लंबे समय तक ठहराव के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में तेजी आने के बाद धीरे-धीरे मकान की कीमतें बढ़ने लगी है। जो लोग घर खरीदने का विचार कर रहे हैं, वह वर्तमान कीमतों पर पैसा लगाने का दबाव महसूस कर रहे है। साथ ही महंगाई घरेलू बजट को बढ़ा रही है। आवास ऋण पर ब्याज दर भी बढ़ रही है। वैवाहिक व्यक्ति के माता-पिता भी घर खरीदने और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए दबाव बना रहे है। ऐसे में जो लोग घर खरीदने और किराये पर घर लेने की दुविधा में फसे है। उनके लिए हम एक रोडमैप लेकर आए है।
रहने का विचार है, तो घर खरीदें
मनीएडस्कूल के संस्थापक अर्णव पांड्या कहते हैं, ‘यदि आप शहर बदलने का विचार नहीं कर रहे हैं और घर लेने के लिए आपके पास पैसा है तो आपको घर खरीद लेना चाहिए।’
आप घर खरीदने में समर्थ है या नहीं, यह जांचने के लिए आप कुछ बातों पर विचार कर सकते है। जैसे कि डाउन पेंमट करने के लिए आपके पास कितने रुपये हैं और आप कितना उधार ले सकते है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर के मुख्य आर्थिक सलाहकार विशाल धवन कहते हैं, ‘एक परिवार की कुल ईएमआई घर में आने वाले वेतन के 40-50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए।’ इसके बाद, आप यह देखें कि आपने बजट के अनुसार आप किस क्षेत्र में घर खरीद सकते हैं। पांड्या कहते हैं, ‘घर आपके कार्यस्थल या रिश्तेदारों से अधिक दूर नहीं होना चाहिए ताकि आना-जाना आपके लिए एक भयावह सपना न बन जाएं। इसके साथ ही आपको यह भी देखना चाहिए कि बच्चों के स्कूल, कॉलेज घर से ज्यादा दूर न हो।’
फाइनैंशियल कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें
आजकल, बाजार में कुछ फाइनैंशियल कैलकुलेटर आ गए है जो आपको यह निर्णय लेने में मदद कर सकते है कि घर खरीदना चाहिए या फिर किराये पर लेना चाहिए। ऐसा ही नियो बैंक का एक उपकरण ‘फी’ है। अर्थयंत्र भी एक ऐसा ही उपकरण है जो आपको निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
दो स्थितियों में ‘फी’ आपको कुल मूल्य की गणना करने में मदद कर सकता है। पहली स्थिति, जब आप एक समयावधि (10 से 30 साल) में उधार लेकर एक घर खरीदने का विचार कर रहे हैं। घर के मूल्य की गणना के लिए यह कैलकुलेटर पूछता है कि आप किस शहर में घर खरीदना चाहते है। इसके बाद नैशनल हाउसिंग बैंक के डेटा का इसतेमाल करके कैलकुलेटर आपको घर का आधार मूल्य बताता है। आप बाजार की स्थिति को देखते हुए अपने हिसाब से आधार मूल्य में बदलाव करके भी देख सकते हैं।
दूसरी स्थिति, जब आप किराये के घर में रहने का निर्णय लेते है और अपनी बचत को समान अवधि (10 से 30 साल) के लिए निवेश करने का विचार करते हैं। कैलकुलेटर कम, मध्यम और अधिक जोखिम उठाने वाले निवेशक के रुप में आपको मिलने वाले निवेश के प्रतिफल की गणना करके बताता है।
हर साल किराया बढ़ता रहेगा जब तक कि वह ईएमआई के बराबर न हो जाए। इसके बाद कैलकुलेटर यह मान लेगा कि आप आगे निवेश नहीं करेंगे। दोनों ही स्थितियों में कैलकुलेटर (उधार की अवधि के अंत तक ) कुल मूल्य की गणना करता है।
‘फी’ के निवेश शोध टीम के प्रनीत बतानिया कहते हैं, ‘कैलकुलेटर का मकसद संभावित खरीदारों को घर खरीदने या फिर किराये पर घर लेने के निर्णय में वास्तविक आंकड़ो के आधार पर मदद करना है। कैलकुलेटर उपयोगकर्ताओं को उधार का बोझ, समयावधि, ब्याज दर कम करने में भी मदद कर सकता है।’
ध्यान रहे कि कैलकुलेटर घर की मरम्मत की लागत, प्रॉपटी टैक्स और आवास ऋण लेने के लाभों को अपनी गणना में शामिल नहीं करता है।
क्या करें और क्या न करें
यदि आपके पास से बड़ी मात्रा में पैसा जाने वाला है तो घर खरीदने से पहले उस पर ध्यान दें। धवन कहते हैं, ‘अपनी नौकरी के बारे में ध्यान से और शांति से विचार करें कि वह कितनी स्थाई है।’
पति-पत्नी दोनों कमाते है तो केवल एक व्यक्ति की आय का इस्तेमाल ही घर खरीदने में करना समझदारी है। धवन कहते हैं, ‘उनमें से एक व्यक्ति को परिवार की देखभाल के लिए, बूढ़े माता-पिता की देखभाल करने के लिए और उच्च शिक्षा के लिए नौकरी छोड़नी भी पड़ सकती है।’
पहला घर खरीदते समय आमतौर पर बजट के बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। इससे बचना चाहिए। इसके अलावा घर खरीदने के लिए पुश्तैनी धन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि इसे प्राप्त करने का समय आपकी आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता है। अंत में, बढ़ती ब्याज दरों के बारे में अत्यधिक चिंता न करें। पांड्या कहते हैं, ‘ज्यादातर मामलों में (विशेषकर युवा उधारकर्ताओं) ईएमआई स्थिर रहेगी, केवल समयावधि बढ़ेगी। ब्याज दरें चक्रीय होने के कारण, आवास ऋण की दर बढ़ेगी और घटेगी। 20 साल की समयावधि में ऐसे तीन-चार चक्र होंगे। बस सुनिश्चित करें कि आपका ऋण बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा है ताकि दर संचरण त्वरित और पारदर्शी हो।’