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एनबीएफसी के सामने बढ़ी ऋण लागत की चुनौती

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बजाज फाइनैंस को भी अपने सभी खुदरा और एसएमई कारोबार में परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव का सामना करना पड़ा।

Last Updated- November 03, 2024 | 10:52 PM IST
Lending from banks to NBFCs slowed down, service and vehicle loans also affected बैंकों से एनबीएफसी को ऋण हुआ सुस्त, सेवा और वाहन ऋण पर भी असर

प्रमुख गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में बीती तिमाही की तुलना में बढ़ती उधारी लागत और गिरती संपत्ति गुणवत्ता का सामना करना पड़ा। इसका प्रमुख कारण नकदी प्रवाह में बाधा और सूक्ष्म वित्त सहित असुरक्षित खंड की चुनौतियां थीं। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज (एमऐंडएम फाइनैंस) का वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में सकल चरण 3 की परिसंपत्तियां 3.83 फीसदी थीं और यह वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही के 3.60 फीसदी से 20 आधार अंक अधिक थीं।

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्याधिकारी राउल रेबेलो ने नतीजों के बाद बातचीत में कहा, ‘सकल चरण 3 में 40 फीसदी वृद्धि ट्रैक्टर खंड से आई है। हमें ज्यादातर दिक्कतों का सामना कृषि पर आधारित राज्यों में करना पड़ा है। इन राज्यों में नकदी का प्रवाह बाधित हुआ है। नकदी प्रवाह का मुद्दा केवल कृषि क्षेत्र में ही नहीं है बल्कि सीवी ग्राहक खंड को भी दूसरी तिमाही में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इन सबका असर हमारी संग्रह क्षमता पर पड़ा।’

हालांकि बट्टे खाते में डालने (राइट ऑफ) के कारण एलऐंडटी फाइनैंस की परिसंपत्ति गुणवत्ता व्यापक रूप से स्थिर रही। कंपनी की सकल चरण 3 गुणवत्ता थोड़ी सी बढ़कर 3.19 फीसदी हो गई जबकि यह वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में 3.14 फीसदी थी। एलऐंडटी के मुख्य वित्तीय अधिकारी सचिन जोशी ने नतीजों के बाद बातचीत में स्वीकारा कि राइट ऑफ से  चरण् 2 और चरण 3 की परिसंप​त्तियों में बढ़ोतरी को कम करने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा, ‘ सकल चरण 3 परिसंप​त्तियों में क्षरण मुख्य रूप से ग्रामीण व्यापार वित्त क्षेत्र में बिगड़ते वृहद परिचालन वातावरण, ट्रैक्टर रीपो नीति को तर्कसंगत बनाने और दोपहिया वाहन व्यवसाय में कुछ स्थानीय सहवर्ती कार्यक्रम के कारण हुई। हां, माइक्रोफाइनैंस खंड में निश्चित रूप से बाहरी चुनौतियां हैं, लेकिन यह कुल बहीखाते के करीब 26 फीसदी पर ही है।’

बजाज फाइनैंस को भी अपने सभी खुदरा और एसएमई कारोबार में परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव का सामना करना पड़ा। इससे कंपनी के ऋण हानि प्रावधान ऊंचे बने रहे। ऋणदाता की दूसरी तिमाही में चरण 2 में परिसंपत्तियां घटकर 357 करोड़ रुपये हो गईं लेकिन चरण 3 में संपत्तियां बढ़कर 899 करोड़ रुपये हो गई। इससे चरण 2 और 3 में परिसंपत्तियों में शुद्ध 542 करोड़ रुपये की बढ़त हुई। इसके अलावा प्रबंधन ने वित्त वर्ष 25 में उधारी लागत अनुमान 2-2.05 फीसदी की वृद्धि की जबकि यह पहले 1.75-1.85 फीसदी थी।

पीरामल एंटरप्राइजेज ने कारोबारी ऋण के असुरक्षित पोर्टफोलियो और 50,000 रुपये से कम के खंड में उच्च जोखिम वाले क्षरण की बात स्वीकारी है। कंपनी की सकल गैर निष्पादित संपत्तियां (जीएनपीए) बढ़कर 3.1 फीसदी हो गईं जबकि यह वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में 2.7 फीसदी थीं।

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First Published - November 3, 2024 | 10:52 PM IST

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