भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा | फोटो: PTI
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने आज सर्वसम्मति से रीपो दर को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। साथ ही कहा कि वह मौद्रिक नीति की भविष्य की दिशा तय करने में नई श्रृंखला पर आधारित आंकड़े आने का इंतजार करेगी। समिति ने नीति का रुख भी ‘तटस्थ’ रखा है। रुख में किसी तरह का बदलाव नहीं करने के निर्णय का समर्थन एक को छोड़कर सभी सदस्यों ने किया। राम सिंह ने उदार रुख का समर्थन किया।मुद्रास्फीति के अनुकूल रहने के साथ वृद्धि को समर्थन देने के लिए पिछले साल फरवरी से अभी तक रीपो दर 125 आधार अंक कम की जा चुकी है।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘घरेलू वृहद आर्थिक हालात की व्यापक समीक्षा के आधार पर समिति का मानना है कि वर्तमान रीपो दर उचित है।’
यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर टिप्पणी करते हुए मल्होत्रा ने कहा, ‘हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार करार से मध्यम अवधि में निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।’
बॉन्ड बाजार निराश दिखा क्योंकि लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए किसी और उपाय की घोषणा नहीं की गई। 10 साल की परिपक्वता वाले बेंचमार्क सरकारी बॉन्डों की यील्ड 9 आधार अंक बढ़कर 6.74 फीसदी हो गई।
भारतीय स्टेट बैंक में समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘बॉन्ड यील्ड में लगभग 10 आधार अंक की वृद्धि हुई, जो जून में मौदिक नीति की घोषणा के बाद सबसे अधिक वृद्धि है। बॉन्ड बाजार को एलसीआर (लिक्विडिटी कवरेज अनुपात) मानदंडों में स्थगन या नरमी जैसी कुछ उदारता की उम्मीद थी।’
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि अनुकूल मुद्रास्फीति के कारण आगे वृद्धि को बढ़ावा देने के उपाय करने की गुंजाइश है। मल्होत्रा ने कहा, ‘नरम मुद्रास्फीति वित्तीय स्थिरता को बनाए रखते हुए वृद्धि को सहारा देने की गुंजाइश प्रदान करती है। हम अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने और वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ हालांकि दर में आगे कटौती की गुंजाइश का कोई उल्लेख नहीं था, जैसा दिसंबर में और उससे पहले की मौद्रिक नीति में दिखी थी।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 6.8 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है।
मल्होत्रा ने कहा, ‘कृषि क्षेत्र की बेहतर संभावनाएं, माल एंव सेवा कर में कटौती के प्रभाव, नरम मुद्रास्फीति, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट और अनुकूल मौद्रिक और वित्तीय स्थितियों जैसे घरेलू कारक आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना जारी रखेंगे।’ आरबीआई ने पूरे वर्ष के लिए अनुमान अप्रैल की मौद्रिक नीति तक स्थगित करने का फैसला किया है क्योंकि नई जीडीपी श्रृंखला महीने के अंत में जारी की जाएगी।
वित्त वर्ष 2026 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति अब पहले के 2.1 फीसदी की तुलना में 2.0 फीसदी रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान 3.9 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए 4 फीसदी से बढ़ाकर 4.2 फीसदी किया गाय है।
वित्त वर्ष 2027 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान भी इस महीने निर्धारित नई श्रृंखला पर आधारित आंकड़े जारी होने के बाद आएगा।
मल्होत्रा ने कहा, ‘अंतर्निहित मुद्रास्फीति का दबाव और भी कम है क्योंकि कीमती धातुओं की कीमत में वृद्धि का प्रभाव लगभग 50 आधार अंक है।’
उम्मीद की जा रही है कि केंद्रीय बैंक दर कटौती चक्र के अंत तक पहुंच गया है। मगर मल्होत्रा ने संकेत दिया कि रीपो दर लंबे समय तक कम रहेगी।
बंधन एएमसी के मुख्य निवेश अधिकारी ( फिक्स्ड इनकम) सुयश चौधरी ने कहा, ‘अभी हम शायद दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की सही स्थिति में हैं, लेकिन अगली चर्चा इस बात पर हो सकती है कि यह कब तक इस स्तर पर बना रहेगा।’ मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 6 से 8 अप्रैल को प्रस्तावित है।