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Insurance Sector में 100% FDI पर बड़ी खबर, संसद के मानसून सत्र में पेश हो सकता है बीमा संशोधन विधेयक

बीमा अधिनियम, 1938 में कई संशोधन प्रस्तावित हैं, जिनमें FDI लिमिट बढ़ाना, पेड-अप कैपिटल में कमी, कंपोजिट लाइसेंस का प्रावधान शामिल है।

Last Updated- April 27, 2025 | 8:37 PM IST
Increase term insurance if dependents and responsibilities increase आश्रित और जिम्मेदारी बढ़े तो टर्म बीमा में इजाफा करें
प्रतीकात्मक तस्वीर

सूत्रों के मुताबिक, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रस्ताव करने वाला बीमा संशोधन विधेयक आगामी मानसून सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि ड्राफ्ट विधेयक तैयार हो चुका है और जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग (DFS) संसद में विधेयक पेश करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। सरकार का लक्ष्य इस विधेयक को जुलाई में शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश करने का है।

बजट में किया गया था एलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वर्ष के बजट भाषण में बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश सीमा को वर्तमान 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था, “यह बढ़ी हुई सीमा उन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी जो संपूर्ण प्रीमियम भारत में निवेश करेंगी। विदेशी निवेश से जुड़े मौजूदा नियमों और शर्तों की समीक्षा कर उन्हें सरल बनाया जाएगा।”

कई अहम संशोधन प्रस्तावित

वित्त मंत्रालय ने बीमा अधिनियम, 1938 में कई संशोधन प्रस्तावित किए हैं, जिनमें एफडीआई सीमा बढ़ाना, पेड-अप कैपिटल में कमी और कंपोजिट लाइसेंस का प्रावधान शामिल है। विधेयक में बीमा एजेंटों को एक से अधिक बीमा कंपनियों के उत्पाद बेचने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है, जिससे मौजूदा एक्सक्लूसिविटी मॉडल खत्म होगा।

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LIC और IRDAI कानूनों में भी बदलाव

इस व्यापक विधायी कवायद के तहत जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 में भी संशोधन किए जाएंगे। एलआईसी अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के तहत कंपनी के बोर्ड को शाखा विस्तार और भर्ती जैसे परिचालन निर्णय लेने के अधिक अधिकार दिए जाएंगे।

विधेयक का उद्देश्य

प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य पॉलिसीहोल्डर्स के हितों की रक्षा करना, उनकी वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाना और बीमा क्षेत्र में अधिक कंपनियों के प्रवेश को प्रोत्साहित करना है, जिससे आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। इन बदलावों से बीमा उद्योग की दक्षता बढ़ेगी, कारोबार करने में आसानी होगी और ‘2047 तक सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

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बीमा क्षेत्र का मौजूदा परिदृश्य

बीमा अधिनियम, 1938 भारत में बीमा क्षेत्र के लिए प्रमुख विधायी ढांचा प्रदान करता है। यह बीमा व्यवसाय के संचालन और बीमाकर्ता, उसके पॉलिसीधारक, शेयरधारक और नियामक IRDAI के बीच संबंधों को नियंत्रित करता है। वर्तमान में भारत में 25 जीवन बीमा कंपनियां और 34 जनरल (नॉन-लाइफ) बीमा कंपनियां हैं, जिनमें एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड और ECGC लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं।

सरकार ने बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा को 2015 में 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किया था और फिर 2021 में इसे 74 प्रतिशत तक बढ़ाया था। अब प्रस्तावित संशोधनों के जरिये इसे 100 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा, जिससे देश में बीमा कवरेज और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

(एजेंसी इनपुट के साथ) 

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First Published - April 27, 2025 | 8:37 PM IST

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