facebookmetapixel
Advertisement
CBSE ने छात्रों को दी बड़ी राहत: अब सिर्फ ₹100 में होगा रीचेकिंग, अंक बढ़ने पर फीस होगी वापसPM मोदी की नीदरलैंड यात्रा में हुए 17 ऐतिहासिक समझौते, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी पर हुआ सौदाहोर्मुज संकट पर संयुक्त राष्ट्र में भारत ने रखा अपना पक्ष, कहा: जहाजों पर हमला पूरी तरह अस्वीकार्यइबोला के दुर्लभ वायरस ने बढ़ाई पूरी दुनिया की चिंता, WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकालSukhoi Su 57 बन सकता है वायु सेना का ब्रह्मास्त्र! स्क्वाड्रन की भारी कमी के बीच IAF के पास एकमात्र विकल्पवीडियोकॉन समूह को लेकर NCLAT का बड़ा फैसला: दोनों कंपनियों की दिवाला प्रक्रिया अब चलेगी अलग-अलगअंबुजा सीमेंट के विस्तार में देरी पर करण अदाणी ने माना: समूह की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं परियोजनाएंम्यूचुअल फंड में फिर लौटा निवेशकों का भरोसा, कमोडिटी ETF को पछाड़ आगे निकले ऐक्टिव इक्विटी फंडडिजिटल लेनदेन पर अब मिलेगा ‘रिस्क स्कोर’, साइबर ठगी और ‘म्यूल अकाउंट’ पर नकेल कसने की तैयारीरुपये पर दबाव जरूर मगर अभी 100 पार नहीं! जानकारों का दावा: अभी इसकी संभावना न के बराबर

सबसे बुरा दौर अब पीछे छूटा, लेकिन माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के लिए लिक्विडिटी सपोर्ट बेहद जरूरी

Advertisement

लिक्विडिटी की कमी माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, खासकर मौजूदा संकट चक्र में

Last Updated- October 30, 2025 | 6:52 PM IST
Microfinance
मुंबई में आयोजित बीएफएसआई शिखर सम्मेलन में आलोक मिश्रा (एमएफआईएन), डॉ. एचपी सिंह (सैटिन क्रेडिटकेयर), सदाफ सईद (मुथूट माइक्रोफिन) और कार्तिक श्रीनिवासन (आईसीआरए)।

माइक्रोफाइनेंस सेक्टर अपनी हालिया संकट चक्र (stress cycle) से उबरता हुआ नजर आ रहा है, लेकिन इस सुधार की रफ्तार को बनाए रखने के लिए लिक्विडिटी सपोर्ट बेहद जरूरी होगा। मुंबई में आयोजित बिज़नेस स्टैंडर्ड बीएफएसआई इनसाइट समिट 2025 में गुरुवार को उद्योग विशेषज्ञों ने यह बात कही।

सुधार के बावजूद बनी हुई है लिक्विडिटी की चुनौती

‘क्या मौजूदा चक्र में माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए सबसे बुरा दौर खत्म हो गया है?’ विषय पर आयोजित एक पैनल चर्चा में प्रतिभागियों का कहना था कि हालांकि वसूली और उधारकर्ताओं की भुगतान क्षमता में सुधार दिख रहा है, लेकिन नॉन-बैंक लेंडर्स तक फंड का फ्लो अब भी सीमित है।

माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री नेटवर्क (MFIN) के सीईओ आलोक मिश्रा ने चेतावनी दी, “लिक्विडिटी ही सबसे अहम है। अगर यह नहीं मिली, तो अब तक जो गति हासिल हुई है, वह थम सकती है।” माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए यह संगठन एक स्व-नियामक संस्था (SRO) है। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ एक गारंटी मैकेनिज्म बनाने को लेकर बातचीत जारी है, जिससे सेक्टर में भरोसा बढ़ाया जा सके।

मिश्रा ने कहा, “हमने सरकार को 20,000 करोड़ रुपये का एक बड़ा गारंटी फंड बनाने का सुझाव दिया है, जो फंडिंग के ‘वर्चुअस साइकिल’ (सकारात्मक चक्र) को शुरू करेगा और बैंकों को विश्वास देगा। अगर ऐसा हुआ, तो स्थिति और बेहतर हो जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि नए पोर्टफोलियो के लिहाज से “सबसे बुरा दौर अब पीछे छूट चुका है।”

Also Read: CBDC लॉन्च करने की जल्दी नहीं, प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर जारी रहेगा सख्त रुख: RBI डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर

फंडिंग में कमी, बैंकों का सतर्क रुख

लिक्विडिटी की कमी माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, खासकर मौजूदा संकट चक्र में। पैनल के सदस्यों ने कहा कि यह संकट कई मैक्रोइकोनॉमिक व्यवधानों — जैसे बाढ़ और चुनावों — के कारण शुरू हुआ।

सैटिन क्रेडिटकेयर नेटवर्क के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एच. पी. सिंह ने कहा, “जब भी कोई संकट आता है, लिक्विडिटी सूखने लगती है। उधारदाता जोखिम लेने से पीछे हट जाते हैं। लेकिन हमारे लिए तो यही कच्चा माल है। हमें जमा (डिपॉजिट) जुटाने की सुविधा नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “आप बैंकों की स्थिति देखिए — उनके पास विकल्प हैं, इसलिए उन्होंने अपने माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो को घटाना शुरू कर दिया है।”

ICRA में फाइनैंशियल सेक्टर रेटिंग्स के ग्रुप हेड कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा कि बैंकों का सतर्क रुख ज्यादातर चक्रीय (cyclical) है। उन्होंने कहा, “बैंक कुछ भी कर सकते हैं। आज उन्हें लगता है कि इस पोर्टफोलियो में थोड़ा दबाव है, इसलिए वे खुद को रोक रहे हैं। लेकिन शायद जब यह सेक्टर स्थिर हो जाएगा, तब बैंक दोबारा लौट आएंगे।”

स्थिरता के शुरुआती संकेत

फंडिंग की कमी के बावजूद माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में स्थिरता के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं। मुथूट माइक्रोफिन के सीईओ सदाफ सईद ने कहा, “हम पहले से ही इस चक्र में सुधार देख रहे हैं। महंगाई घटने और अच्छी फसल होने के कारण ग्रामीण परिवारों की भुगतान क्षमता बढ़ी है। जैसे-जैसे ऋण वितरण और नकदी प्रवाह सुधरेंगे, वसूली दरें भी बेहतर होंगी।”

श्रीनिवासन ने भी इस राय से सहमति जताते हुए कहा, “हम मानते हैं कि सबसे बुरा समय अब गुजर चुका है। लेकिन सेक्टर के पुराने उच्च स्तर तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। संभवतः इस साल ग्रोथ सिंगल डिजिट में ही रहेगी।”

Also Read: BFSI Summit: तकनीक से बैंकिंग में क्रांति, लेकिन कस्टमर सर्विस में मानवीय जुड़ाव जरूरी: अरुंधति भट्टाचार्य

एसेट ट्रेंड संस्थानों के अनुसार अलग-अलग

मिश्रा ने आगे बताया कि मौजूदा तिमाही में एसेट अंडर मैनजमेंट (AUM) में गिरावट देखी गई है, लेकिन यह स्थिति सभी संस्थानों के लिए समान नहीं है। उन्होंने कहा, “कुछ मध्यम आकार के संस्थानों में तेज गिरावट दर्ज की गई होगी, जबकि मुथूट जैसे संस्थानों पर इसका असर नहीं पड़ा होगा। यह गिरावट चक्र के मंदी वाले दौर में और स्पष्ट हुई है। जब तक लिक्विडिटी नहीं आती, संस्थानों के बीच यह असमानता बनी रहेगी। लेकिन यदि लिक्विडिटी आ गई, तो हालात ऐसे होंगे जैसे उठती लहर सभी नावों को ऊपर ले जाती है।

Advertisement
First Published - October 30, 2025 | 6:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement