केरल के वायनाड जिले में मंगलवार तड़के कई जगहों पर भारी बारिश के बाद हुईं भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 93 लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। इस कारण मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बताया कि अभी कई लोग मलबे में दबे होने की आशंका है, इसलिए बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। केरल सरकार ने भूस्खलन में लोगों की मौत के बाद प्रदेश में दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। लोक सभा में विपक्ष के नेता और वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को ही संसद को इस हादसे के बारे में जानकारी दी।
भूस्खलन में मरने वाले 34 व्यक्तियों के शवों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 18 शव मृतकों के परिवारों को सौंप दिए गए हैं । मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पोतुकल में चलियार नदी से 16 शव मिले हैं, इसके अलावा शवों के टुकड़े भी बरामद किए गए हैं। भूस्खलन की घटनाएं मंगलवार तड़के हुईं, जिससे अपने घरों में सो रहे लोगों को बचने का मौका भी नहीं मिल पाया। भूस्खलन ने तबाही के निशान छोड़े हैं। कई मकान जमींदोज हो गए हैं, नदियां उफान पर हैं और कई पेड़ उखड़ गए हैं।
बचाव दल कर रहे तलाश
सेना, नौसेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचाव दल खराब मौसम के बीच पीड़ितों की तलाश कर रहे हैं और पीड़ित लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र के अनुसार, जिले के मेप्पडी के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद कई भूस्खलन हुए हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
सूत्र ने बताया कि बचावकर्मियों को नदियों और कीचड़ से लोगों के अंग बरामद हो रहे हैं, इसलिए इस त्रासदी में मारे गए लोगों की सही संख्या का पता लगाना अभी मुश्किल है। अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन प्रभावित इलाकों में मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टमाला और नूलपुझा गांव शामिल हैं।
केरल सरकार ने भूस्खलन में लोगों की मौत के बाद प्रदेश में दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। मुख्य सचिव वी. वेनू द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना में 30 और 31 जुलाई को राजकीय शोक रहेगा। प्रोटोकॉल के अनुसार, इन दो दिनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी सरकारी कार्यक्रमों को रद्द किया जाएगा।
केरल सरकार ने मांगी मदद
इस बीच, केरल सरकार ने बचाव अभियान में रक्षा बलों की मदद मांगी है। 122 इन्फैंट्री बटालियन (टीए) मद्रास की सेकंड-इन-कमांड के नेतृत्व में 43 कर्मियों की एक टीम को बचाव प्रयासों में सहायता के लिए तैनात किया गया है। रक्षा सुरक्षा कोर (डीएससी) केंद्र, कन्नूर और कोझिकोड से प्रादेशिक सेना के 200 सैनिकों की अतिरिक्त टुकड़ियों, चिकित्सा दलों और उपकरणों को बचाव प्रयासों में लगाया गया है।
फंसे हुए लोगों को तेजी से निकालने के लिए सुलूर के वायु सेना स्टेशन से भारतीय वायु सेना के दो हेलीकॉप्टर को प्रभावित इलाके में भेजा गया है। केरल सरकार के अनुरोध पर एझिमला नौसैन्य अकादमी से नौसेना का एक दल भी बचाव प्रयासों में मदद करेगा।