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सरकारी बैंकों ने 3 साल में 41,269 करोड़ रुपये के त्वरित ऋण बांटे

Last Updated- December 11, 2022 | 8:43 PM IST

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सितंबर 2018 से लेकर फरवरी 2022 के बीच करीब 41,269 करोड़ रुपये के त्रण बांटे हैं।
39,580 करोड़ रुपये के करीब 2.01 लाख ऋण प्रस्ताव कारोबारी ऋण श्रेणी में बांटे गए हैं और 1,689 करोड़ रुपये के 17,791 प्रस्ताव खुदरा ऋण श्रेणी में बांटे गए हैं। राज्यमंत्री भागवत किशनराव कराड ने राज्य सभा को सूचित किया कि ये सभी प्रस्ताव 25 सितंबर, 2018 से 28 फरवरी, 2022 तक पीएसबीलोंसइन59मिनट्सडॉटकॉम पोर्टल के जरिये दिए गए हैं।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को 59 मिनट के भीतर 1 करोड़ रुपये तक का ऋण देने के लिए इस पहल की घोषणा 2018 में की गई थी। पोर्टल का संचालन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) द्वारा किया जा रहा है। इस पोर्टल पर सार्वजनिक क्षेत्र के पांच बैंक मौजूद हैं। पोर्टल के मुताबिक ये बैंक अब 59 मिनट में 5 करोड़ रुपये तक के ऋण की सैद्घांतिक मंजूरी दे रहे हैं। पोर्टल की घोषणा ऋण देने की प्रक्रिया में नए बेंचमार्क को स्थापित करने और इसमें लगने वाले 20 से 25 दिनों के समय को घटाकर 59 मिनट करने के लिए की गई थी। मंजूरी के बाद 7-8 दिनों में ऋण दिए जा रहे हैं।       
तीन वर्ष में सर्वाधिक ऋण महाराष्ट्र में दिए गए। यहां करीब 25,834 उधारकर्ताओं को कुल मिलाकर 5,220 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 30,732 आवेदकों को 4,434 करोड़ रुपये त्वरित ऋण प्रोसेसिंग पोर्टल के माध्यम से दिए गए। महाराष्ट्र और यूपी के बाद गुजरात का स्थान है जहां 20,485 आवेदकों को 3,864 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए। पंजाब में 14,471 उधारकर्ताओं को 3,043 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए।
कराड ने यह भी कहा कि पोर्टल केवल ऋण की मंजूरी देता है और ऋण की रकम पर अंतिम फैसला ऋणदाताओं का होता है। ऋणदाता मंजूर किए गए ऋण खातों की निगरानी करते हैं और किसी खाता के गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) के तौर पर वर्गीकृत होने पर वसूली के लिए कदम उठाते हैं। 

First Published - March 15, 2022 | 11:35 PM IST

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