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सरकारी कारोबार से निजी बैंकों को राहत नहीं!

Last Updated- December 12, 2022 | 7:42 AM IST

निफ्टी बैंक सूचकांक ने गुरुवार को ज्यादा तेजी दर्ज नहीं की, जैसा कि बुधवार को बाजार विश्लेषकों द्वारा अनुमान जताया गया था। बुधवार को केंद्र सरकार ने अपने व्यवसाय निजी बैंकों के लिए स्वतंत्र बनाने की घोषणा की। अच्छी तेजी नहीं दिखने की मुख्य वजह यह भी रही कि एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक जैसे प्रख्यात नाम पहले से ही सरकार के साथ व्यवसाय कर रहे हैं और इसलिए इस पहल से अब सीमित तेजी देखी जा सकती है।
ग्राहक संतुष्टि बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा में इजाफा करने और ग्राहक सेवा में उच्च दक्षता पैदा करने की पहल के तौर पर सरकारी व्यवसायों (सरकारी एजेंसियां भी शामिल) को निजी क्षेत्र को सौंपने का मकसद बैंकों के बीच एक समान क्षेत्र तैयार करना है।
इस घोषणा का समय भी दिलचस्प है, क्योंकि यह आरबीआई के अगस्त 2020 के रुख पर केंद्रित है जिसमें कहा गया कि यदि बैंक के पास उधारकर्ता के लिए 10 प्रतिशत से कम ऋण है तो वह उसकी कैश क्रेडिट/ओवरड्राफ्ट अकाउंट सुविधा को साझा करने का लाभ नहीं उठा सकता। इस कदम को हाल के वर्षों में कॉरपोरेट ऋण के लिए घटते जोखिम को देखते हुए निजी बैंकों के सस्ते चालू खाता-बचत खाता (सीएएसए) व्यवसाय के लिए निर्धारक के तौर पर देखा गया था। इसलिए सरकारी व्यवसाय को स्वतंत्र बनाना एक सकारात्मक कदम है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है, ‘कर, शुल्कों, जीएसटी संग्रह, भुगतान सेवाओं, केंद्र/राज्य पेंशन योजनाओं, छोटी बचत योजनाओं पर हासिल की जाने वाली फ्लोट और फी इनकम का राजस्व में बड़ा योगदान हो सकता है।’ ब्रोकरेज के अनुसार, इसे वित्त वर्ष 2022 में 37 लाख करोड़ रुपये के संभावित राजस्व अवसर के तौर पर देखा जा सकता है।’
हालांकि कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का कहना है कि महज निजी बैंकों के लिए रास्ते खोलना ही उनके लिए फायदेमंद साबित नहीं होगा। उनका कहना है, ‘किसी बैंक को सरकारी भुगतान प्रणाली से जोडऩा समय लगने वाली प्रक्रिया हो सकती है और इसके लिए सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए रख्शने की जरूरत होगी तथा शुल्क आय के प्रवाह में ऊंची प्रतिस्पर्धा की स्थिति में कमी आने की आशंका रहेगी।’ क्या कम शुल्क मार्जिन से पैदा हुए दबाव की भरपाई के लिहाज से फ्लोट इनकम काफी हद तक पर्याप्त (संभावित प्रतिस्पर्धा की वजह से) होगी, इस पर भी ध्यान रखे जाने की जरूरत होगी।
आपको यह याद रखना चाहिए कि 2020 के येस बैंक संकट के बाद किस तरह से सरकारी एजेंसियों (राज्यों समेत) ने निजी बैंकों से अपने व्यवसाय वापस ले लिया थे और उन्हें सरकार के स्वामित्व वाले ऋणदाताओं को स्थानांतरित किया था। एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा कि कोविड-19 की वजह से पैदा हुई लॉकडाउन की स्थिति के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ लेनदेन से व्यवसाय करने में आसानी हुई थी। सरकार द्वारा अपना फैसला बदले जाने की संभावना बैंकों को चिंतित बनाए रखेगी। इसलिए शुरुआती उत्साह से परे, यह देखना जरूरी है कि क्या सरकारी व्यवसाय पर  रोक को हटाना फायदेमंद साबित होगा या नहीं।

First Published - February 26, 2021 | 11:40 PM IST

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