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बीमा रकम का 10 फीसदी से कम हो प्रीमियम

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Last Updated- December 10, 2022 | 2:11 AM IST

वरिष्ठ नागरिकों से उनकी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के लिए कम प्रीमियम नहीं लिया जाता। लेकिन उन्हें इससे ज्यादा चिंता इस बात की रहती है कि पॉलिसी नवीकरण के समय बीमा कंपनियां प्रीमियम में कितना इजाफा कर देंगी।
कितना है प्रीमियम
60 साल की उम्र में बीमा राशि के 2.5 फीसदी से लेकर 80 की उम्र में राशि के 9 फीसदी तक प्रीमियम हो सकता है, जिसमें कर शामिल नहीं होते। पॉलिसीबाजार के प्रमुख (स्वास्थ्य कारोबार) अमित छाबड़ा ने कहा, ‘ज्यादातर मामलों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रीमियम बीमा राशि के 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।’
प्रीमियम में काफी अंतर हो सकता है। सिक्योर नाऊ इंश्योरेंस ब्रोकर के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक कपिल मेहता ने कहा, ’75 साल के व्यक्ति के लिए 10 लाख रुपये बीमा की सबसे सस्ती पॉलिसी 27,000 रुपये में और सबसे महंगी पॉलिसी 99,000 रुपये में आती है।’
पॉलिसी के प्रीमियम कवर के दायरे पर निर्भर करते हैं। स्टार हेल्थ ऐंड अलाइड इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक एस प्रकाश ने कहा, ‘देखिए कि पॉलिसी में को-पेमेंट या सब-लिमिट जैसी शर्तें शामिल हैं या नहीं।’ जिन पॉलिसी में इस तरह की शर्तें बहुत कम होती हैं, उनका प्रीमियम ज्यादा होता है।
अगर किसी वरिष्ठ नागरिक को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है तो प्रीमियम अधिक हो सकता है। मेहता ने कहा, ‘अगर आप 75 साल की उम्र में पॉलिसी खरीदते हैं और आपको मधुमेह की गंभीर समस्या है तो बीमा कंपनी इसकी बुनियादी कीमत में 100 से 150 फीसदी इजाफा कर सकती है।’
कितना बढऩा चाहिए प्रीमियम
स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में बदलाव चिकित्सा महंगाई, बीमा कंपनी के दावों के अनुभव आदि पर निर्भर करता है। लेकिन कितनी बढ़ोतरी जायज हो सकती है, जिसके लिए बुजुर्गों को तैया रहना चाहिए? प्रकाश कहते हैं, ‘तीन साल बाद 15 फीसदी बढ़ोतरी मानकर चलिए।’ आंकड़ों से पता चलता है कि 60 से 80 साल की उम्र के बीच पॉलिसी शुरू करने का प्रीमियम ही 4 से 5 फीसदी सालाना बढ़ जाता है।
बीमा सख्त कायदों में बंधा उद्योग है, जहां बीमा कंपनी अपनी मर्जी से प्रीमियम नहीं बढ़ सकतीं। प्रकाश ने कहा, ‘अगर बीमा कंपनी के घाटे का अनुपात एक तय सीमा से ऊपर चला जाता है तभी उसे नियामक के पास प्रीमियम बढ़ाने की अर्जी डालने की इजाजत मिलती है।’
बीमा खरीदारों को कुछ स्थितियों में प्रीमियम में तेजी से बढ़ोतरी का बोझ वहन करना पड़ सकता है। छाबड़ा ने कहा, ‘बैंकों से जारी हुई समूह पॉलिसी का प्रीमियम कई बार एकदम उछल सकता है।’ उन्होंने कहा दूसरी स्थिति वह हो सकती है, जब बीमा कंपनी अपने पॉलिसी उत्पादों के लिए दोबारा आवेदन करती है। छाबड़ा ने कहा, ‘अगर कंपनियों के प्रीमियम अन्य कंपनियों के मुकाबले काफी कम हैं तो उन्हें अपने प्रीमियम में बढ़ोतरी की इजाजत मिल जाती है।’
जब कोई बीमा कंपनी कोई पॉलिसी बंद करती है और ग्राहकों को नई पॉलिसी में स्थानांतरित करती है तो प्रीमियम अधिक तेजी से बढ़ता है। किसी बीमा कंपनी के ग्राहकों की संख्या का भी प्रीमियम बढऩे की रफ्तार पर असर पड़ता है। प्रकाश ने कहा, ‘बड़ी कंपनियां अपने घाटे को ठीक से संभाल सकती हैं और प्रीमियम में अधिक बढ़ोतरी किए बिना बीमा मुहैया करा सकती हैं।’
आपके पास क्या है चारा
अगर आपके पास महंगी पॉलिसी है तो इसे पोर्ट करें। लेकिन क्या वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोर्ट करना लगभग नामुमकिन नहीं है? छाबड़ा ने कहा, ‘अब नहीं। हाल में हमने 90 साल के एक व्यक्ति को उप-सीमाओं वाली पॉलिसी छोड़कर ज्यादातर व्यापक कवर मुहैया कराने वाली पॉलिसी चुनने में मदद की है।’ हां, अगर वरिष्ठ नागरिक को कोई बड़ी या गंभीर बीमारी है तो पॉलिसी पोर्ट करना मुश्किल हो जाता है।
वरिष्ठ नागरिक को-पेमेंट और कटौती के विकल्प चुनकर अपना पॉलिसी प्रीमियम घटा सकते हैं। लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं होगा। मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी प्रसून सिकदर कहते हैं, ‘यह सुनिश्चित करें कि पॉलिसी ज्यादा से ज्यादा बीमारियों के लिए कवर मुहैया कराए और कम से कम बीमारी इससे बाहर हों।’ आखिर में केवल बीमा पर ही निर्भर न रहें। बेशक डॉट ओआरजी के संस्थापक महावीर चोपड़ा ने कहा, ‘युवावस्था से ही अपनी सेहत के लिए रकम जोडऩा शुरू कर दें।’

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First Published - January 3, 2021 | 11:47 PM IST

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