प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि जिन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) को सार्वजनिक पूंजी उपलब्ध नहीं है और जिनका ग्राहकों से सीधा संपर्क नहीं है तथा जिनकी संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें आरबीआई के साथ पंजीकरण से छूट दी जाएगी। इस कदम का मकसद इन कंपनियों के लिए अनुपालन आवश्यकताओं को कम करना है। केंद्रीय बैंक ने कुछ एनबीएफसी के लिए 1,000 से अधिक शाखाएं खोलने से पहले अनुमति लेने की आवश्यकता को भी खत्म करने का प्रस्ताव रखा।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को कहा, ‘उनकी विशेष संरचना को देखते हुए, इन एनबीएफसी पर वर्तमान में लागू नियमों की समीक्षा की गई है। एनबीएफसी की वित्तीय प्रणाली में जोखिम की संभावना कम है, उसे ही ध्यान में रखते हुए, यह प्रस्ताव दिया गया है कि 1,000 करोड़ रुपये से कम संपत्ति वाले टाइप-1, एनबीएफसी को कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक में पंजीकरण कराने से बरी किया जा सकता है।’
ये उपाय छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और उसकी क्षमता को जोखिम में डाले बिना कुशलतापूर्वक काम करने में मदद करने के लिए आरबीआई की एक बड़ी योजना का हिस्सा हैं। साथ ही, केंद्रीय बैंक यह भी ध्यान रखेगा कि अर्थव्यवस्था में नकदी की उपलब्धता और ऋण का प्रवाह सही बना रहे।
इसके अलावा, एनबीएफसी-आईसीसी पर लागू होने वाले सभी नियमों और संचालन के तरीकों को ध्यान में रखते हुए, आरबीआई ने यह प्रस्ताव रखा है कि ऐसी एनबीएफसी को शाखाएं खोलने से पहले अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। हितधारकों से राय लेने के लिए जारी किए गए मसौदे में, आरबीआई ने कहा, ‘एनबीएफसी को आम तौर पर आरबीआई से पहले अनुमति लिए बिना शाखाएं खोलने की अनुमति होती है, जब तक कि इस पर कोई विशेष प्रतिबंध न लगाया गया हो।’ इस बारे में हितधारकों की राय 27 फरवरी, 2026 तक आमंत्रित की गई है।