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यील्ड बढ़ी, डील टूटी: IRFC ने ₹5,000 करोड़ का बॉन्ड इश्यू रद्द किया

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10 साल के जीरो कूपन बॉन्ड पर निवेशकों ने 6.95% कट-ऑफ मांगा, पिछले इश्यू से 16 आधार अंक ज्यादा

Last Updated- December 16, 2025 | 8:23 AM IST
bond yield

सरकार के उपक्रम इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) ने सोमवार को 10 साल के जीरो कूपन बॉन्ड (जेडसीबी) जारी करके 5,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना रद्द कर दी है। सूत्रों ने कहा कि अधिक यील्ड पर निवेशकों से बोली मिलने के कारण आईआरएफसी ने यह फैसला किया है।

आईआरएफसी घरेलू और विदेशी पूंजी बाजारों से धन जुटाने के लिए भारतीय रेलवे की समर्पित वित्त शाखा है। इसे 6.95 प्रतिशत कट ऑफ पर बोलियां मिलीं, जो कि पिछले महीने के बॉन्ड की दरों से 16 आधार अंक अधिक था। पिछले महीने आईआरएफसी ने 6.79 प्रतिशत की आकर्षक यील्ड पर डीप डिस्काउंटेड जेडसीबी के माध्यम से 2,981 करोड़ रुपये जुटाए थे।

सूत्रों ने कहा सरकारी संस्था पिछले बॉन्ड की दर पर ही धन जुटाना चाहती थी, लेकिन निवेशक उच्च कट ऑफ चाहते थे। इसकी वजह से आईआरएफसी ने इश्यू को रद्द करने का फैसला किया। आईआरएफसी के जेडसीबी का बेस इश्यू का आकार 1,000 करोड़ रुपये और ग्रीन शू ऑप्शन 4,000 करोड़ रुपये का था।

जेडसीबी ऋण जुटाने का एक साधन है। इसमें समय समय पर ब्याज नहीं भुगतान होता है। इसके बजाय इसे एक डीप डिस्काउंट पर जारी किया जाता है और मेच्योरिटी पर इसके पूर्ण अंकित मूल्य पर भुनाया जाता है। इसमें खरीद मूल्य और मेच्योरिटी के मूल्य के बीच का अंतर का मुनाफा होता है।

रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘नवंबर में जेडसीबी इश्यू को मिली प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर आईआरएफसी ने रिजर्व बैंक द्वारा रीपो रेट में कटौती किए जाने की घोषणा के तुरंत बाद 5,000 करोड़ रुपये के जेडसीबी इश्यू के साथ मुश्किल से 20 दिनों के भीतर बाजार में आया। हालांकि, बॉन्ड बाजार की कहानी बदल गई है। रीपो रेट में 25 आधार अंक कटौती के बावजूद लंबे समय का यील्ड नरम नहीं हुआ। रुपये के लगातार कमजोर होने, अमेरिका के साथ शुल्क का मसला न सुलझने, एफपीआई की सुस्त भागीदारी और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर दीर्घावधि बॉन्ड जारी किए जाने से 10 साल के जी-सेक पर दबाव बना रहा।’

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First Published - December 16, 2025 | 8:15 AM IST

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