facebookmetapixel
Advertisement
देश में अंतरिक्ष सेवाओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण मोड़, स्काईरूट एरोस्पेस की ऐतिहासिक उपलब्धिसोनम वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने से हाईकोर्ट का इनकार, ‘चलो संसद’ मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ीमॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का वॉकआउट! कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारीकच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सुधरेगा चालू खाता घाटा, अर्थशास्त्रियों ने FY27 का अनुमान घटाया₹35,000 करोड़ के कर्ज पर वोडाफोन आइडिया की उम्मीद कायम, प्रवर्तकों से अतिरिक्त भरोसे का इंतजारQ1 नतीजों की दमदार शुरुआत, कंपनियों की आय, मुनाफा दो अंक में बढ़ेमॉनसून सत्र में SMC विधेयक पर बाजार की नजर, दिग्गज निवेशकों के दांव से मिडकैप शेयरों में तेजीइक्विटी फंड्स में सकल निवेश ₹4 लाख करोड़ के पार, NFO कलेक्शन में बड़ी गिरावटरिलायंस के जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर, O2C और जियो कारोबार ने दिखाई दमदार बढ़तITR Filing 2026: जांचें, परखें और फिर चुनें अपने लिए सही आयकर रिटर्न फॉर्म

RBI की रिपोर्ट में खुलासा: भारत का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत, लेकिन पूंजी जुटाने में आएगी चुनौती

Advertisement

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से बदलते वैश्विक माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है और निकट भविष्य का परिदृश्य भी सकारात्मक बना हुआ है

Last Updated- December 29, 2025 | 11:03 PM IST
Rupees
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और फंसा हुआ कर्ज 10 साल के निचले स्तर पर है। बैंकों में पूंजी भी दमदार बनी हुई है मगर उन्हें गैर-बैंक स्रोतों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। ये बातें आज जारी भारतीय रिजर्व बैंक की ‘प्रवृत्ति और प्रगति रिपोर्ट 2024-25’ में कही गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से बदलते वैश्विक माहौल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है और निकट भविष्य का परिदृश्य भी सकारात्मक बना हुआ है। महंगाई भी कई साल के निचले स्तर पर आ गई है।

रिपोर्ट के अनुसार दमदार बैलेंस शीट, लगातार मुनाफे, बेहतर होती संपत्ति की गुणवत्ता और उच्च पूंजी बफर की वजह से भारत का बैंकिंग क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों की लाभप्रदता मजबूत बनी रही जिसमें परिसंपत्ति पर रिटर्न 1.4 फीसदी और इक्विटी पर रिटर्न 13.5 फीसदी रहा। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में वाणिज्यिक बैंकों का परिसंपत्ति पर रिटर्न 1.3 फीसदी और इक्विटी पर रिटर्न 12.5 फीसदी रहा। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘आगे बैंकों को वाणिज्यिक क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए गैर-बैंक स्रोतों से कड़ा मुकाबला करना पड़ेगा।’

वाणिज्यिक बैंकों को संसाधन जुटाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि ऋण वृद्धि जमा वृद्धि से ज्यादा हो गई है। इससे बैंकिंग क्षेत्र में ऋण-जमा अनुपात 80 फीसदी के पार पहुंच गया है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि तेजी से बदलती तकनीक और डिजिटलीकरण से लोग अपनी बचत और ऋण की जरूरतों के लिए बैंकों के साथ लेनदेन करने का तरीका बदल सकते हैं।

इसके  साथ ही बैंकिंग तंत्र को साइबर खतरों सहित नए जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। बैंकों से जोखिम का आकलन मजबूत करने का आग्रह करते हुए रिजर्व बैंक ने कहा कि भरोसेमंद प्रौद्योगिकी को अपनाकर परिचालन कुशलता में सुधार लाना बेहद जरूरी है। साथ ही वित्तीय समावेशन, उपभोक्ता शिक्षा और सुरक्षा पर लगातार जोर दिया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘शिक्षा ऋण और होम लोन की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ, जबकि मार्च 2025 के आखिर में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, क्रेडिट कार्ड और वाहन ऋण श्रेणियों में परिसंपति गुणवत्ता कमजोर हो गई।’ बिना रेहन वाले ऋण में विदेशी बैंकों का सबसे अधिक हिस्सा बना रहा। एनबीएफसी ने भी दमदार प्रदर्शन किया।

Advertisement
First Published - December 29, 2025 | 11:03 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement