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क्या AI हमें बेवकूफ बना रहा है? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर हुए रिसर्च के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे

इस साल की शुरुआत में प्रकाशित रिसर्च से पता चला कि "AI टूल के बार-बार उपयोग और क्रिटिकल थिंकिंग क्षमताओं के बीच एक नकारात्मक संबंध है।"

Last Updated- February 15, 2025 | 12:21 PM IST
Artificial Intelligence
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Pixabay

हममें से अधिकतर लोग अपने दिमाग से एक हद तक ही सोच सकते हैं। बिना कागज-कलम या कैलकुलेटर के 16,951 को 67 से विभाजित करने की कोशिश करें। बिना किसी नोट के हफ्तेभर की खरीदारी करने की कोशिश करें। क्या यह संभव है? आपमें से अधिकतर का उत्तर होगा नहीं।

जब हम अपने जीवन को आसान बनाने के लिए इन उपकरणों पर निर्भर होते हैं, तो क्या हम खुद को अधिक बुद्धिमान बना रहे हैं या कम? क्या हमने दक्षता में सुधार के लिए खुद को धीरे-धीरे मूर्खता की ओर धकेल दिया है? यह प्रश्न विशेष रूप से जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक जैसे कि OpenAI की ChatGPT के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिसे आज हर हफ्ते लगभग 300 मिलियन लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। 

हाल ही में, माइक्रोसॉफ्ट और कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के रिसर्चर की एक टीम द्वारा किए गए एक स्टडी के अनुसार, इसका उत्तर संभवतः ‘हां’ हो सकता है। लेकिन पूरी कहानी इससे कहीं अधिक जटिल है। रिसर्चर्स ने इस बात का आकलन किया कि यूजर जनरेटिव AI के अपने क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking) पर प्रभाव को कैसे देखते हैं।

आम तौर पर, क्रिटिकल थिंकिंग का संबंध अच्छी तरह सोचने से होता है। हम ऐसा इस तरह करते हैं कि अपनी सोच की प्रक्रिया को तर्कसंगत मानकों और विधियों से जांचते हैं। इनमें सटीकता, स्पष्टता, गहराई, प्रासंगिकता और तर्क की संगति जैसे मूल्य शामिल हैं।

इसके अलावा, हमारी व्यक्तिगत धारणाएं, संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह और अधूरी या गलत मानसिक प्रतिमान (Mental Models) हमारी सोच की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।

रिसर्चर्स ने अमेरिकी शैक्षिक मनोवैज्ञानिक बेंजामिन ब्लूम और उनके सहयोगियों द्वारा 1956 में विकसित क्रिटिकल थिंकिंग की परिभाषा अपनाई। इसे एक ‘परिभाषा’ की बजाय संज्ञानात्मक कौशल की एक श्रेणी के रूप में देखा जाता है, जिसमें जानकारी को याद रखना, समझना, लागू करना, विश्लेषण करना, संश्लेषण करना और मूल्यांकन करना शामिल है।

लेकिन यह पदानुक्रम (Hierarchy) आधारित मॉडल है, जो यह मानता है कि ‘उच्च-स्तरीय’ कौशल ‘निम्न-स्तरीय’ कौशल पर आधारित होते हैं। यह अवधारणा तर्क और प्रमाण दोनों के आधार पर गलत साबित हो चुकी है। उदाहरण के लिए, मूल्यांकन (Evaluation) एक जटिल प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन यह किसी जांच की शुरुआत भी हो सकती है और कुछ संदर्भों में इसे आसानी से किया जा सकता है।

AI पर अत्यधिक विश्वास से क्रिटिकल थिंकिंग में कमी

इस साल की शुरुआत में प्रकाशित रिसर्च से पता चला कि “AI टूल के बार-बार उपयोग और क्रिटिकल थिंकिंग क्षमताओं के बीच एक नकारात्मक संबंध है।”

नए अध्ययन में इस विचार की और गहराई से जांच की गई। इसमें 319 पेशेवरों (जैसे स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ, शिक्षक और इंजीनियर) को शामिल किया गया, जिन्होंने 936 कार्यों के बारे में बताया, जिन्हें उन्होंने जनरेटिव AI की सहायता से पूरा किया था।

रिसर्च से पता चला कि यूजर काम को पूरा करने में खुद क्रिटिकल थिंकिंग कम विकसित कर पाते हैं, लेकिन सत्यापन और संपादन के दौरान वे अधिक सतर्क होते हैं। उच्च-दांव (High-Stakes) वाले कार्यस्थलों में, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और संभावित गलतियों के डर से यूजर AI के आउटपुट की समीक्षा करते समय अधिक सतर्क रहते हैं।

हालांकि, कुल मिलाकर, प्रतिभागियों ने पाया कि दक्षता में हुई वृद्धि, निगरानी में लगने वाले अतिरिक्त प्रयास से अधिक मूल्यवान है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो लोग AI पर अधिक भरोसा करते हैं, वे आमतौर पर कम क्रिटिकल थिंकिंग दिखाते हैं, जबकि जो लोग खुद पर अधिक भरोसा करते हैं, उनके अंदर अधिक क्रिटिकल थिंकिंग होती है।

इसका अर्थ यह हुआ कि AI का उपयोग करने से किसी व्यक्ति की क्रिटिकल थिंकिंग क्षमताएं कम नहीं होतीं – बशर्ते कि वे पहले से ही मौजूद हों।

क्रिटिकल थिंकिंग विकसित करना

इस स्टडी से यह पता चलता है कि यदि लोग AI का उपयोग करने के बाद भी क्रिटिकल थिंकिंग को बनाए रखते हैं, तो यह उपयोगी हो सकता है। लेखकों ने सुझाव दिया कि AI डेवलपर्स को ऐसे फीचर्स जोड़ने चाहिए, जो यूजर्स को उनकी क्रिटिकल थिंकिंग को सक्रिय रूप से लागू करने के लिए प्रेरित करें।

लेकिन क्या यह पर्याप्त है? क्रिटिकल थिंकिंग न केवल सत्यापन के दौरान, बल्कि AI का उपयोग करने से पहले और उपयोग करते समय भी आवश्यक है – जैसे प्रश्नों और परिकल्पनाओं को तैयार करते समय और AI के आउटपुट में संभावित पूर्वाग्रह और गलतियों की जांच करते समय।

AI आपकी क्रिटिकल थिंकिंग को नुकसान न पहुंचाए, इसके लिए आपको पहले से ही एक क्रिटिकल थिंकर बनना होगा। इसका अर्थ है छिपे हुए पूर्वाग्रहों की पहचान करना, विभिन्न दृष्टिकोणों का मूल्यांकन करना और व्यवस्थित रूप से तर्कशीलता का अभ्यास करना।

जिस तरह चॉक और ब्लैकबोर्ड ने हमें गणित में बेहतर बनाया, क्या जनरेटिव AI हमें क्रिटिकल थिंकिंग में बेहतर बना सकता है? शायद, अगर हम सावधान रहें, तो हम AI का उपयोग खुद को चुनौती देने और अपनी सोच को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। लेकिन तब तक, हमें अपनी क्रिटिकल थिंकिंग को सुधारने के लिए खुद पहल करनी चाहिए – न कि AI को अपने लिए सोचने देना चाहिए।

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

First Published - February 15, 2025 | 12:21 PM IST

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