प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी | फाइल फोटो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सीमांत नागालैंड क्षेत्रीय प्राधिकरण (एफएनटीए) के गठन के लिए त्रिपक्षीय समझौता ऐतिहासिक है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति एवं समावेशी विकास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘यह वास्तव में ऐतिहासिक समझौता है, जो विशेष रूप से पूर्वी नागालैंड के विकास को गति प्रदान करेगा।’
केंद्र सरकार ने पूर्वी नागालैंड की मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से सीमांत नागालैंड क्षेत्रीय प्राधिकरण के गठन के वास्ते नागालैंड सरकार और ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि इससे लोगों के लिए अवसरों और समृद्धि के नये द्वार खुलेंगे। यह पूर्वोत्तर में शांति, प्रगति और समावेशी विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’
समझौते पर गुरुवार को नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किया गया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘यह समझौता नागालैंड के छह जिलों- तुएनसांग, मोन, किपहिरे, लोंगलेंग, नोकलक और शमाटोर के लिए सीमांत नागालैंड क्षेत्रीय प्राधिकरण (एफएनटीए) के गठन का मार्ग प्रशस्त करेगा और 46 विषयों के संबंध में एफएनटीए को शक्तियां हस्तांतरित करेगा।’ यह राज्य के भीतर एक नए प्रशासनिक निकाय की लंबे समय से चली आ रही मांग थी, जिसका उद्देश्य पूर्वी नागालैंड की मांगों को पूरा करना है।
इस बीच, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि केंद्र, नागालैंड सरकार और ‘ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन’ (ईएनपीओ) के बीच हुआ त्रिपक्षीय समझौता पूर्वी नागालैंड के मुद्दों को सुलझाने की दिशा में बड़ी सफलता है। खांडू ने सोशल मीडिया मंच पर पोस्ट में कहा, ‘यह समझौता पूर्वी नागालैंड के दशकों पुराने मुद्दों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।’