एम) और रूपे डेबिट कार्ड लेनदेन को बढ़ावा देने की प्रोत्साहन योजना के तहत वित्त वर्ष 2026 के लिए 2,196.21 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जो वित्त वर्ष 2025 के 1,922.77 करोड़ रुपये की तुलना में 14.22 प्रतिशत की वृद्धि है।

First Published : February 7, 2026 | 1:11 PM IST